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नकली सोना गिरवी रखकर बैंक और ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी

नकली सोना कांड का पर्दाफाश, कोविडकाल में की गई थी धोखाधड़ी, सत्र न्यायालय ने सुनाई 5-5 वर्ष की सजा, सुप्रीम कोर्ट ने दो बार जमानत ठुकराई

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नकली सोना कांड का पर्दाफाश, कोविडकाल में की गई थी धोखाधड़ी

नकली सोना कांड का पर्दाफाश, कोविडकाल में की गई थी धोखाधड़ी

देवास. नकली सोना गिरवी रखकर बैंक और ग्राहकों के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले बैंक अधिकारियों पर सत्र न्यायालय ने सख्त शिकंजा कसा है। 2 करोड़ 22 लाख रुपए की सुनियोजित धोखाधड़ी के मामले में सत्र न्यायालय देवास ने बैंक (एसबीएफसी फाइनेंस एलटीडी) के चार अधिकारियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने सभी आरोपियों को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास, जुर्माना एवं मुआवजे की सजा सुनाई। बैक के अधिकारी महेंद्र पटेल (शाखा प्रबंधक), फाल्गुनी कश्यप (मुख्य मूल्यांकनकर्ता), शैलेंद्र शर्मा (सेल्स मैनेजर) एवं प्रमोद चौधरी (सेल्स ऑफिसर) ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर नकली सोने के आधार पर ऋण स्वीकृत किए और ग्राहकों को मोहरा बनाकर ऋण राशि स्वयं हड़प ली।

ग्राहकों को लोन बंद करने का झांसा दिया

जानकारी के अनुसार यह घटनाक्रम साल 2018 से 2021 के बीच कोरोनाकाल के दौरान हुआ। जांच में सामने आया कि कई मामलों में नकली सोना स्वयं बैंक कर्मचारियों ने उपलब्ध कराया। ऋण दस्तावेज ग्राहकों की अनुपस्थिति में तैयार किए गए तथा जाली हस्ताक्षर किए गए जिसकी पुष्टि हस्तलेखन विशेषज्ञ की रिपोर्ट से हुई। ग्राहकों को लोन बंद करने का झांसा दिया गया, लेकिन राशि जमा नहीं की गई। सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यह अपराध सुनियोजित है और सार्वजनिक धन व बैंकिंग व्यवस्था में जनता के विश्वास को गंभीर क्षति पहुंचाने वाला है। इसी आधार पर कठोर सजा दी गई।

दो बार जमानत याचिका खारिज

आरोपियों को धारा 420, 409, 467, 468, 471 एवं 120-बी आइपीसी के तहत दोषी पाया गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों की जमानत याचिका दो बार खारिज की थी। प्रकरण का निराकरण तय समय-सीमा में करने के निर्देश दिए थे। बैंक की ओर से अधिवक्ता उपेन्द्र सिंह चन्द्रावत ने सत्र न्यायालय उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी की। प्रकरण की विवेचना कोतवाली थाना के तत्कालीन उपनिरीक्षक महेन्द्र सिंह ने की।

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