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पशुओं का इलाज छोड़ बीमा में उलझे पशु चिकित्सक, लक्ष्य भारी और सुविधाएं नाकाफी

पशुओं का इलाज करने वाले डॉक्टर बीमा करते घूम रहे घर-घर, जिले में पिछले साल के दो हजार से अधिक बीमा आज भी अधूरे, डॉक्टरों की मेहनत पर ठेकेदार एजेंसी के सर्वेयर ने फेरा पानी

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नागौर. राज्य सरकार की मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना इन दिनों पशु चिकित्सकों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। हालात यह हैं कि जिन डॉक्टरों का मूल दायित्व बीमार पशुओं का इलाज करना है, वे गांव-गांव घूमकर पशुओं का बीमा करने में जुटे हुए हैं। इससे न केवल पशु चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि खुद पशु चिकित्सक भी मानसिक और प्रशासनिक दबाव में आ गए हैं।

गौरतलब है कि गत वर्ष सरकार ने मंगला पशु बीमा योजना का काम पशुपालन विभाग के राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग (एसआईपीएफ) को दिया गया, जिसमें पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सकों की ओर से हैल्थ सर्टिफिकेट जारी करने के बावजूद एसआईपीएफ की ओर से लगाए गए निजी सर्वेयर ने फोटो अपडेट नहीं किए, जिसके कारण आज भी पिछले साल के 2 हजार ज्यादा बीमा अधूरे हैं। डॉक्टरों का आरोप है कि उन्होंने समय पर बीमा प्रक्रिया पूरी की, लेकिन निजी सर्वेयर ने फोटो अपलोड नहीं किए, इसके कारण पशु चिकित्सकों की मेहनत पर पानी फिर गया। तकनीकी और एजेंसी स्तर की खामियों के कारण भुगतान और पॉलिसी दोनों लटकी हुई हैं। जिले में वर्ष 2024-25 के दौरान पशु बीमा योजना के तहत 12,296 परिवारों की पॉलिसियां जारी की गईं, जबकि 2,087 परिवारों के बीमा आज भी अधूरे बताए जा रहे हैं।

इस साल 21 फीसदी लक्ष्य पूरा

इस वर्ष जिले में मंगला पशु बीमा योजना के तहत कुल 49,575 पशुओं का बीमा किया जाना है। इसके मुकाबले अब तक केवल 21 फीसदी पशुओं का ही बीमा हो पाया है। हालांकि अंतिम तिथि 31 मार्च है, लेकिन पोर्टल में आ रही तकनीकी परेशानी व इंटरनेट की समस्या ने पशु चिकित्सकों की टेंशन बढ़ा दी है। लक्ष्य बड़ा होने से पशु चिकित्सकों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।

नई ग्राम पंचायतों के सूची ऑनलाइन अपडेट नहीं

बीमा कार्य में आ रही व्यावहारिक परेशानियां भी कम नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन प्रक्रिया होने के कारण नेटवर्क कनेक्टिविटी बड़ी बाधा बन रही है। कई गांवों में इंटरनेट की स्थिति बेहद खराब है, जिससे फोटो अपलोड और ऑनलाइन एंट्री में परेशानी आ रही है। इसके अलावा नई ग्राम पंचायतों की सूची अब तक ऑनलाइन अपडेट नहीं हुई है, जिसके चलते कई गांव पोर्टल पर दिखाई ही नहीं दे रहे। ऐसी स्थिति में डॉक्टर चाहकर भी बीमा प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। मैदानी स्तर पर हालात और भी जटिल हैं। पशु चिकित्सकों का कहना है कि जब वे बीमा के लिए घर-घर जाते हैं, तो कई बार पशु ही उपलब्ध नहीं होते। ग्रामीणों का जवाब होता है- ‘गाय खोल दी, अभी-अभी खोली है।’ ऐसे में डॉक्टरों को बार-बार उसी गांव में चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और संसाधन दोनों की बर्बादी होती है।

पशु चिकित्सकों का भुगतान अटका

सबसे बड़ा सवाल भुगतान को लेकर है। सरकार की ओर से एक पशु बीमा पर डॉक्टरों को 75 रुपए देने का प्रावधान किया गया, लेकिन पिछले साल किए गए बीमा कार्य का पूरा भुगतान आज तक नहीं हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि बिना भुगतान के लगातार नया लक्ष्य देना अन्यायपूर्ण है। इससे उनका मनोबल टूट रहा है और वे अपने मूल कार्य पशुओं के इलाज से दूर होते जा रहे हैं।

समाधान कर रहे हैं

उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार पशुओं का बीमा किया जा रहा है। फिल्ड में काम करने वाले पशु चिकित्सकों को आने वाली परेशानी का मुख्यालय स्तर पर समाधान किया जा रहा है। निर्धारित तिथि तक लक्ष्य पूरा कर लेंगे। गत वर्ष के अधूरे बीमा को लेकर एसआईपीएफ विभाग को पत्र लिखा है।

- डॉ. मूलाराम जांगू, नोडल अधिकारी, मंगला पशु बीमा योजना, नागौर