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Online Game Suicide Case: ऑनलाइन गेम या मौत का जाल? एक खतरनाक चैलेंज जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया था

Online game suicide case: ऑनलाइन गेम्स या चैलेंज पहले भी कई बार लोगों की जान के लिए खतरा बने हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ब्लू व्हेल चैलेज था। यह 2016-2017 में काफी चर्चा में आया था।

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भारत

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Ashib Khan

Feb 05, 2026

ऑनलाइन गेम्स के चैलेंज ले रहे जान (Photo-IANS)

Online game suicide case: गाजियाबाद में टीला मोड़ थाना इलाके में मंगलवार रात ऑनलाइन कोरियन गेम का टास्क पूरा करने के लिए भारत सिटी सोसायटी की नौवीं मंजिल से तीन बहनों ने एक साथ छलांग खुदकुशी कर ली। इसके बाद एक बार फिर ऑनलाइन गेम्स को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब किसी ऑनलाइन गेम के टास्क को पूरा करने में जान गई है, ऐसे मामले पहले भी कई बार आ चुके हैं। इसके अलावा इन गेम्स ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। आइए जानते है वे कौन-कौन से गेम्स है…

ऑनलाइन गेम्स या चैलेंज पहले भी कई बार लोगों की जान के लिए खतरा बने हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ब्लू व्हेल चैलेज था। यह 2016-2017 में काफी चर्चा में आया था।

ब्लू व्हेल

2016-17 में ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल के कारण कई लोगों की जान गई। दरअसल, ब्लू व्हेल एक तरह का ऑनलाइन चैलेंज ट्रेंड था। यह 50 दिन का चैलेंज होता था, जिसमें हिस्सा लेने वाले को अलग-अलग टास्क पूरे करने होते थे। कुछ टास्क बेहद खतरनाक होते थे, जिसमें लोगों की जान तक चली जाती थी। इससे खुद को नुकसान पहुंचाने का टास्क, ना सोने और आत्महत्या तक के टास्क दिए जाते थे। टास्क पूरा करने की कोशिश कई लोग खुद को नुकसान पहुंचा लेते थे।

किकी चैलेंज

2018 में भी ऐसा ही एक ट्रेंड किकी चैलेंज के नाम से बच्चों की बीच लोकप्रिय हुआ। इस टास्क में लोग अपनी कार को धीरे-धीरे चलाते हुए उससे बाहर आते थे और डांस करते थे। इस टास्क या सोशल मीडिया ट्रेंड को पूरा करने में कई लोग घायल हुए।

मोमो चैलेंज

मोमो चैलेंज भी 2018 में ही वायरल हुआ था। इसमें एक यूजर बच्चों को परेशान करता है, जिसका नाम मोमो था। इसमें भी टास्क पूरा करने के लिए कहा जाता है, जिसमें खुद को नुकसान पहुंचाना भी शामिल था। हालांकि, इसकी वजह से किसी को नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन उस वक्त सोशल मीडिया पर पुलिस ने लोगों को ऐसे चैंलेज में हिस्सा ना लेने के लिए कहा था।

ऐसे चलते हैं ये गेम्स?

इस तरह के गेम्स को आप डाउनलोड नहीं कर सकते हैं, बल्कि ये किसी सोशल मीडिया पर पेज, कम्युनिटी या क्लोज गु्रप का हिस्सा हो सकते हैं। लोगों को मैसेज में उनके टास्क दिए जाते हैं, जिन्हें पूरा करना होता है। गेम खेलने वाले को इस हद तक मैनिपुलेट करता है कि वह सिर्फ टास्क पूरा करना ही एक मात्र लक्ष्य नजर आता है।

ऐसे पहचानें मोबाइल पर गेम खेलने की लत

1. मोबाइल पर अत्यधिक समय व्यतीत करना: बच्चा घंटों (कई बार 8-10 घंटे प्रतिदिन) मोबाइल पर गेम खेलता रहता है। वे पुरानी पसंदीदा गतिविधियां छोड़ देते हैं और गेम को प्राथमिकता देते हैं।

2. गेम न खेल पाने पर चिड़चिड़ापन, गुस्सा या उदासी : गेम खेलने की अनुमति नहीं मिलती तो मोबाइल छीना जाता है या बैटरी खत्म हो जाती है तो बच्चा रोने लगता है, गुस्सा करता है। चुप या फिर उदास रहता है। यह लत का प्रमुख संकेत है।

3. पढ़ाई और जिम्मेदारियों में गिरावट : स्कूल के ग्रेड गिर जाते हैं। होमवर्क नहीं होता और कॉन्सन्ट्रेशन में कमी आती है। स्कूल या घरेलू कामों को नजरअंदाज करते हैं।

4. सामाजिक अलगाव और रिश्तों में कमी : बच्चा दोस्तों और परिवार से दूर रहने लगता है। वे ऑनलाइन दोस्तों या गेम के कैरेक्टर्स से जुड़े रहते हैं।

5. शारीरिक और भावनात्मक प्रभाव : नींद की कमी, आंखों में दर्द, सिरदर्द, थकान, कम शारीरिक गतिविधि और वजन बढऩा। वे झूठ बोलने या बातों को छुपाने लगता है।