1 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भारत, Jun 02, 2026

दिल्ली में मेहरौली इमारत हादसाः बच्चों को बचाने लौटी ‘पार्वती आंटी’, खुद नहीं बच सकीं

Mehrauli rescue story: दिल्ली के मेहरौली में इमारत गिरने की दर्दनाक घटना में कैंटीन चलाने वाली पार्वती आंटी की बहादुरी ने सबको भावुक कर दिया। हादसे में उनकी जान चली गई, लेकिन उन्होंने छात्रों की जान बचाने के लिए आखिरी पल तक कोशिश की। उनकी यह कहानी इंसानियत और त्याग की मिसाल बन गई।

delhi Mehrauli building collapse

दिल्ली में मेहरौली हादसे की तस्वीर (Photo- IANS)

Mehrauli building collapse: दक्षिण दिल्ली के मेहरौली में शनिवार को पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना ने छह लोगों की जान ले ली। इमारत क्यों गिरी, इसका जवाब जांच दे देगी। दोषी कौन है, यह अदालत तय करेगी। लेकिन महरौली के लोगों के लिए 'मां' जैसी 'पार्वती आंटी' की पहचान किसी केस फाइल में नहीं सिमटेगी, जो वहां एक कैंटीन चलाती थीं। जिसने आखिरी क्षण तक दूसरों की जान बचाना अपनी जान से ऊपर रखा। बचाव अभियान में स्थानीय लोग और छात्र लगातार एक ही सवाल पूछते रहे, 'पार्वती आंटी मिल गईं क्या?' जब उनके निधन की खबर आई, तो कई आंखों से आंसू बह निकले।

बाहर आकर भी दोबारा अंदर दौड़ीं

हादसे से कुछ मिनट पहले पार्वती 12 आलू पराठों और चार कोल्ड कॉफी का ऑर्डर तैयार कर रही थीं। तभी जमीन कांपी और बगल की इमारत झुकती दिखाई दी। लोग जान बचाकर बाहर भागे। पार्वती भी बाहर आ गईं। लेकिन तभी उन्हें याद आया कि कैंटीन के भीतर अभी कुछ छात्र मौजूद हैं। वह दोबारा अंदर दौड़ पड़ीं। मकसद था कि 'बच्चे' समय रहते बाहर निकल जाएं। कुछ ही क्षण बाद पूरी इमारत और उसका मलबा कैंटीन पर आ गिरा। आंटी फिर बाहर नहीं आ सकीं।

नेपाल से आकर डाली थी कैंटीन

नेपाल मूल की पार्वती इमारत के पास एक टीन शेड वाली कैंटीन चलाती थीं। यह छोटी-सी कैंटीन वर्षों से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चों और नौकरीपेशा लोगों के लिए घर जैसा ठिकाना थी। सस्ते, घर जैसे खाने के कारण उनकी कैंटीन इलाके में बहुत लोकप्रिय थी। बल्कि घर से दूर एक मां जैसी थीं। लोग वहां सिर्फ पराठे या चाय पीने नहीं आते थे, बल्कि दो मीठे बोल सुनने भी आते थे। हर किसी के लिए उनके चेहरे पर ममताभरी मुस्कान तैयार रहती थी।

पार्वती की यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बन गई है। महरौली के लोग उन्हें एक ऐसी शख्सियत के रूप में याद कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी जान से ज्यादा दूसरों की सलामती को अहमियत दी। उनकी मुस्कान, अपनापन और लगाव हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी। उनका जाना एक खालीपन छोड़ गया है, जिसे कोई भर नहीं पाएगा।

कमेंट्स

कोई कमेंट नहीं है।

पहले कमेंट करने वाले बनें।

कृपया पक्का करें कि आपका कमेंट हमारे नियमों एवं शर्तों के मुताबिक हो।
ट्रेंडिंग वीडियो

संबंधित खबरें