
Electric Kitchen Policy
Israel-Iran War: ईरान में चल रहा युद्ध वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर चुका है और इससे तेल तथा गैस संकट की आशंका बढ़ गई है। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित तेल और गैस पर निर्भर है, इसलिए किसी भी तरह की वैश्विक आपूर्ति बाधित होने पर इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई तक पहुंच सकता है।
इसी आशंका के बीच देश के कई हिस्सों में लोगों ने एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इंडक्शन स्टोव खरीदना शुरू कर दिया है, ताकि अगर किसी कारण से गैस सिलेंडर उपलब्ध न हो तो भी घर की रसोई चलती रहे। फिलहाल यह एक अस्थायी समाधान के रूप में सामने आया है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से देखा जाए तो यह एक महत्वपूर्ण नीति विकल्प भी बन सकता है।
इसे लेकर महिलाओं की आर्थिक उन्नति के लिए काम कर रहे संगठन वुमेनेटर (Womennovator) की फाउंडर सीए तृप्ति सिंघल सोमानी ने अपना एक विजन डॉक्यूमेंट पेश किया है। वे कहती हैं कि यदि सरकार व्यवस्थित तरीके से इलेक्ट्रिक इंडक्शन कुकिंग को प्रोत्साहित करे, तो इससे न केवल घरेलू गैस पर निर्भरता कम की जा सकती है, बल्कि भविष्य में इस तरह के ऊर्जा संकट के समय लोगों को कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, यह पहल देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत कर सकती है।
हालांकि, इस दिशा में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आम लोग बिजली के बढ़ते बिल से डरते हैं। अधिकांश परिवार यह मानते हैं कि अगर वे गैस की जगह बिजली से खाना बनाना शुरू कर देंगे, तो उनकी मासिक बिजली लागत काफी बढ़ जाएगी। इसलिए सरकार को ऐसी नीति बनानी होगी जिससे इलेक्ट्रिक कुकिंग लोगों की जेब पर भारी न पड़े।
सरकार मौजूदा बिजली अवसंरचना का बेहतर उपयोग करके और लक्षित सब्सिडी प्रदान करके आयातित गैस पर निर्भरता कम कर सकती है और घरों को तत्काल राहत दे सकती है। इसी उद्देश्य से “कुकिंग क्रेडिट” प्रणाली लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देने के लिए बिजली बिल से जुड़ी आशंकाओं को दूर करना बेहद जरूरी है। इसके लिए निम्न कदम उठाए जा सकते हैं:
• मुफ्त यूनिट्स का विस्तार:
जो परिवार अपने किचन को पूरी तरह इंडक्शन आधारित बनाने के लिए पंजीकरण कराते हैं, उनके लिए मुफ्त बिजली की मौजूदा सीमा 200 यूनिट से बढ़ाकर 400 यूनिट की जा सकती है। इससे उन्हें बिना अतिरिक्त आर्थिक दबाव के इलेक्ट्रिक कुकिंग अपनाने का अवसर मिलेगा।
• स्तरीय मूल्य निर्धारण (टियरड प्राइसिंग):
मुफ्त सीमा से अधिक खपत होने वाली यूनिट्स पर एक विशेष “ग्रीन कुकिंग रेट” यानी रियायती बिजली टैरिफ लागू किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि इंडक्शन पर खाना बनाना गैस सिलेंडर भरवाने की तुलना में सस्ता या कम से कम बराबर लागत वाला विकल्प बना रहे।
इंडक्शन कुकिंग अपनाने में दूसरी बड़ी बाधा शुरुआती लागत है। इंडक्शन स्टोव और उससे जुड़े विशेष बर्तनों की कीमत कई कम आय वाले परिवारों के लिए एक बार में वहन करना कठिन हो सकता है। ऐसे में सरकार को उपकरणों पर सब्सिडी देकर इस बाधा को कम करना होगा।
• डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT):
ISI-मार्क वाले इंडक्शन स्टोव और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की खरीद पर 50% से 75% तक की एकमुश्त सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा सकती है। इससे उपकरण खरीदने का आर्थिक बोझ काफी कम हो जाएगा।
• स्टार्टर किट प्रोग्राम:
सरकार एक विशेष “इलेक्ट्रिक ट्रांजिशन किट” शुरू कर सकती है, जिसमें 1 इंडक्शन प्लेट और 2 कंपैटिबल बर्तन शामिल हों। इस किट को सब्सिडी दरों पर मौजूदा फेयर प्राइस शॉप्स, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) या सरकारी आउटलेट्स के माध्यम से वितरित किया जा सकता है। इससे ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवारों तक भी यह सुविधा आसानी से पहुंच सकेगी।
इलेक्ट्रिक कुकिंग को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए केवल आर्थिक प्रोत्साहन ही पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए बिजली वितरण व्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत करना जरूरी होगा।
• ग्रिड सुदृढ़ीकरण:
स्थानीय डिस्कॉम (वितरण कंपनियों) को निर्देश दिया जा सकता है कि वे अधिक आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर और वितरण नेटवर्क के अपग्रेड को प्राथमिकता दें। विशेष रूप से खाना पकाने के पीक समय — सुबह 8:00 से 10:00 बजे और शाम 7:00 से 9:00 बजे — के दौरान बिजली की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए इन घंटों में अतिरिक्त लोड संभालने की क्षमता विकसित करना जरूरी होगा।
• थोक खरीद:
सरकार बड़े पैमाने पर टेंडर जारी करके निर्माताओं से इंडक्शन स्टोव और संबंधित उपकरणों की थोक खरीद कर सकती है। इससे प्रति यूनिट लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी और इन उपकरणों को आम लोगों तक सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, ऊर्जा संकट के इस दौर में इलेक्ट्रिक किचनकेवल एक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। यदि सरकार योजनाबद्ध तरीके से इंडक्शन कुकिंग को बढ़ावा देती है, तो इससे देश की गैस पर निर्भरता कम होगी, आम परिवारों के लिए रसोई का खर्च नियंत्रित रहेगा और भविष्य में किसी भी वैश्विक ऊर्जा संकट का प्रभाव भी कम किया जा सकेगा। इस तरह “इलेक्ट्रिक किचन परिवर्तन पहल” न केवल वर्तमान संकट का समाधान है, बल्कि भारत को अधिक आत्मनिर्भर और सुरक्षित ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
Updated on:
14 Mar 2026 01:36 pm
Published on:
14 Mar 2026 01:11 pm
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