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Election News: बंगाल में कितने चरणों में होगा मतदान? पार्टियों ने आयोग का इन मुश्किलों की ओर खींचा ध्यान

Voting Phases: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से दो-तीन चरणों में वोटिंग करवाने की मांग की है।

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भारत

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MI Zahir

Mar 15, 2026

Election Commission

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (फोटो: AI)

Election Commission : पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों (Bengal Election) को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं । हाल ही में चुनाव आयोग की टीम ने राज्य का दौरा किया और राजनीतिक दलों के साथ अहम बैठक की (Election Commission)। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव की तैयारियों का जायजा लेना था (West Bengal Politics)। राजनीतिक पार्टियों ने आयोग के सामने कई तरह की मुश्किलें और चिंताएं रखीं (Voting Phases)। सबसे बड़ी मांग यह है कि इस बार चुनाव कम चरणों में कराए जाएं (Political Parties)। पिछले विधानसभा चुनाव आठ चरणों में हुए थे, लेकिन इस बार दल चाहते हैं कि मतदान केवल दो या तीन चरणों में ही संपन्न हो (Poll Violence)। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव आयोग को एक 17-सूत्रीय ज्ञापन भी सौंपा है (BJP Memorandum)। इसमें मुख्य रूप से सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है (Central Forces)। विपक्षी दलों का साफ कहना है कि मतदान के दौरान राज्य पुलिस की भूमिका न के बराबर होनी चाहिए और पूरी कमान केंद्रीय बलों के हाथों में होनी चाहिए (Fair Elections)। चुनाव आयोग ने भी सभी दलों को भरोसा दिलाया है कि हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाओं पर 'जीरो टॉलरेंस' यानी शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी (ECI Decision)।

सुरक्षा और निष्पक्षता की मांग (Security Demand)

राजनीतिक दलों का मानना है कि ज्यादा चरणों में चुनाव होने से राज्य में हिंसा की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए, मतदान को जल्द से जल्द और कम से कम चरणों में निपटाने की वकालत की जा रही है। दलों ने स्पष्ट किया है कि जिन बूथों पर बहुत ज्यादा वोटिंग होती है, उन्हें संवेदनशील घोषित किया जाए। इसके अलावा, बहुमंजिला इमारतों में भी मतदान केंद्र बनाने का सुझाव दिया गया है ताकि हर वोटर आसानी से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके। शांतिपूर्ण मतदान के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

चुनाव आयोग का सख्त रुख (Zero Tolerance)

चुनाव आयोग ने राजनीतिक पार्टियों की चिंताओं को गंभीरता से सुना है। मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में आयोग ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की चुनावी हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य में शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की रणनीति बनाई जा रही है। संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की गश्त से मतदाताओं के मन में सुरक्षा की भावना पैदा करने की कोशिश की जाएगी। आयोग हर कदम पर पैनी नजर रख रहा है।

आगे की रणनीति (Future Action)

अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। क्या आयोग सचमुच दो या तीन चरणों में चुनाव कराएगा या फिर पुराने पैटर्न को ही अपनाएगा, यह देखना अहम होगा। हालांकि, आयोग की तैयारियां इस बार काफी पुख्ता नजर आ रही हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम और राजनीतिक दलों के लगातार दबाव के बीच, बंगाल का यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। आयोग जल्द ही स्थिति की समीक्षा कर अंतिम शेड्यूल जारी करेगा।

केंद्रीय बलों की निगरानी में चुनाव कराने की मांग

विपक्षी दलों (विशेषकर बीजेपी) ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से पूर्ण रूप से केंद्रीय बलों की निगरानी में चुनाव कराने की मांग की है। वहीं, राज्य के सत्ताधारी दल ने आयोग से निष्पक्ष भूमिका निभाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुचारू रखने की अपील की है। आम मतदाता हिंसा-मुक्त और शांतिपूर्ण चुनाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं। चुनाव आयोग इस दौरे की रिपोर्ट और राजनीतिक दलों के ज्ञापनों के आधार पर दिल्ली में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक करेगा। इसके बाद जल्द ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों और चरणों की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।