
विश्व विख्यात राज्य स्तरीय श्री रामदेव पशु मेला
नागौर. जिला मुख्यालय पर आगामी 19 फरवरी से शुरू होने वाले विश्व विख्यात राज्य स्तरीय श्री रामदेव पशु मेले को लेकर पशुपालन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं, दूसरी तरफ नागौर जिले में वर्षों से आयोजित होने वाले तीन राज्य स्तरीय पशु मेलों से खरीदे गए गोवंश के अंतरराज्यीय परिवहन में आ रही लगातार बाधाओं को लेकर पशुपालकों की चिंता बढ़ती जा रही है। बीते दो वर्षों में गो तस्करी को लेकर कभी पशु मेलों में हंगामा किया गया तो कभी रास्ते में बैलों से भरे ट्रकों को रोककर बैलों को खाली करवा दिया गया, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। विडंबना यह है कि पशुपालन विभाग स्वयं राज्य स्तरीय पशु मेलों का आयोजन करता है, लेकिन पशुओं और पशुपालकों की सुरक्षा तथा निर्बाध परिवहन सुनिश्चित करने में सरकार विफल साबित हो रही है। ऐसे हालातों में मेलों में आने वाले पशुपालकों (बेचने व खरीदने वाले दोनों) में इस बार संशय है कि क्या इस बार भी उन्हें असामाजिक तत्वों के कारण परेशानी झेलनी पड़ेगी।
जानिए, अब तक क्या-क्या परेशानी हुई
- वर्ष 2024 में बालदेव पशु मेले से खरीदे गए लगभग 450 गोवंश को 38 से 40 ट्रकों में भरकर मध्य प्रदेश ले जाया जा रहा था, लेकिन राजस्थान-मध्य प्रदेश सीमा पर ट्रकों को रोक दिया गया। बाद में गोवंश को गोशालाओं में भेज दिया गया, जिससे पशुपालकों को भारी परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
- इसी मेले से खरीदे गए बैलों को ले जा रहे 48 ट्रकों को पीपलिया थाना मंदसौर, 8 ट्रक रायला थाना शाहपुरा एवं 2 ट्रकों को निम्बाहेड़ा में रोका गया।
- अगस्त 2025 में परबतसर के तेजाजी पशु मेले में कथित गोरक्षकों के एक समूह ने पशुओं की तस्करी के आरोप में व्यापारियों पर हमला किया, जिससे झड़प और लाठीचार्ज हुआ, कई लोग घायल हुए और यातायात बाधित हुआ। बाहरी लोगों ने वैध रूप से खरीदे गए मवेशियों को उतरवाने की कोशिश की।
- फरवरी 2025 में नागौर के रामदेव पशु मेले से बैलों को लेकर रवाना हुए दो ट्रकों को पाली में रोका गया। काफी प्रयासों के बाद उन्हें रवाना किया जा सका।
मेले खराब करने वालों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई
नागौर के पशुपालकों ने बताया कि नागौरी नस्ल के बैल पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं और खेती व बोझा ढोने में सबसे मजबूत माने जाते हैं। इसलिए यहां सबसे अधिक पशु मेले आयोजित होते हैं, जहां उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और दिल्ली सहित कई राज्यों से किसान पशु खरीदने आते हैं। इससे स्थानीय किसानों व पशुपालकों को अच्छी आय होती है। सरकार ने भी बैलों से खेती करने वालों को 30 हजार रुपए अनुदान देने की घोषणा की है। इसके बावजूद कुछ लोग जगह-जगह पशु तस्करी का आरोप लगाकर राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए मेलों को खराब करने पर तुले हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र, टैगिंग व सभी वैध दस्तावेज के साथ होती है रवानगी
गौरतलब है कि पशु मेलों से खरीदे जाने वाले पशुओं को रवाना करने से पहले पशुपालक को पशुपालन विभाग की ओर से पशु का स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र, टैगिंग और अन्य सभी वैध दस्तावेज पूरे किए जाते हैं, जिसमें पशुपालक से खेती में उपयोग करने का शपथ पत्र तक लिया जाता है। इसके बावजूद परिवहन में रोड़े अटकाए जाते हैं।
कलक्टर ने लिखा पत्र - बने एक्शन प्लान
आगामी दिनों में जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाले पशु मेले को लेकर जिला कलक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव को पत्र लिखकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। कलक्टर ने पत्र में बताया कि नागौर में प्रतिवर्ष श्री रामदेव पशु मेला (माघ शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा तक) आयोजित होता है। मेले में नागौरी नस्ल के बैलों की बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री होती है, जिससे जिले के किसानों और पशुपालकों को आर्थिक संबल मिलता है। इसलिए अन्य राज्यों से समन्वय बनाकर, पुलिस-प्रशासन की सहायता और राज्य स्तर पर स्पष्ट एक्शन प्लान जारी किया जाए, ताकि परिवहन के दौरान परेशानी नहीं हो। अन्यथा पशुपालकों के साथ-साथ नागौर के पशु मेलों की परंपरा और अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।
कलक्टर ने दिए सुझाव
- अन्य राज्यों के किसानों/पशुपालकों को पशु क्रय व परिवहन में किसी प्रकार की अनावश्यक रोक-टोक न हो।
- अंतरराज्यीय समन्वय के लिए संबंधित राज्यों को पूर्व अनुमति व सहयोग के निर्देश जारी किए जाएं।
- पशु मेलों से खरीदे गए पशुओं को गंतव्य स्थान तक पहुंचाने के लिए पुलिस व प्रशासन आपसी समन्वय से सहायता करें।
- पशु परिवहन के लिए राज्य स्तर पर स्पष्ट एक्शन प्लान जारी किया जाए।
Updated on:
13 Jan 2026 11:44 am
Published on:
13 Jan 2026 11:43 am
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