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गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर मची अफरा-तफरी के बीच सरकार का आया बयान, जानें क्या कहा

Israel Iran US war energy impact: संसद में पेट्रोलियम मंत्री ने आगे कहा कि इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।

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भारत

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Ashib Khan

Mar 13, 2026

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हरदीप सिंह पुरी ने लोक सभा में LPG को लेकर दिया बयान (Photo-IANS)

Hardeep Singh Puri statement in Lok Sabha: देश में कई जगहों पर एलपीजी को लेकर मची अफरा-तफरी के बीच मोदी सरकार का बयान सामने आया है। लोक सभा में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत अब खाड़ी देशों के अलावा अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले भारत अपनी लगभग 60% एलपीजी जरूरतें कतर, यूएई, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आयात करता था, जबकि करीब 40% उत्पादन देश में ही होता था। लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए आयात स्रोतों को सक्रिय रूप से विविध किया गया है ताकि आपूर्ति बाधित न हो।

जंग के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा असर

संसद में पेट्रोलियम मंत्री ने आगे कहा कि इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। इस जंग के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला मार्ग प्रभावित हुआ है।

कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित- पुरी

इस दौरान मोदी सरकार में मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि संकट से पहले भारत के लगभग 45% कच्चे तेल का आयात होर्मुज मार्ग से होता था, लेकिन अब वैकल्पिक स्रोतों से इतनी मात्रा सुनिश्चित कर ली गई है जो उस मार्ग से मिलने वाली आपूर्ति से भी अधिक है। वर्तमान में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में गैर-होर्मुज स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 70% हो गई है, जो पहले 55% थी।

‘40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा भारत’

उन्होंने बताया कि भारत अब 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जबकि 2006-07 में यह संख्या 27 थी। इससे आपूर्ति में लचीलापन बढ़ा है और देश की रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं, कुछ तो 100% से भी अधिक क्षमता पर चल रही हैं। मंत्री ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एटीएफ या फ्यूल ऑयल की कोई कमी नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को भी प्राथमिकता के आधार पर प्रबंधित किया है। घरेलू पाइप्ड गैस और वाहनों के लिए सीएनजी की आपूर्ति पूरी तरह बरकरार रखी गई है। वहीं उद्योगों को उनकी औसत खपत का लगभग 80% और उर्वरक संयंत्रों को 70% गैस दी जा रही है ताकि खेती से जुड़ी जरूरतें प्रभावित न हों।