
Arvind kejriwal: 13 साल पहले अन्ना हजारे आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 10 साल तक राज किया। सरकार चलाने के दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं पर तमाम प्रकार के आरोप भी लगे। अभी आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता से बाहर है, इसी बीच पार्टी संस्थापक के सदस्य और कभी केजरीवाल के सहयोगी रहे आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता प्रशांत भूषण ने केजरीवाल को लेकर बड़ी बात कही है। दरअसल, उन्होंने केजरीवाल को अच्छा आदमी नहीं बताया है। कहा है कि आम आदमी पार्टी (आप) भी दूसरे दलों जैसी ही बन गई।
आपको बता दें कि अन्ना आंदोलन की शुरुआत 5 अप्रैल 2011 को हुई थी, इस आंदोलन को बीते हुए 13 साल से ज्यादा हो गए हैं। इस आंदोलन का हिस्सा रहे चर्चित वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता प्रशांत भूषण मनमोहन सिंह की तारीफ करते हुए पछतावा जाहिर किया कि वह एक ऐसे आंदोलन का हिस्सा रहे जिसने उन्हें बदनाम किया और 'धूर्त शासन' को सत्ता में पहुंचने में मदद की। दरअसल, उन्होंने ये सभी बातें 26 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि पर लिखा था, जिसकी अब चर्चा हो रही है।
हालही में प्रशांत भूषण ने 'द वायर' को इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने अन्ना आंदोलन, इसमें शामिल लोगों और परिणाम के बारे में खुलकर बात की। उनसे पूछा गया कि लगभग डेढ़ दशक बीत जाने के अब पछतावा क्यों हो रहा है, इसका जवाब देते हुए उन्होंने भाजपा को आड़े हाथों लिया और कहा कि "हमारे लिए सबसे बड़ा अफसोस यही है कि हमारे आंदोलन का इस्तेमाल करके भाजपा ने न सिर्फ कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया, बल्कि खुद सत्ता तक पहुंच गई। यह वह भाजपा नहीं है जिसे अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में देखा गया था, बल्कि यह मोदी-शाह की भाजपा है, जिसने देश, संविधान, हमारी लोकतांत्रिक परंपराओं और मौलिक अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। भ्रष्टाचार खत्म होने के बजाय और बढ़ गया। हमारा आंदोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ था और उस समय यूपीए सरकार के दौरान वास्तव में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या थी। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि इस आंदोलन को समर्थन देकर भाजपा और उससे जुड़े लोगों ने उसे सत्ता में आने का रास्ता साफ कर दिया।"
इंटरव्यू के दौरान प्रशांत भूषण से पूछा गया कि क्या आंदोलन को आरएसएस का समर्थन था या नहीं, इसको लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खबर नहीं थी कि आंदोलन को सपोर्ट करने के लिए RSS भाजपा के कहने पर आई थी। इसके साथ ही उन्होंने कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल को भी राइट विंग आइडियोलॉजी (दक्षिण पंथी विचारधारा) समर्थक बताया। कहा कि 'कुमार विश्वास को लेकर आइडिया नहीं था कि वह भाजपा के ऐसे समर्थक हैं, कभी-कभी ऐसा लगता था कि वह राइट विंग आइडियोलॉजी के हैं। बाद में अरविंद केजरीवाल की भी राइट विंग आइडियोलॉजी दिखने लगी थी।'
कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी रहे प्रशांत भूषण ने बाद में उन पर धोखा देने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वह वैकल्पिक और ईमानदार राजनीति की उम्मीद लेकर आम आदमी पार्टी में आए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रशांत भूषण के मुताबिक, इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़े कई लोगों ने मिलकर नीतियों के लिए कमेटियां बनाई थीं, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने यह कहकर उन्हें नजरअंदाज कर दिया कि पार्टी को किसी तय पॉलिसी की जरूरत नहीं है और मुद्दों पर हालात के मुताबिक रुख लिया जाएगा। उसी समय उन्हें अहसास हो गया था कि केजरीवाल पार्टी को सही दिशा में नहीं ले जाएंगे। हालांकि, इन आरोपों पर अरविंद केजरीवाल या आम आदमी पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
गौरतलब है कि साल 2015 में ही प्रशांत भूषण समेत 4 बागी नेताओं को पार्टी से बाहर निकाल दिया गया था। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता दीपक वाजपेयी ने बताया था कि पार्टी की अनुशासन समिति ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रो. आनंद कुमार और अजीत झा को पार्टी के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में निष्कासित कर दिया है।
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Published on:
01 Jan 2026 02:51 pm
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