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नागौर। राष्ट्रीय राजमार्ग-62 पर अमरपुरा से चुग्गावास तक बनी बाईपास सड़क सरकारी धन, निर्माण गुणवत्ता और विभागीय निगरानी के मामले में सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद सड़क अब तक पूरी तरह तैयार नहीं हुई है। पूर्व में काम करने वाली अनुबंधित एजेंसी को विभाग ने हटा दिया था। अब सड़क को दूसरी एजेंसी से सुधरवाने का कार्य जारी है। निर्माण के दौरान निगरानी की जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों की रही, जिसके बावजूद खामियां रह गई। सड़क की गुणवत्ता में सुधार और निर्माण कार्य की सही निगरानी सुनिश्चित करने के लिए नई एजेंसी को कार्य सौंपा गया है।
एनएच के विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, अमरपुरा से चुग्गावास तक बनी बाईपास सड़क का निर्माण वर्ष 2018 से 2020 के बीच कराया गया था। इस परियोजना पर करीब 138 करोड़ रुपए खर्च किए गए। निर्माण तो पूरा हुआ, लेकिन सड़क के कई हिस्सों में गुणवत्ता संबंधी खामियां निर्माण के तुरंत बाद ही सामने आने लगीं। डामर की परत कमजोर होने, सतह उखड़ने और सड़क के किनारे बैठने जैसी समस्याओं की लगातार शिकायतें आईं। विभाग ने स्थिति का आकलन कर संबंधित ठेकेदार को कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन ठेकेदार ने न तो नोटिस का कोई जवाब दिया और न ही सड़क सुधारने का कोई कार्य किया। इस कारण सड़क की हालत बिगड़ती गई।
गुणवत्ता सुधार में ठेकेदार की विफलता के कारण विभाग ने अप्रेल 2025 में पुराने ठेकेदार को कार्य से हटा दिया। ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई। पुराने ठेकेदार हटाए जाने के बाद, विभाग ने सड़क के खराब हिस्सों को सुधारने के लिए दूसरी एजेंसी को अनुबंधित किया। इस कार्य के लिए लगभग 11 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किए गए हैं और दिसंबर 2025 में वर्क ऑर्डर जारी किया। यह सुधार कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा करना अनिवार्य है।
138 करोड़ रुपए की लागत से बनी नागौर अमरपुरा-चुग्गावास बायपास सड़क की तकनीकी समीक्षा में पाया गया कि बाईपास के कई हिस्सों में निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का सही पालन नहीं हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि डामर की परत अपेक्षित मोटाई और मजबूती के अनुरूप नहीं थी, जबकि कुछ हिस्सों में बेस और सब-बेस की गुणवत्ता कमजोर रही। निर्माण के समय गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी निगरानी प्रभावी नहीं रही। नोटिस जारी करने के बावजूद ठेकेदार ने कोई सुधार नहीं किया।
सडक़: अमरपुरा से चुग्गावास बाईपास, एनएच-62
निर्माण अवधि: 2018 से 2020
निर्माण लागत: 138 करोड़ रुपए
यह कार्रवाई हुई: अप्रेल 2025 में ठेकेदार को हटाया। इसके साथ ही इसे ब्लॉक करने की कार्रवाई चल रही है। इससे ठेकेदार तीन साल तक किसी भी हाइवे का ठेका नहीं ले सकेगा।
नया वर्क आर्डर: दिसंबर 2025 में 11 करोड़
सुधार कार्य की समय सीमा: दिसंबर 2026 तक
पिछले ठेकेदार ने सड़क सही नहीं बनाई थी। गुणवत्ता को लेकर कई खामियां सामने आई थी। नोटिस के बाद भी न तो सड़क सुधारी, न ही जवाब दिया तो उसे हटाकर सड़क को दूसरी एजेंसी से सही कराया जा रहा है। इसके लिए 11 करोड़ का वर्क ऑर्डर जारी किया जा चुका है। सड़क एक साल में तैयार हो जाएगी।
दीपक परिहार, अधिशासी अभियंता, एनएच, नागौर खंड।
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Updated on:
10 Jan 2026 04:53 pm
Published on:
10 Jan 2026 04:12 pm
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