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24,696 संपत्तियों का वक्फ दावा ‘खारिज’, राजस्थान में सबसे ज्यादा

नई दिल्ली। वक्फ संपत्तियों के रख-रखाव और उनके जनहित में उपयोग के लिए केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए वक्फ संशोधन कानून के परिणाम सामने आने लगे हैं। वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया के बीच सरकार ने अब तक 24,696 वक्फ दावे खारिज (अस्वीकार) कर दिए हैं यानी इन दावों […]

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नई दिल्ली। वक्फ संपत्तियों के रख-रखाव और उनके जनहित में उपयोग के लिए केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए वक्फ संशोधन कानून के परिणाम सामने आने लगे हैं। वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया के बीच सरकार ने अब तक 24,696 वक्फ दावे खारिज (अस्वीकार) कर दिए हैं यानी इन दावों में शामिल संपत्तियों को फिलहाल वक्फ संपत्ति नहीं माना गया है।

अस्वीकार होने वाले मामलों में सबसे अधिक 4,802 दावे राजस्थान में हैं। लगभग 4,458 खारिज मामलों के साथ तेलंगाना दूसरे स्थान पर है। संशोधित कानून में वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने गत जून में ‘उम्मीद’ पोर्टल शुरू कर देशभर की वक्फ संपत्तियों का डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य किया था।

देश में कुल 8,72,802 वक्फ अचल संपत्तियां दर्ज हैं, जिनमें से अब तक 5,82,541 (88%) संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। सत्यापन के दौरान दस्तावेजी कमियां और स्वामित्व संबंधी अस्पष्टता सामने आने पर हजारों दावे खारिज किए गए हैं।

आंकड़ों पर एक नजर

  • 8,72,802 कुल वक्फ अचल संपत्तियां
  • 5,82,541 (88%) पोर्टल पर अब तक दर्ज संपत्तियां
  • 24,696 खारिज दावे सत्यापन व अनुमोदन (42% दर्ज मामलों का)

वक्फ अचल संपत्ति वाले टॉप 10 प्रदेशों की स्थिति

कुल अचल संपत्ति दर्ज हजार मेंदावे अस्वीकार
पंजाब 26 223
राजस्थान 22 4,802
गुजरात 27 998
मध्यप्रदेश 27 1,178
महाराष्ट्र 63 3,679
कर्नाटक 58 1,166
उत्तर प्रदेश 98 1,472
पश्चिम बंगाल 58 1,765
तेलंगाना58 4,458
केरल 46 1,182

इन कारणों से हो रहे दावे अस्वीकार

1. डीड या घोषणा का अभाव: यदि किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने का विधिवत दस्तावेज उपलब्ध नहीं है या रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।

2.राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होना: वक्फ के भू-राजस्व अभिलेख (खसरा, खतौनी, जमाबंदी आदि) में संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज नहीं हो, या निजी/सरकारी भूमि के रूप में दर्ज हो।

3.स्वामित्व विवाद: संपत्ति पर निजी व्यक्ति का दावा हो, कोर्ट में मामला लंबित हो, या सरकारी भूमि के रूप में दर्ज हो।

4.डुप्लीकेट या ओवरलैप एंट्री: एक ही संपत्ति को दो बार दर्ज या सीमांकन स्पष्ट न होना।

5.अधूरी या गलत जानकारी: पोर्टल पर दस्तावेज अधूरे, नक्शा या सर्वे विवरण न हो, क्षेत्रफल में विसंगति।

खारिज संपत्तियों पर यह रास्ता... बेदखली नहीं

उम्मीद पोर्टल पर खारिज वक्फ संपत्तियों का सत्यापन वक्फ ट्रिब्यूनल और राज्य सरकारों की ओर से किया जा सकता है। यदि वैध दस्तावेज मौजूद नहीं हो तो ऐसी संपत्तियां सरकार के पास भी रह सकती हैं। हालांकि, विवाद के निपटान तक किसी को संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता।

2.39 लाख संपत्तियों का अनुमोदन

  • अब तक 2,39,000 से अधिक संपत्तियों को अनुमोदित और सत्यापित किया जा चुका है, जबकि 44,126 संपत्तियों का अनुमोदन लंबित है। शेष संपत्तियां जांच की प्रक्रिया में हैं।
  • छत्तीसगढ़ में करीब 4,230 संपत्तियों में से 2,076 की जानकारी अपलोड की गई है और 155 दावे खारिज हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में कानून को चुनौती की याचिका लंबित है और अंतरिम आदेश में कुछ प्रावधानों के अमल पर रोक लगाई गई है।

राजस्थान में 31 हजार वक्फ अचल संपत्तियां

राजस्थान में 31 हजार से अधिक वक्फ अचल संपत्तियां हैं, जिनमें से अभी तक 23 हजार संपत्तियों का डेटा अपलोड किया गया है। इनमें से 4,802 दावे खारिज किए गए हैं। मध्यप्रदेश में करीब 33 हजार में से 27 हजार संपत्तियों की जानकारी अपलोड हो चुकी है और 1,178 दावे निरस्त किए गए हैं।

विरोध के बीच बना था वक्फ का नया कानून

भाजपा समेत राजनीतिक दलों का एक बड़ा वर्ग यह मानता रहा है कि वक्फ संपत्ति के मामलों में वक्फ बोर्ड की मनमानी चलती रही है। हर किसी संपत्ति को वक्फ बताने का आरोप तक लगाए गए। ऐसे में नए वक्फ कानून में वक्फ ट्रिब्यूनल में बदलाव, राज्य बोर्डों में महिलाओं और गैर-मुस्लिम सदस्यों की भागीदारी जैसे कई प्रावधान शामिल किए गए।

कोर्ट ने इन प्रावधानों पर लगा रखी है रोक

  • जांच का अधिकार: कलेक्टर द्वारा संपत्ति की जांच के दौरान उसे वक्फ न मानने वाले प्रावधान पर रोक।
  • वक्फ बनाने की शर्त: वक्फ करने के लिए 5 साल तक इस्लाम का अनुयायी होने के प्रावधान पर रोक
  • बेदखली पर रोक: न्यायाधिकरण द्वारा अंतिम निर्णय होने तक किसी को संपत्ति से बेदखली पर रोक।