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भारत, Jun 02, 2026

ममता बनर्जी का धरना प्रदर्शन शुरू, पार्टी नेताओं के साथ बी.आर. अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी

Mamata Banerjee Protest: ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं के साथ बी.आर. अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी और फिर अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले के विरोध में आयोजित धरने में शामिल हुईं।

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फोटो में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी (इमेज सोर्स: ANI)

Mamata Banerjee Dharna: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) कई चुनौतियों का सामना कर रही है।

इसी बीच पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं डोला सेन, कल्याण बनर्जी और अन्य के साथ मिलकर, अभिषेक बनर्जी और अन्य पर हुए हमले के विरोध में आयोजित धरने में शामिल होने से पहले, बी.आर. अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की।

चुनावी हार के बाद पहली बार सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी

विधानसभा चुनाव में हार के बाद यह पहला मौका है, जब ममता बनर्जी किसी बड़े सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन में उतरी हैं। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी के कितने विधायक उनके साथ खड़े नजर आते हैं। इसका डेटा अभी सामने नहीं है।

पार्टी के अंदर क्यों हो रही है नाराजगी और मतभेद की चर्चा

दरअसल, रविवार को ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित घर पर पार्टी विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई थी। लेकिन 80 विधायकों वाली पार्टी में से केवल 20 विधायक ही बैठक में पहुंचे, जबकि 60 विधायक नहीं आए। इतनी बड़ी संख्या में विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के अंदर नाराजगी और मतभेद की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

दो विधायकों के निष्कासन ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

इस बीच हाल ही में दो विधायकों के निष्कासन ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। तृणमूल कांग्रेस ने एंटाली से विधायक संदीपान साहा और उलुबेरिया पूर्व से विधायक ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। निष्कासन के बाद दोनों विधायक पार्टी के अन्य असंतुष्ट नेताओं और विधायकों के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

सोमवार देर रात कोलकाता में हुई एक बैठक ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। इस बैठक में निष्कासित विधायकों के अलावा पार्टी के वरिष्ठ विधायक जावेद अहमद खान और सेउली साहा भी मौजूद थे। पार्टी सूत्रों का दावा है कि इनके अलावा कई अन्य तृणमूल विधायक भी निष्कासित नेताओं के संपर्क में हैं।

ऐसे में मंगलवार को ममता बनर्जी के धरना कार्यक्रम में विधायकों की मौजूदगी को पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी, गुटबाजी और एकजुटता की बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

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