16 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सावधान! छुट्टी के लिए जाली मेडिकल कागजात पड़े भारी, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- जा सकती है नौकरी

delhi high court: अगर आप भी काम से बचने या वेतन न कटे, ऐसा सोचकर दफ्तर में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट लगाने की चालाकी करते हैं, तो सावधान हो जाइए। ऐसा करते पकड़े जाने पर या तो आपको सजा हो सकती है या नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने इस तरह के एक मामले में साफ कर दिया है कि यह एक प्रकार का गंभीर कदाचार है।

3 min read
Google source verification
Delhi High Court said fake medical grounds can lead to loss of job

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि बिना इजाजत के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने को सही ठहराने के लिए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट लगाना गंभीर कदाचार (सीरियस मिसकंडक्ट) है और इसके लिए कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त भी किया जा सकता है। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश को रद्द करते हुए इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स डिपार्टमेंट के एक क्लर्क की बर्खास्तगी को सही माना। अदालत ने साफ किया कि विभागीय कार्रवाई में आपराधिक मामलों जैसा “संदेह से परे सबूत” का मानक लागू नहीं होता।

टीबी की बीमारी बताकर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित कर्मचारी 1991 में चपरासी की नौकरी में नियुक्त हुआ था और बाद में क्लर्क पद पर पदोन्नत हुआ। वह सितंबर 2000 से अप्रैल 2003 तक बिना अनुमति लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित रहा। उसने अपनी गैरहाजिरी का कारण टीबी की बीमारी बताया और वापसी पर CGHS डिस्पेंसरी के चीफ मेडिकल ऑफिसर से बनवाए गए मेडिकल और फिटनेस सर्टिफिकेट जमा किए। विभागीय जांच में पता चला कि ये सर्टिफिकेट CGHS ने जारी ही नहीं किए थे। जिन तारीखों के सर्टिफिकेट थे, उन दिनों संबंधित डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं था और दस्तावेजों में निर्धारित सीरियल नंबर भी नहीं थे।

अनुशासन तोड़ने पर सेवा से मुक्त कर दिया

लंबी अनुपस्थिति को नियमित कराने के लिए फर्जी दस्तावेज जमा करने और गलत जानकारी देने के आरोप में कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। जांच में आरोप साबित होने के बाद डिसिप्लिनरी अथॉरिटी ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके बाद कर्मचारी ने इस फैसले को कैट में चुनौती दी। ट्रिब्यूनल ने बर्खास्तगी रद्द करते हुए कहा कि बिना आपराधिक मुकदमे या विशेषज्ञ राय के जालसाजी साबित नहीं की जा सकती और सजा पर फिर सोचा जाना चाहिए।

कैग ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कैट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। कैग की ओर से कहा गया कि ट्रिब्यूनल ने गलत तरीके से आपराधिक स्तर के सबूत की मांग की, जबकि विभागीय कार्रवाई में ऐसा जरूरी नहीं है। निजी तौर पर बनवाया गया प्रमाणपत्र को आधिकारिक CGHS दस्तावेज बताकर जमा करना ईमानदारी के खिलाफ गंभीर कदाचार है।

कर्मचारी की दलील

प्रतिवादी ने तर्क दिया कि CCS (लीव) नियम, 1972 के तहत CGHS से ही मेडिकल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य नहीं है और किसी अधिकृत डॉक्टर का प्रमाणपत्र पर्याप्त होता है। उसने जांच प्रक्रिया को भी गलत बताया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि विभाग के कर्मचारी को हटाने का निर्णय पूरी तरह सही और ठोस सबूतों पर आधारित था। जांच के दौरान CGHS से यह पुष्टि हुई कि कर्मचारीके जो मेडिकल सर्टिफिकेट थे वे जाली थे, क्योंकि वे न तो अस्पताल से जारी हुए थे और न ही उन पर कोई सीरियल नंबर था। यहां तक कि जिस डॉक्टर के नाम का उपयोग किया गया, वह उन तारीखों में छुट्टी पर था। इसके अलावा, कर्मचारी अपनी बीमारी को साबित करने के लिए डॉक्टर का पर्चा या ओपीडी का कोई भी रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका, जिससे यह साफ हो गया कि उसने नौकरी से बचने के लिए फर्जी कागजातों का सहारा लिया था। अदालत ने कहा कि कैट ने आपराधिक मामलों वाला मानक अपनाकर गलती की। विभागीय जांच में दोष सिद्ध करने के लिए यह पर्याप्त है कि उपलब्ध तथ्यों से आरोप सही होने की संभावना अधिक दिखाई दे।

कोर्ट ने गंभीर कदाचार माना

हाईकोर्ट ने माना कि मामला केवल गैरहाजिरी का नहीं बल्कि जानबूझकर फर्जी दस्तावेज जमा करने और गलत बयान देने का था, जो भरोसा तोड़ने वाला गंभीर आचरण है। अदालत ने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि नकली दस्तावेज पेश करना नियोक्ता के विश्वास को खत्म करता है और बर्खास्तगी उचित सजा हो सकती है। डिवीजन बेंच ने निष्कर्ष निकाला कि कर्मचारी का आचरण अत्यंत गंभीर था, इसलिए नौकरी से हटाने की सजा अनुपातहीन नहीं है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कैट का आदेश रद्द कर बर्खास्तगी का फैसला बहाल कर दिया।