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शिवाजी महाराज से टीपू सुल्तान की तुलना पर सियासी संग्राम, असदुद्दीन ओवैसी ने दिया बड़ा बयान

Shivaji Tipu Comparison Controversy: छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना पर महाराष्ट्र में सियासी संग्राम तेज। असदुद्दीन ओवैसी के बयान से विवाद और गहराया।

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AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ( File Photo - IANS)

Shivaji Maharaj and Tipu Sultan comparison debate: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से किए जाने के बाद सियासी घमासन मच गया है। एक तरफ जहां राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनकी टिप्पणी को शर्मनाक करार दिया है, तो वहीं दूसरी तरफ AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा पर हमला बोला है।

AIMIM चीफ ने कहा, टीपू सुल्तान अपने मुल्क को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए शहीद हो गया। अंग्रेजों को टीपू से इतना डर था कि डेढ़ घंटे तक टीपू की लाश पड़ी रही। अंग्रेजी फौज के घेरे में लाश थी, लेकिन डर रहे थे कि शेर उठ गया तो क्या होगा? अंग्रेजों ने जाकर देखा तो टीपू का शरीर गर्म था।

असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा, '' 1799 में टीपू सुल्तान की शहादत हुई। टीपू सुल्तान ब्रिटिशों से लड़ते हुए शहीद हुए। टीपू ने ब्रिटिशों को प्रेम पत्र नहीं लिखे, जैसा कि वीर सावरकर ने किया था, जिनमें उन्होंने माफी मांगी और उनकी हर बात मानने का वादा किया था। टीपू ने तलवार उठाई और अपने देश को ब्रिटिशों से आज़ाद कराने की लड़ाई में शहीद हो गए। क्या यह झूठ है कि एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब ‘विंग्स ऑफ फायर’ में लिखा कि आज भारत के पास जो भी मिसाइल और रॉकेट तकनीक है, वह टीपू के सपनों को पूरा करने जैसा है? गांधी ने अपनी पत्रिका ‘यंग इंडिया’ में लिखा था कि टीपू सुल्तान हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हैं।''

क्या है पूरा मामला?

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मैसूर के 18वीं शताब्दी के शासक टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के समकक्ष बताया था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सपकाल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने उनकी इस टिप्पणी को शर्मनाक करार दिया था।

इस राजनीतिक विवाद की जड़ यह है कि टीपू सुल्तान को लेकर एक वर्ग जहां अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उनकी वीरता की तारीफ करता है, तो दूसरा वर्ग दक्षिण भारत के कई हिस्सों में हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार के लिए कड़ी आलोचना करता है। वहीं, सैन्य प्रतिभा, परोपकार और सामाजिक कल्याण पर आधारित प्रशासनिक कौशल के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज को सराहा जाता है।