नई दिल्ली, Jun 07, 2026

नई दिल्ली। भाजपा की राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन ने संकेत दिया है कि पंजाब में 2027 व राजस्थान में 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी अपने सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों को नए सिरे से गढ़ती दिखाई दे रही है। राजस्थान में डॉ. अलका गुर्जर और डॉ. सतीश पूनिया को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने गुर्जर और जाट समुदायों को स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। अब पार्टी को राजपूत, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के बीच भी संतुलन स्थापित करना होगा। इसके लिए आने वाले समय में चार स्तरों पर काम होगा।
दक्षिण राजस्थान में आदिवासी राजनीति का उभार भाजपा के लिए विशेष चिंता का विषय है। भारत आदिवासी पार्टी ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जबकि पश्चिमी व मध्य राजस्थान में रालोपा चुनौती है। पूर्वी राजस्थान में भी समीकरणों संतुलन साधा जाना है। ऐसे में राज्यसभा की यह सूची भाजपा की सामाजिक इंजीनियरिंग का पहला चरण है, जबकि दूसरा चरण प्रदेश संगठन की कमान , राजनीतिक नियुक्तियों और केन्द्र व राज्य सरकार में प्रतिनिधित्व के रूप में सामने आ सकता है।
भाजपा पंजाब में अपने संगठन और नेतृत्व को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश कर रही है। राजस्थान से राज्यसभा में सांसद केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजे जाने व तरुण चुग को मध्य प्रदेश से जार्ज कुरियन की जगह राज्यसभा भेजना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हाल ही केवल सिंह ढिल्लो के रूप में नया प्रदेशाध्यक्ष भी दिया गया है। यह भाजपा की पंजाब में सिख, दलित और शहरी हिंदू मतदाताओं के बीच नए सामाजिक गठबंधन की रणनीति को सामने लाती है।
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में जगह , केंद्रीय मंत्रिमंडल के फेरबदल में राजस्थान के चेहरों में बदलाव, राजस्थान में संगठनात्मक पुनर्गठन में प्रभावी समुदाय के चेहरे को कमान और राजस्थान के मंत्रीमंडल विस्तार व बोर्ड आयोग नियुक्तियों के रूप में अभी और सोशल इंजीनियरिंग करेगी जिसमें कुछ नेताओं के कद घटेंगे तो अब तक अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे चेहरों को जगह मिलेगी।
Published on: 07 Jun 2026 10:00 pm

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