
अजित पवार का 29 जनवरी को बारामती में अंतिम संस्कार किया गया। (Photo: IANS)
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की 28 जनवरी को विमान हादसे में मौत के बाद राज्य सरकार के एक पुराने फैसले की भी चर्चा हो रही है। यह फैसला अभी के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस की सरकार ने ही लिया था।
देवेन्द्र फड़णवीस जब 2018 में पहली बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे तो कई बार उनका हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होते-होते बचा। एक बार जब वह अजित पवार के साथ जा रहे थे, तब भी उनका हेलिकॉप्टर हिलने लगा था। पवार काफी डर गए थे।
फड़णवीस ने तब यही कह कर उनका हौसला बढ़ाया था कि कुछ नहीं होगा, मेरे साथ ऐसा कई बार हो चुका है। वैसे, बार-बार ऐसा होने के बाद तब फड़णवीस सरकार ने फैसला लिया था कि सभी 308 तालुका में एक-एक स्थायी हेलीपैड बनाया जाएगा। लेकिन, करीब आठ साल बाद भी इस दिशा में कुछ नहीं हो पाया है।
ज्यादातर जिलों में हेलीपैड के लिए जमीन तय किए जाने का काम भी नहीं हो पाया है। अगर फड़णवीस सरकार के फैसले के मुताबिक स्थायी हेलीपैड बना होता तो संभव है अजित पवार हेलिकॉप्टर में उड़ान भरते और सुरक्षित लैंडिंग करते।
बता दें कि अजित पवार चार्टर्ड विमान बोंबर्डियर लीयरजेट 45 में चार लोगों के साथ मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए थे। बारामती की हवाई पट्टी पर विमान उतारने की एडवांस्ड व्यवस्था नहीं है।
दिखाई कम दे रहा हो तो पायलट की सहायता के लिए तकनीक या सुविधा का यहां अभाव है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे की वजह लो विजिविलिटी बताई जा रही है।
बारामती एयरपोर्ट का इस्तेमाल मुख्य रूप से पायलट प्रशिक्षण और निजी छोटे विमानों के उड़ने-उतरने के काम आता है। यहां एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर भी उपलब्ध नहीं है। यहां एयर ट्रैफिक से जुड़ी जानकारी के लिए स्थानीय पायलट ट्रेनिंग स्कूलों के इंस्ट्रक्टर्स या पायलट्स से लिया जाता है।
महाराष्ट्र में इस समय 28 एयरपोर्ट/एयर स्ट्रिप हैं और चार बनने वाले हैं। इनमें से बारामती हवाई पट्टी भी एक है। बता दें कि हवाई पट्टी पर एटीसी टावर नहीं होते। यहां यहां विमानों की उड़ान या लैंडिंग में पायलट का अनुभव पर ही सारा दारोमदार रहता है। हवाई पट्टी पर विमानों की आवजाही के लिए पायलट को विजुअल फ्लाइट रूल्स (वीएफआर) का पालन करते हैं। जानकार बताते हैं कि वीएफ़आर के तहत पांच किलोमीटर से कम विजिविलिटी होने पर विमान उतारने की मनाही होती है।
बारामती हवाई पट्टी को पिछले साल जुलाई में महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (एमएडीसी) को दिया गया था। पहले यह महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) के पास था। अजित पवार यहां सुविधाएं बढ़वाने के लिए कोशिश कर रहे थे। लेकिन, अभी कुछ ठोस हो नहीं पाया था।
देश में हवाई इन्फ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो 2025 में देश में हवाई अड्डों की कुल संख्या 163 थी। दस साल पहले इनकी संख्या 74 थी। अंग्रेजी अखबार ‘मिंट’ ने 2017 से 2025 के बीच नए बने, अपग्रेड किए गए या हवाई मानचित्र पर लाए गए हवाई अड्डों पर उड़ानों का विश्लेषण किया है। पाया गया कि कम से कम 48 हवाईअड्डे ऐसे हैं, जहां रोज आने-जाने वाले विमानों की संख्या पांच से भी कम (जनवरी-नवंबर 2025 के दौरान) रही। केवल 15 हवाई अड्डे ऐसे रहे, जहां दस से ज्यादा विमानों का आना-जाना रहा।
सरकार की उड़ान स्कीम के तहत 900 करोड़ रुपये खर्च कर 15 हवाईअड्डे बनाए गए, जहां विमानों का उतरना-उड़ना नहीं हो पा रहा है। कम से कम 47 एयरर्पोर्ट्स ऐसे रहे जहां जनवरी से नवंबर, 2025 के बीच यात्रियों की संख्या एक लाख पार नहीं कर सकी। तीन पर तो एक भी यात्री नहीं आए-गए, 4 पर यात्रियों की संख्या 100 के नीचे और पांच पर 5000 से कम रही। राजकोट, प्रयागराज, इलाहाबाद जैसे हवाईअड्डों पर यात्रियों की संख्या जरूर 11 महीनों में दस लाख के करीब रही। लेकिन, औसतन कहा जाए तो एक एयरपोर्ट पर महीने में 24,000 यात्रियों का आना-जाना रहा और रोज सात विमानों का उड़ना-उतरना हुआ।
उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) स्कीम 2016 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य आम लोगों को भी हवाई सफर की सुविधा उप्लब्ध कराना था। कहा गया कि हवाई चप्पल वाला भी हवाई सफर करेगा। लेकिन, अब सच यह है कि उड़ान के तहत चलाए गए कम से कम 15 हवाईअड्डों और 123 रूट को बंद किया जा चुका है। इन पर 900 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सरकार का कहना है कि इन्हें हमेशा के लिए बंद नहीं किया गया है। सरकार और हवाई अड्डे बनाने में जुटी हुई है। वह 2047 तक देश में हवाई अड्डों की संख्या 350-400 तक ले जाना चाहती है। 50 तो अगले पांच साल में ही बनाना चाहती है।
Updated on:
29 Jan 2026 03:33 pm
Published on:
29 Jan 2026 02:37 pm

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