भारत, Jun 02, 2026

सिंगल लॉग-इन डिजिटल सिस्टम के जरिए सरकारी सेवाओं को आसान बनाने की तैयारी। (Photo - AI)
Digital Hybrid System: केंद्र सरकार लोगों का जीवन सरल बनाने के लिए ऐसा नया डिजिटल हाईब्रिड सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है। इस सिस्टम से सिंगल लॉग-इन के जरिये रोजमर्रा की जिंदगी व परिवार की आवश्यकताओं के सरकारी विभागों से जुड़े काम आसानी से ऑनलाइन निपटाए जा सकेंगे। सरकारी सूत्रों का दावा है कि डिजिटल युग में यह कदम क्रांतिकारी साबित होगा। जिस तरह देश में यूपीआई पेमेंट ने बहुत कुछ बदला, वैसे ही अब यह सिस्टम भी सरकारी सेवाओं में काफी कुछ बदल देगा। इस नए सिस्टम में एक डिजिटल हाइब्रिड नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसमें सिंगल लॉग-इन का एक्सेस आधार कार्ड नंबर होगा।
आधार नंबर ही इस लॉग-इन एक्सेस का आईडी बनाया जाएगा। इस आईडी से डिजिटल हाइब्रिड नेटवर्क पर सिंगल लॉग इन से विभिन्न प्रकार की सरकारी सेवाओं का विंडो खुलेगा जहां आप अपना काम पूरा कर सकेंगे। इस नेटवर्क पर बिजली-पानी का बिल भरने से लेकर, टैक्स, संपत्ति दस्तावेज, नामांतरण, पंजीयन, उनकी प्रतियां लेने व संपत्ति फ्री-होल्ड करवाने जैसे काम हो सकेंगे। यह डिजिटल हाइब्रिड नेटवर्क पूरी तरह सरकारी रहेगा। एक दर्जन से ज्यादा विभाग-मंत्रालय इस हाइब्रिड नेटवर्क पर रहेंगे। बाद में इसका व्यापक विस्तार होकर राज्यों की सेवा तक दायरा बढ़ाया जाएगा। इस व्यवस्था को लागू करने के फैसले के साथ ही इस पर काम शुरू हो चुका है। प्रारंभिक मसौदा तैयार होने को है जिसे लगातार अपडेट किया जाएगा। टेस्टिंग और नियम-कायदों में जरूरी संशोधन के बाद इसे लागू किया जाएगा। फिलहाल इसकी कोई निश्चित समय या तारीख तय नहीं है।
एक ही हाइब्रिड प्लेटफार्म पर अनेक सरकारी सेवाएं होने के कारण इसमें सबसे पहले व्यक्ति का सत्यापन और फिर सर्टिफिकेशन होगा। इसमें आधार नंबर का सत्यापन और फिर सर्टिफिकेशन होगा। शुरुआत में यह अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक रखा जाएगा। जानकार सूत्रों के अनुसार बाद में इसे अनिवार्य भी किया जा सकता है। एक बार आधार नंबर का सत्यापन और सर्टिफिकेशन होने के बाद सिंगल लॉग-इन आइडी जनरेट की जाएगी।
जानकार सूत्राें के अनुसार इस हाईब्रिड नेटवर्क में शुरुआती तौर पर 13 सेक्टर की 50 सेवाओं को शामिल किया जाएगा। बाद में इसका दायरा अन्य सेवाओं तक बढ़ेगा। आगे राज्यों में चल रहे इसी तरह के प्लेटफॉर्म को इस हाईब्रिड नेटवर्क से इंटीग्रेट किया जा सकता है। राजस्थान (एसएसएसओ आईडी) सहित कुछ राज्यों में अपना सिंगल आईडी नेटवर्क है लेकिन विभिन्न राज्यों के नेटवर्क व सेवाओं में एकरूपता के लिहाज से केंद्र का नेटवर्क ज्यादा प्रभावी व व्यापक होगा। घर-जमीन के दस्तावेज व टैक्ट, ऑनलाइन भुगतान, सामुदायिक भवन, पार्क, मैदान, पानी-बिजली-गैस का कनेक्शन व बिल का भुगतान, चिकित्सा, ओपीडी-आईपीडी, खेल सेवाएं, इंटरएक्टिव डिस्पोजल का लैंड इनफॉरमेशन और सामान्य नागरिक सेवाएं। इसके अलावा प्रॉपर्टी, लीज फ्रीहोल्ड, प्रॉपर्टी नामांतरण व लाइसेंस शुल्क और जन शिकायत संबंधित सेवाएं भी इस दायरे में रहेंगी।
प्रश्नः यह सिस्टम कब से लागू होगा?
उत्तरः निश्चित समय तय नहीं, आधा दर्जन सरकारी केंद्रीय मंत्रालय ने इस पर काम शुरू कर दिया है। पहले सत्यापन व सर्टिफिकेशन शुरू होगा।
प्रश्नः क्या प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य होगा?
उत्तरः इसे स्वैचिच्छक रखा गया है। सरकार पहले कुछ चिन्हित सरकारी कर्मचारियों के लिए इसे लागू कर सकती है। बाद में धीरे-धीरे सबको लाभ मिलेगा।
प्रश्नः आम आदमी को क्या फायदा होगा?
उत्तर- कोई भी व्यक्ति एक ही एक्सेस से विभिन्न सरकारी सेवाओं का उपयोग कर सकेगा। इसमें काम जल्दी होगा, मॉनिटरिंग व रिकॉर्डिंग आसान होगी, भ्रष्टाचार की गुंंजाइश कम होगी, समय-श्रम व पैसे की बचत होगी।
प्रश्न- क्या इस सिंगल लॉग-इन के लिए कोई शुल्क रहेगा?
उत्तरः नहीं, इसके लिए कोई शुल्क नहीं रहेगा।
समाजसेवी व साइबर एक्सपर्ट प्रो. नमित भट्टाचार्य ने कहा, 'भविष्य की बढ़ती तकनीक के हिसाब से सरकारी सेवाओं में बदलाव और अपग्रेडेशन जरूरी है। यूं भी हम अब सिंगल एक्सेस की ओर हर स्तर पर जा रहे है। इसलिए सरकार के स्तर पर भी सिंगल एक्सेस से अनेक काम होना बेहतर है। इससे काम पहले की तुलना में आसान होगा। इसमें केवल साइबर सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना होगा।'
Published on: 02 Jun 2026 02:22 am

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