
जल-थल-नभ तीनों में भारत के जांबाजों ने दिखाया जौहर (इमेज सोर्स: ANI एक्स)
IFR-MILAN-IONS 2026 Update: पहली बार भारत एक साथ तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय समुद्री इवेंट्स- ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ (IFR) 2026, ‘एक्सरसाइज MILAN 2026’ और ‘इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम’ (IONS) चीफ्स कॉन्क्लेव की मेजबानी कर रहा है। विशाखापत्तनम से भारत के जांबाजों का धमाकेदार आगाज वीडियो के रूप में सामने आ चुका है।
15 से 25 फरवरी तक चलने वाले इस मेगा कार्यक्रम में न केवल भारतीय नौसेना का दमखम देखने को मिलेगा, बल्कि थल सेना और वायु सेना का संयुक्त पराक्रम भी देखने को मिलेगा।
सोशल मीडिया एक्स पर इसका छोटा सा वीडियो भी आ गया है। दुश्मन देशों को कंपाने वाले युद्धक टैंकों की समुद्र में एंट्री से लेकर आसमान में उड़ान भरते लड़ाकू विमानों और समुद्र में तैनात युद्धपोतों तक, हर फ्रेम भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति का यह एक सबूत है। ऐसे में यह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की उभरती समुद्री महाशक्ति की घोषणा है।
चीन दुनिया भर के देशों को अपनी कर्ज नीति में फंसा रहा है। अफ्रीकी देशों पर भी वह पिछले एक दशक से ज्यादा समय से अपना फोकस बढ़ाए हुए है, जो भारत के लिए एक अच्छा संकेत नहीं है।
भारत के लिए अफ्रीकी देश सामरिक और व्यापारिक तौर पर महत्वपूर्ण हैं और भारत सरकार अलग-अलग तरीकों से अपने पुराने रिश्तों को और मजबूत करना शुरू कर चुकी है। इस मजबूती की एक झलक विशाखापत्तनम में 15 फरवरी से 25 फरवरी तक आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और ‘मिलन’ अभ्यास में भी देखने को मिलेगी।
भारत इस बार समुद्री क्षेत्र में अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक नए स्तर पर ले जा रहा है। IFR 2026 जैसे बड़े इवेंट में 70 से ज्यादा देश शामिल हो रहे हैं, जिनमें 20 से अधिक अफ्रीकी देश भी हैं। इनमें ईस्ट अफ्रीका से लेकर वेस्ट अफ्रीका तक के देश शामिल हैं। सेशेल्स और साउथ अफ्रीका अपने युद्धपोत भेज रहे हैं, जबकि बाकी देश अपने नौसैनिक अधिकारियों के साथ हिस्सा लेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मिशन सागर से महासागर” मंत्र को आगे बढ़ाते हुए भारतीय नौसेना इंडो-पैसिफिक और अफ्रीकी देशों के साथ साझेदारी मजबूत कर रही है। आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत भारत जो रक्षा उपकरण बना रहा है, उनके लिए अफ्रीकी देश एक बड़े संभावित बाजार के रूप में देखे जा रहे हैं। वहीं भारत अफ्रीकी देशों में मौजूद खनिज और ऊर्जा संसाधनों से भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकता है।
भारत और अफ्रीकी देशों के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। पिछले साल भारतीय नौसेना ने पहली बार दो बड़े ऑपरेशन—आईओआर शिप सागर और तंजानिया के साथ संयुक्त एआईकेईवाईएमई अभ्यास—सफलतापूर्वक किए। इसमें कोमोरोस, जिबूती, इरीट्रिया, केन्या, मेडागास्कर, मॉरीशस, मोज़ाम्बिक, सेशेल्स और साउथ अफ्रीका जैसे कई देश शामिल हुए। इन अभ्यासों का मकसद समुद्री सुरक्षा और प्रशिक्षण को बेहतर बनाना था।
भारत ने अल्जीरिया, मोरक्को और कई अन्य अफ्रीकी देशों के साथ नौसैनिक अभ्यास किए हैं। इसके साथ ही उच्च-स्तरीय दौरों ने रिश्तों को और गहरा किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और सीडीएस जनरल अनिल चौहान की यात्राओं के दौरान कई समझौते भी हुए।
भारत ने जी20 शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य बनाने का समर्थन करके दुनिया के सामने अपना स्पष्ट रुख दिखाया कि वह अफ्रीकी देशों के साथ मजबूत साझेदारी चाहता है।
इन बढ़ते रिश्तों की एक वजह चीन का बढ़ता प्रभाव भी है। चीन अफ्रीका में सस्ते लोन और सैन्य उपकरण देकर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य बेस भी खोल चुका है। भारत इस प्रभाव को संतुलित करना चाहता है और अफ्रीकी देशों के साथ भरोसे और सहयोग पर आधारित साझेदारी बना रहा है।
Published on:
15 Feb 2026 05:38 am
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