
— जिस चेहरे ने मुस्कुराना छोड़ दिया था, वह फिर मुस्कुरा सकता है
नई दिल्ली। सुबह उठकर अगर किसी व्यक्ति को यह महसूस हो कि उसके चेहरे का आधा हिस्सा अचानक हिलना बंद हो गया है—न मुस्कान बन पा रही है, न आंख ठीक से बंद हो रही है, न बोलना सहज है—तो यह किसी गहरे सदमे से कम नहीं होता। चेहरे की नसों का पक्षाघात, जिसे मेडिकल भाषा में फेशियल नर्व पैरालिसिस कहा जाता है, केवल सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की दिनचर्या, आत्मविश्वास और मानसिक सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के वरिष्ठ प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जन डॉ. मोहित शर्मा बताते हैं कि इंसान के चेहरे की हर अभिव्यक्ति—मुस्कान, पलक झपकाना, बोलना—एक ही महत्वपूर्ण नस, फेशियल नर्व, से नियंत्रित होती है। किसी वायरल संक्रमण, दुर्घटना, दिमाग या खोपड़ी की सर्जरी, सिर और गर्दन के कैंसर, पैरोटिड ग्रंथि के ट्यूमर या किसी गंभीर चोट के कारण जब यह नस प्रभावित हो जाती है, तो चेहरे का एक पूरा हिस्सा अचानक निष्क्रिय हो सकता है।
डॉ. शर्मा के अनुसार, “चेहरे का पक्षाघात केवल बाहरी रूप से जुड़ा मुद्दा नहीं है। इससे खाना खाते समय लार टपकना, बोलने में अस्पष्टता, आंख बंद न हो पाना जैसी परेशानियां होती हैं। कई मरीज धीरे-धीरे लोगों से मिलना-जुलना कम कर देते हैं और मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं।”
रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है सीधा असर
फेशियल नर्व पैरालिसिस से पीड़ित मरीजों को अक्सर गाल के अंदर खाना फंसने, शब्द साफ न निकलने और आंख खुली रहने की समस्या होती है। आंख बंद न हो पाने से आंख सूख सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर नजर को स्थायी नुकसान तक हो सकता है। इसके साथ ही मरीज का आत्मविश्वास भी बुरी तरह डगमगा जाता है।
राहत की बात: समय पर इलाज से लौट सकती है मुस्कान
विशेषज्ञ बताते हैं कि चेहरे का पक्षाघात कई मामलों में ठीक किया जा सकता है, बशर्ते मरीज सही समय पर विशेषज्ञ तक पहुंचे। यदि 6 से 12 महीनों के भीतर प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जन से परामर्श लिया जाए, तो नर्व ट्रांसफर सर्जरी के जरिए स्वस्थ नसों को प्रभावित नस से जोड़कर चेहरे की स्वाभाविक हरकतें दोबारा लौटाई जा सकती हैं। यह सर्जरी आमतौर पर दो से तीन घंटे में पूरी हो जाती है। हालांकि, इलाज में देरी होने पर स्थिति जटिल हो जाती है। करीब दो साल बाद चेहरे की मांसपेशियां कमजोर होकर सिकुड़ने लगती हैं। ऐसे मामलों में अत्याधुनिक और जटिल सर्जरी—फ्री फंक्शनिंग मसल ट्रांसफर—की जरूरत पड़ती है। इस प्रक्रिया में जांघ से एक जीवित मांसपेशी लेकर चेहरे में प्रत्यारोपित की जाती है और सूक्ष्म तकनीक से नसों व रक्त वाहिकाओं को जोड़ा जाता है। कुछ महीनों की रिकवरी के बाद चेहरे पर फिर से भाव लौटने लगते हैं।
सिर्फ मुस्कान नहीं, नजर और बोलने की क्षमता भी होती है बहाल
फेशियल रीएनिमेशन सर्जरी के जरिए आंखों की सुरक्षा भी की जाती है, जिससे आंख सूखने या अंधेपन का खतरा कम होता है। सही इलाज और पुनर्वास के बाद मरीज फिर से पलक झपकाना, बोलना और स्वाभाविक ढंग से मुस्कुराना सीख पाते हैं। आधुनिक एनेस्थीसिया और अनुभवी डॉक्टरों की वजह से आज यह इलाज सुरक्षित और भरोसेमंद हो चुका है। डॉ. शर्मा का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती मरीजों का देर से सही विशेषज्ञ तक पहुंचना है। कई बार उन्हें केवल फिजियोथेरेपी या स्पीच थेरेपी तक सीमित कर दिया जाता है, जिससे कीमती समय निकल जाता है।
चेहरे की पुनर्सक्रियता में अग्रणी भूमिका
देश में अभी गिने-चुने अस्पताल ही चेहरे की पुनर्सक्रियता (फेशियल रीएनिमेशन) का समग्र इलाज उपलब्ध कराते हैं। अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जहां इलाज का उद्देश्य केवल सर्जरी नहीं, बल्कि मरीज की जिंदगी, आत्मविश्वास और सम्मान को पूरी तरह लौटाना है।
Updated on:
24 Jan 2026 08:34 am
Published on:
24 Jan 2026 08:33 am
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