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11 साल में ही खड़बड़ा गया नाथू कॉलोनी फ्लाईओवर, अब तोड़ने की तैयारी में जुटी रेखा सरकार

Nathu Colony Flyover: पूर्वी दिल्ली के शाहदरा इलाके में बना नाथू कॉलोनी फ्लाईओवर कमजोर हो गया है। जांच में सामने आया है कि फ्लाईओवर भारी गाड़ियों का वजन नहीं सह पा रहा है। इस वजह से सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है।

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nathu colony flyover repair or demolition update due to safety issue

नाथू कॉलोनी फ्लाईओवर को लेकर सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

Nathu Colony Flyover: दिल्ली के शाहदरा इलाके में बना हुआ नाथू कॉलोनी फ्लाईओवर अब एक बड़ी परेशानी बन गया है। यह फ्लाईओवर 2015 में बना था और सिर्फ 11 साल में इसकी हालत इतनी बेकार हो गई कि अब इस पर चलना भी सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। जांच की रिपोर्ट्स में सामने आया कि यह फ्लाईओवर अब भारी गाड़ियों का वजन नहीं सह पा रहा है। दिल्ली विधानसभा के विंटर सेशन में भी सरकार ने इस बात को माना और कहा कि अब इसे लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। प्रशासन के सामने इसे तोड़ने, फिर से बनाने या फिर इसी की मरम्मत करने जैसे ऑप्शन्स हैं। इससे राजधानी में विकास के कार्यों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

शुरुआती सालों से ही दिखी खामियां

नाथू कॉलोनी फ्लाईओवर का निर्माण दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम ने कराया था। इसका उद्देश्य गाजीपुर बॉर्डर के आसपास लगने वाले भारी ट्रैफिक को कम करना था। हालांकि इसके बनने के कुछ साल बाद ही इसकी मजबूती पर सवाल उठने लगे थे। बनने के सिर्फ 3 साल बाद साल 2018 में फ्लाईओवर के स्ट्रक्चर में दरारें दिखने लगी थीं और उसके बाद साल 2019 में इस पर भारी वाहनों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को दी गई थी लेकिन उसके बाद भी इस फ्लाईओवर से संबंधित समस्याएं लगातार बढ़ती ही गईं।

लोड टेस्ट से पता चली असली स्थिति

फ्लाईओवर की असली हालत जानने के लिए पिछले साल तकनीकी जांच और लोड टेस्ट कराए गए। यह टेस्ट मई 2025 में करवाए गए, जिसमें यह फ्लाईओवर सुरक्षा के मानकों पर खरा नहीं उतरा। जांच की रिपोर्ट में सामने आया कि डेक स्लैब जरूरत से ज्यादा झुक गया है और साथ ही इस फ्लाईओवर के निर्माण में ही घटिया और कमजोर सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसके बाद अक्टूबर में एक स्पेशलिस्ट से भी राय ली गई, जिसने इसकी मरम्मत और सुधार के लिए कई सुझाव दिए। दिसंबर 2025 तक फ्लाईओवर को डिजाइन करने और दोबारा बनाने के लिए प्लान बनाया जा चुका है।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई तेज

काफी समय से स्थानीय लोग इस परेशानी का सामना कर रहे थे, जिसके बाद आखिरकार यह मामला कोर्ट तक पहुंचा। एक जनहित याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए थे। अदालत के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में जांच तेज हुई थी। अब इस मामले की मुख्यमंत्री स्तर पर समीक्षा हो रही है। लोक निर्माण विभाग इस मामले को लेकर रिपोर्ट सबमिट करने वाला है जिसके बाद सरकार यह फैसला लेगी कि इसी फ्लाईओवर का मरम्मत की जाएगी या उस तोड़कर नया फ्लाईओवर बनाया जाए। हालांकि इस फ्लाईओवर को बनाने का उद्देश्य भारी वाहनों के ढोने का आसान बनाना था लेकिन फ्लाईओवर कमजोर निकलने के कारण पिछले सात साल से इस पर भारी गाड़ियों की एंट्री बंद है। इसकी वजह से लोगों को वह फायदा मिल ही नहीं पा रहा, जिसके लिए यह फ्लाईओवर बनाया गया था।

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