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नेपाल में ओली की सत्ता भी गई…, Gen Z की मुहिम से सरकार ने विवादास्पद सोशल मीडिया विधेयक वापस लिया

Gen Z का दबदबा: विरोध प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया विधेयक नेपाल सरकार को वापस लेना पड़ा। यह विधेयक पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पेश किया गया था…

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भारत

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Saurabh Mall

Feb 04, 2026

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जनता बनाम सरकार: Gen Z की मुहिम से विवादित विधेयक वापस, ओली की सत्ता भी गई। फोटो में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली (इमेज सोर्स: एक्स वायरल)

Nepal Gen Z Protests: नेपाल में राजनीति का बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जेन-जी (Gen Z) के नेतृत्व में हुए जोरदार विरोध प्रदर्शनों ने न सिर्फ नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बाहर किया, बल्कि अब अंतरिम सरकार को भी विवादास्पद सोशल मीडिया विधेयक वापस लेने पर मजबूर कर दिया। अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगाने वाले इस बिल के खिलाफ शुरू हुआ यूथ आंदोलन धीरे-धीरे भ्रष्टाचार विरोधी लहर में बदल गया और आखिरकार नेपाल सरकार को पीछे हटना पड़ा।

गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्याल ने दी जानकारी

सरकार के प्रवक्ता और गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्याल ने बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया गया है कि संसद में लंबित सोशल मीडिया विधेयक को वापस लिया जाएगा। यह बिल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था, क्योंकि सरकार का मानना था कि 2023 में लागू किए गए ‘सोशल नेटवर्क उपयोग प्रबंधन निर्देश’ अब पर्याप्त नहीं हैं।

बता दें सितंबर 2025 की शुरुआत में ओली सरकार ने कई बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर), रेडिट और लिंक्डइन पर पंजीकरण नहीं कराने के आरोप में प्रतिबंध लगा दिया था।

इस कदम के खिलाफ युवाओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किए, जो धीरे-धीरे सरकार विरोधी और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में बदल गए। इसी बीच ओली सरकार द्वारा पेश किया गया सोशल मीडिया विधेयक संसद के उच्च सदन में अटका रहा, क्योंकि इसमें कई ऐसे नियम थे जिनसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर असर पड़ने की आशंका थी।

आखिर ऐसा क्या था विधेयक में…?

नेपाल पत्रकार महासंघ सहित डिजिटल अधिकार संगठनों ने विधेयक के कई प्रावधानों की कड़ी आलोचना की थी। सबसे विवादास्पद धाराओं में सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर सजा से जुड़ा प्रावधान शामिल था।

विधेयक में लगभग एक दर्जन ऐसे अपराधों की सूची दी गई थी, जिनके तहत उपयोगकर्ताओं पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान था। फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों को सबसे कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता था, जिसमें पांच साल तक की कैद और 15 लाख नेपाली रुपये तक का जुर्माना शामिल था।

विधेयक में यह भी कहा गया था कि कोई भी व्यक्ति नेपाल की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता या राष्ट्रीय हित के खिलाफ झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाने के उद्देश्य से छद्म या अस्थायी पहचान का उपयोग नहीं कर सकता।

इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य करने का प्रस्ताव था। बिना लाइसेंस संचालन करने पर 25 लाख नेपाली रुपये तक का जुर्माना तय किया गया था।

विधेयक में साइबर बुलिंग, स्किमिंग, फिशिंग, पहचान की ठगी, सेक्सटॉर्शन और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले अन्य अपराधों के लिए भी सख्त सजा का प्रावधान किया गया था।