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नशे की गोलियों की तस्करी में आ​खिर दोषी युवक को बीस साल कठोर कारावास, दो लाख रुपए का जुर्माना

श्रीगंगानगर. नशे के इस्तेमाल आने वाले गोलियों की तस्करी करने के जुर्म में अदालत ने एक जने को दोषी मानते हुए बीस साल कठोर कारावास व दो लाख रुपए जुर्माने की सजा से दंडित किया है। जबकि इस प्रकरण के पांच अन्य सहयोगियों को अभियोजन पक्ष के ठोस साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ […]

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श्रीगंगानगर. नशे के इस्तेमाल आने वाले गोलियों की तस्करी करने के जुर्म में अदालत ने एक जने को दोषी मानते हुए बीस साल कठोर कारावास व दो लाख रुपए जुर्माने की सजा से दंडित किया है। जबकि इस प्रकरण के पांच अन्य सहयोगियों को अभियोजन पक्ष के ठोस साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया। यह निर्णय गुरुवार को एनडीपीएस प्रकरण की स्पेशल जज कोर्ट के स्पेशल जज अजय कुमार भोजक ने सुनाया। विशिष्ट लोक अभियोजक विजेन्द्र कुमार घिंटाला ने बताया कि पुरानी आबादी के तत्कालीन एसएचओ अवधेश कुमार सिन्दू ने पुरानी आबादी एरिया में एक बाइक सवार युवक पर संदेह पर रोका और तलाशी। इस युवक की पहचान पुरानी आबादी वार्ड चार मियों की ढाणी निवासी हसन खां के रूप में हुई। इस युवक के कब्जे से एल्प्रोजॉम की 447 टेबलेट बरामद की। मौके पर औषधि नियंत्रक अधिकारी पंकज जोशी ने इन दवाओं की पुष्टि करते हुए सैम्पल लिए। पुलिस की जांच में आरोपी हसन खां ने स्वीकारा कि वह यह दवाइयों की खेप देवनगर निवासी अमृतलाल उर्फ बड़ेलाल गुप्ता से खरीद कर लाया था। जब आरोपी अमृतलाल उर्फ बड़ेलाल से पूछताछ की गई तब उसने मोहरसिंह चौक पुरानी आबादी निवासी संजय कुमार ब्राह़्मण से खरीदना स्वीकारा। इस पर पुलिस ने आरोपी संजय कुमार से पूछताछ की। इसने बताया कि वह तो नशे के इस्तेमाल टेबलेट और सिरप को एसएसबी रोड रामलाल कॉलोनी निवासी सुनील कुमार उर्फ नीलू अरोड़ा की दुकान पर काम करने वाले श्यामनगर निवासी सुरेन्द्र कुमार ब्राह़्मण से खरीदी थी। ऐसे में पुलिस ने आरोपी सुनील उर्फ नीलू अरोड़ा से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह जयपुर के ड्रग्स विक्रेता जवाहरनगर जयपुर निवासी अंकित गुप्ता से खरीद करता है। इसके एवज में वह बैँक खाते में रकम जमा कराता है। पुलिस ने जयपुर जाकर आरोपी अंकित गुप्ता को नशे की सप्लाई करने के आरोप में गिरफतार किया। अदालत ने इस मामले में आरोपी हसन खान को दोषी मानते हुए उसे सजा सुनाई जबकि आरोपियों अमृतलाल उर्फ बड़ेलाल गुप्ता, सुरेन्द्र कुमार, अंकित गुप्ता, संजय कुमार और सुनील उर्फ नीलू को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त किया।