
होली पर 122 साल बाद दुर्लभ संयोग : रंग उत्सव मनाने को लेकर ज्योतिषाचार्य और पंचाग कर्ताओं के अलग-अलग मत (इमेज सोर्स: चैट GPT AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर)
Holi 2026: होली पर्व पर रंग उत्सव मनाने को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 122 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब होलिका दहन के ठीक अगले दिन रंगों की पारंपरिक होली (धुलंडी) पर ग्रहण का साया रहेगा। 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण होने से सूतक काल मान्य होगा, जिससे तिथियों और उत्सव के समय में बड़ा बदलाव आया है। विद्वानों के बीच सूतक काल में रंग खेलने को लेकर दो राय सामने आई है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. विशाल लक्ष्मीकांत शुक्ला के अनुसार, 3 मार्च को सिंह राशि में चंद्र ग्रहण होने से यह 'खाली दिन' रहेगा, इसलिए रंगों की होली (धुलंडी) 4 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी। वहीं, कुछ अन्य पंचांग गणनाओं के अनुसार, 3 मार्च को ही धुलंडी मनाई जा सकती है, बशर्ते केवल सूखे और शुष्क रंगों का प्रयोग किया जाए। विद्वानों का तर्क है कि सूतक काल के दौरान जल का संसर्ग वर्जित होता है, लेकिन लोक परंपरा के निर्वहन के लिए गुलाल का उपयोग किया जा सकता है।
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर होलिका पूजन की मान्यता है। 2 मार्च को सायं 5:55 पर पूर्णिमा तिथि के आरंभ होने से होलिका का पूजन 2 मार्च को होगा, क्योंकि 3 मार्च को शाम 6.50 बजे प्रतिपदा तिथि लग जाएगी। इस दृष्टि से 2 मार्च को होलिका का पूजन प्रदोष काल में होगा। अगले दिन 3 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी। ग्रहण का सूतक होने से शुष्क रंगों का उपयोग किया जा सकता है।
धुलंडी 3 मार्च को मनाना शास्त्र सम्मत है। सूखे रंगों की होली खेलने में दोष नहीं है क्योंकि इस दिन खंडग्रास ग्रस्त उदित चंद्र ग्रहण रहेगा, जिसका समय 17 मिनट का रहेगा अर्थात शाम 6:47 तक ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इस दृष्टि से ग्रहण की मान्यता उतनी नहीं है।
Published on:
01 Mar 2026 05:41 am
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