11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

Nagaur patrika news….हक़ का काम अधूरा, भरोसे की ज़मीन पर दरकती ग्रामीण रोजगार योजना

ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिन का रोजगार देने के उद्देश्य से संचालित मनरेगा योजना की मंशा पर अब पानी फिरता नजर आने लगा है। योजना की स्थिति वित्तीय वर्ष 2024-25 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि जॉब कार्ड के पंजीयन की संख्या 6 लाख 60 हजार की थी, लेकिन इसमें 100 दिन का रोजगार प्राप्त करने वालों का औसत केवल 5 प्रतिशत ही रहा है। विशेष बात यह रही कि इसमें सक्रिय जॉबकार्डों की संख्या भी केवल 5 लाख 22 हजार रही है। इसके बाद भी 100 दिन का रेाजगार केवल 26 हजार 86 परिवारों को ही मिल पाया है। इससे योजनागत स्थिति का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।

3 min read
Google source verification

-विभागीय आंकड़ों के वित्तीय वर्ष 2024-25 में जॉब कार्ड लाखों में, लेकिन 100 दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार बेहद सीमित
-उम्मीद 100 दिनों की, हकीकत 40 से 70 दिनों का मिल रहा केवल काम
-काम मांगा, इंतजार मिला, कई पंचायतों में समय पर कार्य स्वीकृति नहीं होने से रोजगार दिवस घटे
-रोजग़ार की गारंटी कागजों की बाजीगिरी में चल रही है शानदार
नागौर.
ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिन का रोजगार देने के उद्देश्य से संचालित मनरेगा योजना की मंशा पर अब पानी फिरता नजर आने लगा है। योजना की स्थिति वित्तीय वर्ष 2024-25 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि जॉब कार्ड के पंजीयन की संख्या 6 लाख 60 हजार की थी, लेकिन इसमें 100 दिन का रोजगार प्राप्त करने वालों का औसत केवल 5 प्रतिशत ही रहा है। विशेष बात यह रही कि इसमें सक्रिय जॉबकार्डों की संख्या भी केवल 5 लाख 22 हजार रही है। इसके बाद भी 100 दिन का रेाजगार केवल 26 हजार 86 परिवारों को ही मिल पाया है। इससे योजनागत स्थिति का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।
चालू वित्तीय वर्ष में भी रोजगार नहीं
ग्रामीण परिवारों को शतप्रतिशत रेाजगार उपलब्ध कराने की मंशा पर तमाम सरकारी दावों के बाद भी पूरी होती नजर नहीं आ रही है। राज्य सरकार भले ही हर ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने का दावा करे, लेकिन वास्तविक स्थिति में और दावों में जमीन-आसमान अंतर है। जिले में करीब 65 हजार जॉब कार्ड ऐसे बताए जाते हैं। जिन पर चालू वित्तीय वर्ष में अब तक एक दिन का भी रोजगार दर्ज नहीं हुआ। जॉब कार्ड जारी होने के बावजूद काम न मिलना योजना की स्थिति पर सवालिया निशान लगाता हुआ नजर आ रहा है।
ब्लॉक स्तर पर भी हालात लगभग समान
ब्लॉक-वार स्थिति देखने पर सामने आता है कि अधिकांश ब्लॉकों में 100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों का प्रतिशत सीमित दायरे में ही बना हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि कई ब्लॉकों में शून्य कार्य वाले जॉब कार्डों की संख्या लगातार अधिक बनी हुई है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संकट की स्थिति बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार हर 13वां जॉबकार्ड शून्य रोजगार वाला रहा है।
काम की मांग के बावजूद उपलब्धता नहीं
प्रबंधन सूचना प्रणाली में यह दर्ज है कि बड़ी संख्या में श्रमिकों द्वारा काम की मांग की गई, लेकिन समय पर और पर्याप्त मात्रा में काम उपलब्ध नहीं कराया जा सका। इसका असर यह रहा कि कई ग्रामीण परिवारों को वैकल्पिक रोजगार की तलाश में पलायन करना पड़ा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब जॉब कार्ड, श्रमिक और बजट मौजूद हैं तो फिर चालू वित्तीय वर्ष में भी 100 दिन का रोजगार अधिकांश परिवारों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा। उम्मीद 100 दिनों की थी, जबकि अधिकांश ग्रामीण परिवारों को औसतन 40 से 70 दिन का ही काम मिल सका। आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में जॉब कार्ड सक्रिय होने के बावजूद कई पंचायतों में समय पर कार्य स्वीकृति नहीं हो पाई। काम की मांग के बावजूद इंतजार मिला। जिससे रोजगार दिवस घटते चले गए।
मनरेगा की वर्तमान स्थिति — नागौर जिला… वित्तीय वर्ष 2024-25

कुल पंजीकृत जॉब कार्ड — 6,60,000
कुल सक्रिय जॉब कार्ड — 5,02,000
100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवार — 26,086
100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों का प्रतिशत — लगभग 5 प्रतिशत से कम
शून्य कार्य वाले जॉब कार्ड — 65,000
100 दिन का रोजगार न पाने वाले सक्रिय जॉब कार्ड — लगभग 4.75 लाख

प्रावधानों के अनुसार सभी को काम दिया जाता है
मनरेगा योजना की प्रकृति एवं काम की उपलब्धता के अनुसार सभी को काम दिया जाता है। इसमें प्रयास रहता है कि शतप्रतिशत लोगों को पूरा कार्य जाए। येाजनागत स्थिति की यथासमय समीक्षा भी की जाती रहती है।
अरविंद जाखड़, सीईओ, जिला परिषद नागौर


मकर संक्रांति