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नई दिल्ली, Jun 02, 2026

दिल्ली-NCR में रहना होगा महंगा, हर महीने 3,000 रुपए तक बढ़ सकता अतिरिक्त बोझ, 25-30% तक बढ़ेगा मेंटेनेंस चार्ज

Housing Society News: दिल्ली-एनसीआर की हाईराइज सोसाइटियों में रहने वालों की जेब पर जल्द अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। नए लेबर कोड के तहत न्यूनतम वेतन बढ़ने से सुरक्षा, हाउसकीपिंग और अन्य सेवाओं की लागत में इजाफा हुआ है, जिसके चलते सोसाइटियों के मासिक मेंटेनेंस चार्ज में 25% से 30% तक बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।

Delhi NCR Maintenance Charges

Ai से बना प्रतीकात्मक फोटो

Delhi NCR Maintenance Charges:दिल्ली-एनसीआर की हाईराइज सोसाइटियों और बड़े-बड़े अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए ये अहम खबर हो सकती है। क्योंकि अब यहां रहने वाले लोगों के जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। दरअसल, नए लेबर कोड अपडेट के तहत न्यूनतम वेतन में हुई बढ़ोतरी के कारण गेटेड कम्युनिटीज का मेंटेनेंस खर्च काफी बढ़ गया है। इसके चलते सोसाइटियों के मासिक मेंटेनेंस चार्ज में 25% से 30% तक का इजाफा हो सकता है।

आपको बता दें कि इसकी पहल दिल्ली-एनसीआर की कई सोसाइटियों की मैनेजमेंट कमेटियों ने कर दिया है। दरअल, बढ़े हुए दाम लागू कर दिए हैं या निवासियों को इसकी सूचना दे दी है। यह अतिरिक्त पैसा सुरक्षा गार्ड, माली, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर और सफाई कर्मचारियों जैसे स्टाफ के बढ़े वेतन को देने में इस्तेमाल होगा। अनुमान है कि प्रति फ्लैट यह अतिरिक्त बोझ 3,000 रुपए प्रति माह तक हो सकता है।

क्यों लग सकता है 18% GST का झटका?

वर्तमान में लागू GST के नियम को देखे तो हाउसिंग सोसाइटियों को प्रति फ्लैट 7,500 रुपए प्रति माह तक के मेंटेनेंस बिल पर जीएसटी से छूट मिलती है। लेकिन लेबर कॉस्ट और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण यदि किसी फ्लैट का मासिक मेंटेनेंस बिल 7,500 रुपए की सीमा को पार कर जाता है, तो उस पर 18% जीएसटी भी चुकाना होगा। ऐसे में पहले से ही इस लिमिट के करीब रहने वाले परिवारों का मंथली बजट पूरी तरह से बिगड़ सकता है।

गुरुग्राम में कई सोसाइटियों में दरें लागू

'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुग्राम की कई नामी सोसाइटियों में नई दरें लागू भी हो चुकी हैं।

एम्मार पाम गार्डन्स

आपको बता दें कि रिपोर्ट के मुताबिक, एम्मार पाम गार्डन्स के आरडब्ल्यूए (RWA) अध्यक्ष सुनील शर्मा ने बताया कि नए लेबर रूल्स की वजह से मैनपावर कॉस्ट में 35% की बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते कॉमन एरिया मेंटेनेंस (CAM) चार्ज को 3.15 रुपए प्रति वर्ग फुट से बढ़ाकर 4.37 रुपए प्रति वर्ग फुट कर दिया गया है।

गुरुग्राम वन

यहां मेंटेनेंस चार्ज में 1 रुपए प्रति वर्ग फुट की बढ़ोतरी की गई है। मैनेजमेंट कमेटी अब खर्चों को कम करने के लिए एलईडी लाइटिंग और बिजली की बचत जैसे रास्ते तलाश रही है। हालांकि, बढ़ते डीजल दामों के कारण जनरेटर बैकअप चलाना भी महंगा हो गया है।

राइजिंग होम्स

यहां के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष के अनुसार, करीब 100 कर्मचारियों वाले बड़े कॉम्प्लेक्स में यदि प्रत्येक गार्ड की सैलरी 3,000 रुपए भी बढ़ती है, तो सोसाइटी पर हर महीने 1.5 लाख रुपए का अतिरिक्त बोझ आएगा।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अलग-अलग रणनीति

मेंटेनेंस शुल्क में संभावित बढ़ोतरी को लेकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हाउसिंग सोसाइटियां अलग-अलग रास्ते अपना रही हैं। सेक्टर-77 स्थित प्रतीक विस्टेरिया में मेंटेनेंस रेट में 60 पैसे प्रति वर्ग फुट की बढ़ोतरी कर इसे 3.3 रुपये प्रति वर्ग फुट कर दिया गया है। वहीं, सेक्टर-137 की एक्सोटिका फ्रेस्को और सेक्टर-119 की गौर ग्रांडेयुर सोसाइटियों ने फिलहाल बढ़ी हुई दरें लागू करने से परहेज किया है। इन सोसाइटियों के प्रबंधन का कहना है कि खर्चों का पुनर्मूल्यांकन और ऑप्टिमाइजेशन करने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। गौर ग्रांडेयुर में पिछले आठ वर्षों के दौरान मेंटेनेंस शुल्क में केवल 10 पैसे प्रति वर्ग फुट की बढ़ोतरी की गई है।

अरिहंत अर्डेन (ग्रेटर नोएडा वेस्ट)

यहां बिजली का खर्च कम करने के लिए 500 किलोवाट (kWp) का सोलर सिस्टम लगाया जा रहा है, जो एनसीआर में अपनी तरह की पहली पहल है। हालांकि, यह कदम भी लेबर कॉस्ट की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहा है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष निशित चतुर्वेदी के अनुसार, वेतन वृद्धि से हर महीने करीब 5.31 लाख रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिसके लिए वे मेंटेनेंस में 25 पैसे प्रति वर्ग फुट बढ़ोतरी की मंजूरी मांगेंगे।

पारदर्शिता की कमी पर निवासियों का फूटा गुस्सा

एक तरफ जहां आरडब्ल्यूए और एओए (AOA) नए श्रम कानूनों का हवाला दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम निवासी इस बढ़ोतरी के तौर-तरीकों को 'अपारदर्शी' बता रहे हैं। निवासियों का आरोप है कि उन्हें इन गणनाओं की पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है। नोएडा के सुपरटेक इको विलेज 1 में 36 पैसे प्रति वर्ग फुट की प्रस्तावित बढ़ोतरी के खिलाफ निवासियों ने रविवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा नोएडा और ग्रेटर नोएडा की टाटा यूरेका पार्क, क्रेस्ट विला और गोदरेज गोल्फ लिंक्स जैसी सोसाइटियों में भी विरोध की आवाजें उठी हैं।

नोएडा फेडरेशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशंस (NOFAA) के अध्यक्ष पुनीत शर्मा ने ध्यान दिलाया कि सिर्फ न्यूनतम मजदूरी ही नहीं, बल्कि ईंधन की बढ़ती कीमतें और उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी भी इस वित्तीय बोझ को और बढ़ा रही हैं।

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