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केरल-पुड्डुचेरी में कांग्रेस मजबूत, तमिलनाडु में स्टालिन का साथ, क्या है अन्य राज्यों में कांग्रेस का हाल

चुनाव आयोग ने 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। आइए जानते हैं चुनावी रण में कांग्रेस किन राज्यों में मजबूत है।

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भारत

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Vinay Shakya

Mar 15, 2026

Congress National President Mallikarjun Kharge and Rahul Gandhi

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी(File Photo- Patrika)

Assembly Elections: चुनाव आयोग ने 5 राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इन 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव का रण 9 अप्रैल से शुरू होगा और 4 मई को रिजल्ट आने के बाद खत्म होगा। 9 अप्रैल से शुरू हो रहे इस चुनावी में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की स्थिति के बारे में समझते हैं।

केरल-पुडुचेरी में कांग्रेस की स्थिति मजबूत

केरल और पुड्डुचेरी में कांग्रेस मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। केरल की 140 विधानसभा सीटों में होने वाले चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 23 मार्च है। इसके हिसाब से कांग्रेस को जल्द ही अपने उम्मीदवार घोषित करने होंगे। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति ने केरल की 31 सीटों पर उम्मीदवार तय कर लिए हैं। कांग्रेस पिछली बार जीती हुई 22 सीटों में से 20 पर अपने विधायकों को दुबारा मौका देने जा रही है। इसके अलावा राज्य की 140 सीटों में UDF के तहत करीब 95 सीटों पर कांग्रेस और 45 पर उसके सहयोगी दल चुनाव लड़ते हैं।

केरल में बीते 10 सालों से CPM की सरकार है। एंटी इंकम्बेंसी और हाल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार प्रदर्शन के कारण कांग्रेस की अगुवाई में UDF काफी उत्साहित है। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में है। तमिलनाडु में दोनों दलों में सीट बंटवारे को लेकर सहमति बन चुकी है। हालांकि, पुडुचेरी में अब तक पेंच फंसा हुआ है। केरल में NDA की सरकार में नटेशन रंगास्वामी CM हैं। केरल की 30 सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास अपना CM बनाने का मौका है, लेकिन इसके लिए मुकाबला आसान नहीं होगा।

तमिलनाडु में स्टालिन का साथ तो पश्चिम बंगाल में हासिए पर कांग्रेस

तमिलनाडु में कांग्रेस पूरी तरह DMK के भरोसे है। एम. के. स्टालिन सरकार के सामने एंटी इंकम्बेंसी की चुनौती है। हालांकि, सत्ता विरोधी वोट NDA और TVK में बंटा तो DMK गठबंधन की बंपर जीत हो सकती है। इस गठबंधन में कांग्रेस को 28 सीटें मिली हैं, जो पिछली बार से 3 अधिक हैं। इस तरह तमिलनाडु में कांग्रेस की स्थिति एक सहायक दल की है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी।

पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव की बात करें तो वहां बीजेपी बनाम TMC की लड़ाई है। ऐसे में वहां कांग्रेस के पास कुछ खास नहीं बचा है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। अब कांग्रेस ने वहां एकला चलो की राह अपनाई है और सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस का फोकस मालदा–मुर्शिदाबाद के इलाके की मुस्लिम बहुल इलाके की सीटों पर है। यह क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था। बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस वामदलों के साथ चुनाव लड़ी, लेकिन खाता नहीं खुल पाया। हालांकि, कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में मालदा दक्षिण सीट पर जीत दर्ज की। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी।

असम में 10 साल से सत्ता से दूर है कांग्रेस

असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 10 सालों से सत्ता से बाहर है। राज्य के मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस के सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं है। इसीलिए पार्टी अहोम समुदाय को साधने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की विरासत और उनके बेटे गौरव गोगोई के चेहरे पर दांव लगा रही है। जोरहाट से सांसद गौरव गोगोई को कांग्रेस ने पिछली साल असम प्रदेश की कमान सौंपी थी।

असम में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि BTR यानी बोडोलैंड टेरीटोरियल रीजन की 15 सीटों पर उसके पास कोई स्थानीय सहयोगी नहीं है। इसके अलावा गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन के तौर तरीकों से असम कांग्रेस के बाकी वरिष्ठ नेता असहज हैं। असम में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने चुनाव से ठीक पहले बीजेपी का दामन थाम लिया है। कांग्रेस ने असम में प्रियंका गांधी को टिकट बांटने की जिम्मेदारी दी है और डीके शिवकुमार, भूपेश बघेल जैसे नेताओं को पर्यवेक्षक बनाया है।