
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फोटो- ANI)
हरियाणा के पंचकूला से एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है। एक रेवेन्यू अधिकारी के करीबी ने 17 एकड़ जमीन 1 करोड़ रुपये में खरीदी। जिसे तीन हफ्ते बाद 5.8 करोड़ रुपये में बेचकर 4.8 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जमीन पर्ल्स ग्रुप की है। दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पर्ल्स ग्रुप से जुड़ी प्रॉपर्टीज पर स्टे लगाया है। इसके बावजूद पर्ल्स ग्रुप की जमीन की खरीद-बिक्री हुई।
पंचकूला में हुई इस डील के बाद हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने रायपुर रानी तहसील के तहसीलदार विक्रम सिंगला को अरेस्ट कर लिया है।
एसीबी ने पंचकूला कोर्ट को बताया कि सिंगला के साथ-साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू ऑफिसर जोगिंदर शर्मा और भिवानी जिले के रहने वाले नवीन ने इस जमीन से करोड़ों का मुनाफा कमाया है।
48 साल के सिंगला को 31 जनवरी को अरेस्ट किया गया था। वह अभी पांच दिन की पुलिस रिमांड के बाद ज्यूडिशियल कस्टडी में है। अब ब्यूरो का कहना है कि वह शर्मा और उनके साथी नवीन से पूछताछ करेगा. इस सिलसिले में उनके ठिकानों की तलाशी भी ली गई है।
उधर, गिरफ्तारी से बचने के लिए शर्मा ने पंचकूला कोर्ट में एंटीसिपेटरी बेल अर्जी दी है, जिस पर 11 फरवरी को सुनवाई होगी। उनके वकील दीपांशु बंसल ने कहा कि कोर्ट ने बेल अर्जी पर एसीबी से जवाब मांगा है।
बंसल सिंगला का भी केस लड़ रहे हैं, उन्होंने उनकी गिरफ्तारी को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन बताया है। साथ ही यह भी कहा कि रेवेन्यू अधिकारी के खिलाफ रिश्वत मांगने या लेने का कोई आरोप नहीं है।
बंसल ने यह भी कहा कि जिस जमीन की बात हो रही है, वह पंचकूला जिले में रायपुर रानी तहसील के अंदर आती है और वह पर्ल्स ग्रुप की उन प्रॉपर्टीज का हिस्सा थी जिन्हें जांच एजेंसियों ने कई साल पहले अटैच किया था।
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने 2016 में और फिर 2019 में राज्य के रेवेन्यू अधिकारियों को इन अटैचमेंट के बारे में बताया था। ACB के मुताबिक, सिंगला ने पर्ल्स ग्रुप की प्रॉपर्टीज की कम से कम पांच रजिस्ट्री कीं।
एक मामले में, बलदेव कौर नाम की एक महिला ने अपनी 17 एकड़ जमीन को अटैचमेंट से रिलीज करने के लिए अप्लाई किया और कुछ ही दिनों में जमीन क्लियर हो गई।
16 अक्टूबर, 2025 को, जमीन लगभग 1 करोड़ रुपये में नवीन के नाम पर रजिस्टर हो गई। सिर्फ 21 दिन बाद, 6 नवंबर, 2025 को नवीन ने इसे चार खरीदारों को 5.8 करोड़ रुपये में बेच दिया।
ब्यूरो का कहना है कि सिंगला को पूरी जानकारी थी कि अटैच की गई जमीन को न तो बेचा जा सकता है और न ही ट्रांसफर किया जा सकता है। आरोप है कि जमीन मालिकों के साथ मिलीभगत करके सिंगला ने 17 एकड़ जमीन नवीन के नाम पर रजिस्टर कर दी।
इसके 13 दिनों के अंदर पटवारी के ज़रिए उसे रिलीज करवा लिया। अधिकारियों का दावा है कि इसके बाद सिंगला ने नियमों को तोड़कर रजिस्ट्रेशन, इनहेरिटेंस म्यूटेशन और सेल डीड करवाई, जिससे उनके साथियों को गलत फायदा हुआ और पर्ल ग्रुप के इन्वेस्टर्स को नुकसान हो सकता है। उन्हें इस डील के सिलसिले में बड़े पैमाने पर फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन होने का भी शक है।
वकील बंसल ने कोर्ट में एसीबी के दावों का जवाब दिया। उन्होंने कहा- रिकॉर्ड से यह साबित नहीं होता कि संबंधित जमीन पर्ल्स ग्रुप का हिस्सा थी। प्रॉसिक्यूशन जोर दे रहा है कि सुप्रीम कोर्ट का स्टे था, लेकिन अभी रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इसे साबित करे।
वकील ने आगे कहा- यहां कोई केस नहीं है। जांच एजेंसी अपनी मर्जी से काम कर रही है। विक्रम सिंगला की गिरफ्तारी कानूनी तौर पर सही नहीं है।
कार्रवाई करने से पहले उन्हें BNSS के सेक्शन 35 के तहत कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। बता दें कि पर्ल्स ग्रुप अभी 45,000 करोड़ रुपये के पोंजी स्कैम में जांच के दायरे में है।
Published on:
10 Feb 2026 06:44 pm
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