31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य रुका, शिक्षण व्यवस्था प्रभावित

अधूरे लैब और पर्याप्त शैक्षिक स्टाफ के अभाव में द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को नहीं मिल रही पूरी शिक्षा

2 min read
Google source verification
Nagaur medical college

Nagaur medical college

नागौर. नागौर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा होने के कारण न केवल बुनियादी ढांचा प्रभावित हो रहा है, बल्कि यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों की शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (राजमैस) की ओर से अब तक न तो पूरे स्थाई असिस्टेंट प्रोफेसर लगाए जा सके हैं और न ही ठेकेदार एजेंसी ने पर्याप्त भवन तैयार किया है। निर्माण में देरी, अधूरी प्रयोगशालाएं और पर्याप्त शैक्षिक स्टाफ के अभाव ने मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को इसका सीधा खमियाजा भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें न तो पूरी सैद्धांतिक पढ़ाई मिल पा रही है और न ही आवश्यक व्यावहारिक प्रशिक्षण।

गौरतलब है कि नागौर में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति दिसम्बर 2019 में जारी हुई थी। इसके लिए कुल 325 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई, जिसमें से 60 प्रतिशत राशि यानी 195 करोड़ रुपए भारत सरकार और 40 प्रतिशत राशि यानी 130 करोड़ रुपए राज्य सरकार की ओर से वहन की जानी थी। स्वीकृति के लगभग ढाई वर्ष बाद मई 2022 में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू हुआ, जिसे 18 माह में पूरा किया जाना था, लेकिन निर्धारित समय-सीमा का दोगुना समय बीत जाने के बावजूद आज भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। कुल मिलाकर, नागौर मेडिकल कॉलेज का अधूरा निर्माण और स्टाफ की कमी न केवल विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है, बल्कि जिले में बेहतर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीदों पर भी पानी फेर रही है।

प्रमुख विषयों की पढ़ाई प्रभावित

नवम्बर 2024 से मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की कक्षाएं शुरू की गईं और इस वर्ष नवम्बर से द्वितीय वर्ष का बैच शुरू हो चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार एमबीबीएस द्वितीय वर्ष में पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे प्रमुख पैरा-क्लिनिकल विषय पढ़ाए जाते हैं, जो सेमेस्टर 3 से 5 तक चलते हैं। यह चरण चिकित्सा शिक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान विद्यार्थियों को रोग निदान, दवाओं के प्रभाव और सूक्ष्मजीवों के अध्ययन का गहन ज्ञान दिया जाता है, जो आगे की क्लिनिकल शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करता है। लेकिन अधूरे लैब और स्टाफ के अभाव में विद्यार्थियों को न तो नियमित कक्षाएं मिल पा रही हैं और न ही प्रयोगशालाओं में समुचित प्रायोगिक प्रशिक्षण। द्वितीय वर्ष की लैब तैयार नहीं होने के कारण उन्हें प्रथम वर्ष की लैब में ही प्रेक्टिकल करने पड़ रहे हैं। इसको लेकर विद्यार्थियों परेशान हैं, लेकिन खुले रूप से बोलने से डर रहे हैं।

जिम्मेदार बोले - कार्रवाई प्रक्रियाधीन

निर्माण कार्य को लेकर जिम्मेदार एजेंसी की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कार्यकारी एजेंसी एचएससीसी के सीनियर मैनेजर अशोक ने बताया कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य करने वाले संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि निर्माण कार्य 18 माह में पूरा होना था, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है। उधर, कॉलेज के उप प्राचार्य डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि संवेदक के खिलाफ कार्रवाई जयपुर स्तर पर प्रक्रियाधीन है। जहां तक शिक्षण व्यवस्था का सवाल है तो उपलब्ध लैब व अन्य संसाधनों से बेहतर देने का प्रयास किया जा रहा है।

Story Loader