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दुश्मन पर निगरानी करने की दिशा में बड़ा कदम, पहली बार देसी कंपनी ने की स्पेस में ‘जासूसी’

गुजरात की निजी कंपनी अजिस्ता स्पेस ने पहली बार अपने सैटेलाइट से अंतरिक्ष में दूसरे सैटेलाइट की तस्वीरें ली। यह तकनीक भविष्य में रक्षा और मिसाइल ट्रैकिंग में मददगार साबित हो सकती है।

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भारत

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Devika Chatraj

Feb 10, 2026

अंतरिक्ष में दुश्मन पर निगरानी

अंतरिक्ष में भारत के निजी क्षेत्र की क्रांति अब केवल रॉकेट लॉन्च करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरिक्ष की गहराइयों में 'दुश्मन' पर नजर रखने के काबिल भी हो गई है। गुजरात स्थित निजी स्पेस कंपनी अजिस्ता स्पेस ने पहली बार ऐसा काम किया है, जो अब तक देश की किसी भी स्पेस कंपनी ने नहीं किया था। कंपनी ने अपने सैटेलाइट की मदद से अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे सैटेलाइट की तस्वीरें ली हैं। इससे भारत की स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (एसएसए) मजबूत होगी। इसे तकनीकी भाषा में इन-ऑर्बिट निगरानी या स्पेस वॉच कहा जाता है।

धरती से 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर

कंपनी ने यह काम अपने 80 किलो वजनी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट एबीए फर्स्ट रनर (एएफआर) से किया। इस सैटेलाइट ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की तस्वीरें लीं, जो धरती से 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा है। कंपनी अब ऐसी फैसिलिटी तैयार कर रही है, जहां से 25 सेंटीमीटर के हाई-रिजॉल्यूशन पेलोड्स बनाए जाएंगे, जो अंतरिक्ष में 'मच्छर' जितनी छोटी चीज भी देख सकेंगे।

स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस क्यों जरूरी?

अंतरिक्ष अब तमाम देशों के लिए एक नया युद्धक्षेत्र बन चुका है। भारत के पास वर्तमान में संचार, नेविगेशन और रक्षा के लिए 50,000 करोड़ से अधिक के 50 से अधिक सक्रिय उपग्रह हैं। यह तकनीक बताती है अंतरिक्ष में दूसरे देशों के उपग्रह क्या कर रहे हैं और क्या वे हमारे एसेट्स के करीब आकर उन्हें 'जैम' या रहे वाली नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर हैं। यही तकनीक भविष्य में आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करने में देश की मदद कर सकती है। इससे भारत को दबदबा रखने में फायदा होगा।

दो बार स्पेस स्टेशन को ट्रैक किया

कंपनी के सैटेलाइट को जून 2023 में स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा गया था। एएफआर ने सूरज की तेज रोशनी के बावजूद स्पेस स्टेशन को दो बार ट्रैक किया। 15 अलग-अलग तस्वीरें लीं। इनमें 2.2 मीटर तक की स्पष्टता मिली।