15 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Sabarimala Gold Theft: सबसे सीनियर पुजारी की गिरफ्तारी से हड़कंप, कैसे मंदिर से गायब हुआ सोना? कहानी में नया ट्विस्ट

केरल के सबरीमाला मंदिर से सोने की चोरी के मामले में पुलिस ने मंदिर के सबसे बड़े पुजारी कंदारारू राजीव्वारू को गिरफ्तार किया है। अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मंदिर के कर्मचारी और CPI(M) नेता शामिल हैं।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Jan 10, 2026

सबरीमाला सोना चोरी केस। (फोटो- ANI)

केरल के सबरीमाला मंदिर से सोने की चोरी के मामले में पुलिस की स्पेशल टीम ने मंदिर के सबसे बड़े पुजारी कंदारारू राजीव्वारू को गिरफ्तार कर लिया है।

इस मामले में दो केस दर्ज किए गए हैं और अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मंदिर के सीनियर कर्मचारी और CPI(M) के नेता शामिल हैं। ये सभी लोग मंदिर के मैनेजमेंट से जुड़े थे।

पुजारी परिवार से यह पहली गिरफ्तारी

राजीव्वारू की इस मामले में 11वीं गिरफ्तारी है। साथ ही मंदिर में पुजारी परिवार से यह पहली गिरफ्तारी है। उन्हें कोल्लम की विजिलेंस कोर्ट में पेश किया गया, जिसने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

उनकी गिरफ्तारी मंदिर में चल रहे सालाना उत्सव के दौरान हुई है, लेकिन इससे पूजा-पाठ पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके परिवार के एक सदस्य महेश मोहनारू ने मुख्य पुजारी का कार्यभार संभाल लिया है।

चोरी के मामले में दो केस दर्ज

बता दें कि सोने की चोरी के मामले में दो केस दर्ज हैं। पहला केस मंदिर के दरवाजों से सोने की परत वाले हिस्से और प्लेटों को हटाने का है, जिसमें राजीव्वारू 13वें आरोपी हैं। दूसरा केस मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों से सोने से ढकी प्लेटों को हटाने का है।

SIT ने अदालत में कहा है कि राजीव्वारू की मिलीभगत से मंदिर में अनुष्ठान का उल्लंघन हुआ है। वह 1998-99 में मंदिर के मुख्य पुजारी थे, जब मंदिर की कलाकृतियों पर पहली बार सोने की परत चढ़ाई गई थी।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि राजीव्वारू 2019 में भी मुख्य पुजारी थे, जब उन्हीं कलाकृतियों को हटाकर मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को सौंप दिया गया था।

क्या है एसआईटी का दावा?

SIT ने यह भी दावा किया कि राजीव्वारू को पता था कि ऐसी चीजों के मरम्मत का काम केवल मंदिर परिसर में ही होना चाहिए था, लेकिन पोट्टी ने उन्हें बाहर ले जाकर सोने की परत चढ़ाने का काम किया।

जांचकर्ताओं का कहना है कि जब मंदिर की प्लेटों को हटाकर पोट्टी को सौंपा गया तो राजीव्वारू ने जानबूझकर अनदेखी की, जो नियमों के खिलाफ था।

SIT का दावा है कि मंदिर में सबसे बड़े अधिकारी होने के बावजूद, राजीव्वारू ने सोने की परत वाले कवर को हटाने के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

SIT का कहना है कि जब पोट्टी ने जुलाई 2019 में चीजें वापस कीं, तो राजीव मंदिर में थे, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। SIT का आरोप है कि राजीव ने पोट्टी के साथ मिलकर साजिश रची और उनके हितों को आगे बढ़ाया।