
पाकिस्तान में फफूल रहा आतंकवाद। (फोटो: ANI)
Accountability: पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक ताजा सनसनीखेज विश्लेषण में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद जड़ से खत्म करने के बजाय उसका 'व्यवस्थित प्रबंधन' (Terror Management Model) करने की खतरनाक रणनीति अपनाई है। इस खुलासे ने एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा मंचों पर पाकिस्तान की दोहरी चाल बेनकाब कर दी है। दक्षिण एशिया विशेषज्ञ और ग्रीक पत्रकार दिमित्रा स्टाइकोउ के अनुसार, पाकिस्तान की राज्य संस्थाएं लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed Training Camp) जैसे प्रतिबंधित समूहों को न केवल बचा रही हैं, बल्कि उन्हें राजनीतिक वैधता (Pakistan Terror Funding) भी प्रदान कर रही हैं। विश्लेषण में दावा किया गया है कि मुजफ्फराबाद (PoJK) में जैश-ए-मोहम्मद के उस पुराने ट्रेनिंग सेंटर का पुनर्निर्माण किया गया है, जिसे कभी सैन्य कार्रवाई में तबाह कर दिया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि अक्टूबर 2025 में इस केंद्र के उद्घाटन समारोह में पाकिस्तान के संघीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे।
पाकिस्तान में आतंकियों का सामान्यीकरण (Normalization) इस कदर बढ़ गया है कि प्रतिबंधित संगठनों के नेता अब चुनाव लड़ रहे हैं। लश्कर-ए-तैयबा के राजनीतिक मोर्चे 'पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग' (PMML) की गतिविधियों में हाफिज तलहा सईद जैसे लोग खुलेआम शामिल हो रहे हैं। यही नहीं, दिसंबर 2025 में क्वेटा में जैश-ए-मोहम्मद की ओर से सात दिवसीय वैचारिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिस पर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी तरह आंखें मूंद लीं।
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि पाकिस्तान का यह मॉडल अब उसकी सीमाओं से बाहर निकल रहा है। सऊदी अरब, तुर्की और मलेशिया जैसे देशों के साथ पाकिस्तान के बढ़ते रक्षा संबंध इस कट्टरपंथ को वैश्विक स्तर पर निर्यात कर सकते हैं। यूरोपीय संघ के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि इससे अवैध प्रवासन और चरमपंथी वित्त पोषण (Terror Financing) का खतरा बढ़ रहा है। यह सीधे तौर पर FATF जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता को भी चुनौती देता है।
भारतीय रक्षा विशेषज्ञ: "यह रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि पाकिस्तान कभी भी आतंकवाद को खत्म नहीं करेगा। वह इसे अपनी विदेश नीति के एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करता रहेगा।"
यूरोपीय विश्लेषक: "अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अब भी पाकिस्तान की इस 'मैनेजमेंट' रणनीति को बर्दाश्त किया, तो आने वाले समय में यूरोप को कट्टरपंथ की भारी कीमत चुकानी होगी।"
भारत मामला संयुक्त राष्ट्र और जी-20 में उठाने की तैयारी कर रहा
इस खुलासे के बाद FATF की आगामी बैठक में पाकिस्तान की निगरानी फिर से सख्त की जा सकती है। भारत इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और जी-20 जैसे मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है,ताकि पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके।
पाकिस्तान का यह रवैया चीन के लिए भी सिरदर्द बन सकता है। CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) में काम कर रहे चीनी नागरिकों पर होते आतंकी हमले बताते हैं कि जब आप सांप पालते हैं, तो वह किसी को भी डस सकता है। पाकिस्तान का यह मॉडल अंततः उसकी अपनी अर्थव्यवस्था और स्थिरता को भी लील सकता है।
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Updated on:
20 Jan 2026 07:07 pm
Published on:
20 Jan 2026 07:03 pm
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