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शरद पवार को जिस घर में वोट नहीं मिला, वहां मिलीं पत्नी; भाई को हरवाया था चुनाव

भतीजे अजित पवार की बगावत झेलने वाले शरद पवार ने भी कभी कांग्रेस से बगावत की थी। लेकिन, एक समय वह भी था जब उन्होंने कांग्रेस की खातिर भाई को चुनाव हरवाया था।

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Sharad pawar marriage

शरद पवार को राजनीति में करीब छह दशक हो गए हैं। (Photo: IANS/File)

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में 28 जनवरी को हुई मौत के बाद उनकी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में खालीपन आ गया है। यह कैसे भरेगा, इसे लेकर अटकलें चल रही हैं। इन अटकलों के बीच शरद पवार भी अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। कहा जा रहा है, अजित पवार की एनसीपी शरद पवार की एनसीपी में मिल सकती है।

भतीजे की बगावत से पवार को लगा सबसे बड़ा झटका

32 साल की उम्र में मंत्री बनने वाले शरद पवार के राजनीतिक कद को सबसे बड़ा झटका अजित पवार की बगावत से ही लगा है। हालांकि एक समय खुद उन्होंने भी कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई थी। उस कांग्रेस से जिसके लिए उन्होंने चुनाव में भाई तक का साथ नहीं दिया था। यह किस्सा आगे जानेंगे, पहले जानते हैं उनके जीवन से जुड़ा दिलचस्प वाकया। कैसे वह एक बुजुर्ग के घर वोट मांगने गए तो उन्हें साफ इनकार सुनना पड़ा था। आगे चल कर उन्हीं बुजुर्ग के यहां उन्हें जीवनसाथी मिला। पवार ने अपनी आत्मकथा ‘ऑन माई टर्म्स’ में इसका जिक्र किया है।

...कांग्रेस को तो मैं कभी वोट नहीं दूंगा- जब पवार को मिला था टका सा जवाब

बात 1962 के विधानसभा चुनाव की है। पुणे की शिवाजीनगर सीट से एसजी वर्वे कांग्रेस के उम्मीदवार थे। उनका मुख्य मुक़ाबला जनसंघ के रामभाऊ म्ल्हागी से था। शरद पवार को वर्वे की जीत के लिए पोस्टर लगाने आदि का काम सौंपा गया था। वह दोस्तों के साथ साइकल से निकलते और पोस्टर लगाने लायक जगह देख कर साइकल खड़ी कर देते थे। उनके दोस्त दोनों तरफ से साइकल पकड़ लेते थे। पवार साइकल की सीट पर खड़े होकर दीवार पर पोस्टर चिपकाया करते थे।

वोट नहीं देने वाले ने दे दी घर की बेटी

मतदान से ऐन पहले मतदाताओं की पर्ची बनाना और घर-घर पहुंचाना बड़ा काम था। यह काम करते-करते एक दिन वह प्रभात रोड के एक मकान पर पहुंचे। मकान पर ‘ब्रिगेडियर राणे’ का नेमप्लेट लगा था। एक बुजुर्ग शख्स ने दरवाजा खोला और सवालिया नजरों से पवार व उनके साथियों को देखा। पवार ने कहा, ‘हम कांग्रेस के लोग हैं और अपनी पार्टी के लिए वोट मांगने आए हैं।’ कांग्रेस का नाम सुनते ही बुजुर्ग ने तुरंत कहा, ‘कांग्रेस के हो तो वोट भूल जाओ। मैं तुम्हारी पार्टी को कभी वोट नहीं दूंगा।’

उन्होंने वर्वे को वोट दिया हो या नहीं, लेकिन उनकी पोती पवार के घर आ गईं। उस घटना के कई साल बाद शरद पवार की शादी प्रतिभा से हुई। पता चला कि ब्रिगेडियर राणे प्रतिभा के दादा थे। वैसे, उस चुनाव में जीत कांग्रेस के वर्वे की ही हुई थी और वह वित्त मंत्री भी बने।

अब जानते हैं, वह किस्सा जब शरद पवार ने पार्टी के लिए उसूलों से सम्झौता नहीं किया और चुनाव में भाई के खिलाफ हो गए थे।

पार्टी की खातिर शरद पवार ने भाई को हरवाया था चुनाव

बारामती के सांसद की मौत के चलते 1960 में वहां उपचुनाव हो रहा था। शरद पवार के भाई वसंतराव पवार वामपंथी झुकाव वाली पार्टी पीजैंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया (पीडबल्यूपी) के उम्मीदवार थे। उन्हें एसएम जोशी, आचार्य अत्रे, उद्धवराव पाटिल जैसे दिग्गजों का समर्थन था। उस समय वाईबी चव्हाण कांग्रेस के प्रमुख थे। उन्होंने इस चुनाव को नाक का सवाल बना लिया था। उन्हें हर हाल में कांग्रेस की सीट बचानी थी। दिवंगत सांसद केशवराव जेधे के बेटे गुलाबराव जेधे कांग्रेस के उम्मीदवार थे। सबके मन में यह सवाल था कि शरद पवार भाई के साथ रहेंगे या पार्टी के? लेकिन, वसंतराव ने शरद पवार की दुविधा दूर कर दी। उन्होंने साफ कहा, ‘तुम कांग्रेस की विचारधारा के प्रति समर्पित हो। मेरे खिलाफ प्रचार करना पड़े तो झिझकना नहीं।’ शरद पवार ने कांग्रेस उम्मीदवार के लिए जम कर प्रचार किया और वसंतराव चुनाव हार गए।

भारत-चीन युद्ध के दौरान किया था बड़ा विरोध प्रदर्शन

शरद पवार शुरू से ही कुशल संगठनकर्ता भी रहे हैं। 1962 में जब चीन से भारत की लड़ाई हुई थी तो शरद पवार और पुणे के कई युवा इस लड़ाई में जाने के लिए तैयार थे। उन्होंने कॉलेज के छात्रों को इकट्ठा भी कर लिया था और उनके साथ चीन के खिलाफ जुलूस निकाला था। पुणे यूनिवर्सिटी के वीसी से इसका नेतृत्व करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्हें लग रहा था कि ये लड़के सफलतापूर्वक, संगठित तरीके से कार्यक्रम नहीं करवा पाएंगे। लेकिन, यह विरोध प्रदर्शन बेहद सफल रहा था।

शरद पवार को राजनीति में करीब सात दशक हो गए हैं। 1958 में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली थी। वह कई दशक कांग्रेस में रहे और बाद में अपनी अलग पार्टी एनसीपी बनाई। उनके भतीजे अजित पवार ने एनसीपी तोड़ कर पार्टी के नाम और निशान पर कब्जा कर लिया। अब अजित की मौत के बाद एक बार फिर अटकलें लग रही हैं कि एनसीपी एक हो सकती है।

#AjitPawarDeathमें अब तक
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