
Gen-Z की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: AI जनरेटेड)
Gen-Z Latest Report: दुनिया भर में जेन-जेड (1997 के बाद जन्मी पीढ़ी) उपभोग के मामले में पूरी तरह बदलाव ला रही है। जहां पुरानी पीढ़ियां 'खर्च करो और जियो' के सिद्धांत पर चलती थीं, वहीं जेन-जेड सोच-समझकर, वैल्यू-ड्रिवन और जरूरत-आधारित खर्च पर फोकस कर रही है।
हाल ही द फेडरल और मैकिन्से की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पीढ़ी आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और जॉब मार्केट की अस्थिरता से प्रभावित होकर स्मार्ट कंज्यूमर बन गई है। महंगाई, अनिश्चित नौकरियां और जीवन-यापन की बढ़ती लागत ने उन्हें सतर्क बना दिया है। वे छोटी मात्रा में खरीदते हैं, बजट बनाते हैं और बचत को प्राथमिकता देते हैं। कई जेन-जेड फाइनेंशियल सिक्योरिटी को सबसे ऊपर रखते हैं, ट्रेडिशनल माइलस्टोन्स (शादी, बच्चे) से ज्यादा करियर और वेल्थ पर फोकस करते हैं।
जेन-जेड में 'स्प्लर्ज' (बिना सोचे बड़े खर्च) की प्रवृत्ति घटी है। वे ब्रांड, ट्रेंड या सोशल मीडिया प्रभाव से ज्यादा कीमत, गुणवत्ता और उपयोगिता देखते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि वे डिस्काउंट, प्राइवेट लेबल, सेकंड-हैंड और किफायती विकल्प चुन रहे हैं। भारत में 85 प्रतिशत जेन-ज़ेड वाले कैटेगरी में स्प्लर्ज करने को तैयार हैं, लेकिन सिर्फ उनमें जहां वैल्यू मिले जैसे एपैरल (34%) और ब्यूटी (29%)। वे 'वैल्यू-फॉर-मनी' चाहते हैं, न कि सिर्फ सस्ता। मिनिमलिस्ट लिविंग मजबूत हो रहा है। यानी कम चीजें, ज्यादा सुकून। वे अनुभवों (यात्रा, स्किल लर्निंग) को सामान से ज्यादा महत्व देते हैं। सेकंड-हैंड, री-कॉमर्स और सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है, क्योंकि वे पर्यावरण और लॉन्ग-टर्म यूज को ध्यान में रखते हैं।
डिजिटल-फर्स्ट होने के बावजूद, वे रिसर्च, रिव्यू और प्राइस ट्रैकिंग से निर्णय लेते हैं। 'इंस्टेंट बाय' की जगह 'रिसर्च-एंड-बाय' कल्चर बढ़ा है। भारत में शहरी जेन-जेड बजट-बेस्ड खर्च, सेकंड-हैंड मार्केट और किराए की सेवाओं की ओर झुक रही है। यह बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। कंपनियां वैल्यू-ड्रिवन, सस्टेनेबल और बजट-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स ला रही हैं। जेन-जेड का यह ट्रेंड स्मार्ट, जिम्मेदार और फ्यूचर-ओरिएंटेड उपभोग की दिशा दिखाता है।
Updated on:
15 Feb 2026 03:05 am
Published on:
15 Feb 2026 03:04 am
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