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कोलकाता, Jun 04, 2026

TMC के अंदर का विद्रोह पनपने की मुख्य वजह हैं अभिषेक बनर्जी? क्या ममता की पार्टी टूट जाएगी?

West Bengal politics: पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम व टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पार्टी की आतंरिक कलह से जूझ रही है। विद्रोही गुट ने अभिषेक बनर्जी को अपना नेता मानने से साफ इनकार कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर...

Mamata Banerjee

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी

Trinamool Congress Rebellion: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में टीएमसी के 15 साल के शासन का अंत हो गया है। बीजेपी (BJP) ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को राज्य की सत्ता से बेदखल कर दिया है। 4 मई को नतीजे सामने आने के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस में माहौल बदल गया था। अब यह खुलकर सामने भी आने लगा है। पार्टी के कई विधायकों ने कहा कि वह ममता के नेतृत्व को स्वीकार करते हैं, लेकिन उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को नहीं।

जहांगीर पर कार्रवाई न होने से पार्टी के नेता नाराज

उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी के करीबी और फाल्टा से पार्टी के उम्मीदवार जहांगीर खान के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं होने पर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा है। तृणमूल के एक सीनियर नेता ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि हार के बाद भी अभिषेक बनर्जी का रवैया बेहद घमंडी था। जहांगीर खान के मामले में पूछने पर उन्होंने सिर्फ इतना कहा- ‘पार्टी का ट्वीट देख लो। वहीं, जब ममता बनर्जी ने सीएम पद से इस्तीफा देने से मना कर दिया तो विद्रोह की नींव पड़ गई।

रितब्रत की सीएम शुभेन्दु से मुलाकात

उन्होंने कहा कि विद्रोह के केंद्र में रितब्रत बनर्जी हैं। जिन्हें पश्चिम बंगाल के विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, रितब्रत बनर्जी पिछले हफ्ते दिल्ली गए थे। वहां उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। वापसी के बाद उन्होंने कोलकाता के MLAs हॉस्टल और एक निजी होटल में कई बैठकें कीं। विधायकों को फोन कर नेतृत्व के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। टीएमसी के एक बागी विधायक ने कहा कि हमारा मुख्य निशाना अभिषेक बनर्जी हैं। हम उनके नेतृत्व को अब स्वीकार नहीं कर सकते हैं।

सोभनदेब चट्टोपाध्याय को पार्टी ने किया नया LoP नियुक्त

1 जून को तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर सोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, नयना बंद्योपाध्याय और अशिमा पात्रा को उप-नेता व फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त किया है, लेकिन सीएम शुभेन्दु अधिकारी ने दावा किया कि रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के हस्ताक्षर जाली थे। जाली हस्ताक्षर के मामले में जब CID की टीम ने जांच किया तो इस दौरान कई अन्य तृणमूल विधायकों ने भी कबूला कि उन्होंने पत्र पर दस्तखत नहीं किए थे। पार्टी के विद्रोही गुट ने कहा कि अभिषेक बनर्जी और राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC की रणनीति से पार्टी की बदनामी हुई है।

हमारे पास विद्रोह के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा

दक्षिण 24 परगना के कुलपी से TMC विधायक बरनाली धारा ने कहा कि हम जानबूझ कर विद्रोह नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमारे पास इसके अलावे कोई विकल्प नहीं है। धारा ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि मैं लोगों का काम करने के लिए विधायक बनी हूं। हमारे कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा की खबरें सामने आ रही है। बीते बुधवार को सीएम शुभेन्दु अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत में जल्द से जल्द स्थिति सामान्य करने का आश्वासन दिया गया है।

रितब्रत और संदीपन को पार्टी ने दिखाया बाहर का रास्ता

इधर, सोमवार को पार्टी ने रितब्रत और संदीपन को बाहर का रास्ता दिखा दिखा दिया है। दोनों को पार्टी से निलंबित करते हुए स्पीकर को चिट्ठी भेजी गई है। ममता बनर्जी ने भी सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को तोड़ने के लिए दिल्ली में एक साजिश रची गई। कोई ऐसा व्यक्ति जो पहले CPM (ऋतब्रत बंदोपाध्याय) के साथ था। वह यह सब कर रहा है। हमने दूसरों को नजरअंदाज करके उसे टिकट दिया था। जिन लोगों को टिकट नहीं मिला, मैं उनसे माफी मांगती हूं। हमारे कार्यकर्ताओं के साथ ज्यादती की गई। कार्यालय में तोड़फोड़ किया गया।

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