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महाधर्म सम्मेलन में नशा मुक्ति, पर्यावरण व संस्कारों पर मंथन

मांझवास में भक्त फूलां बाई की पुण्यतिथि मनाई, अलग-अलग स्थानों से पहुंचे संत और पर्यावरण प्रेमी

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मांझवास में भक्त फूलां बाई की पुण्यतिथि मनाई

मांझवास में भक्त फूलां बाई की पुण्यतिथि मनाई

नागौर.मांझवास ग्राम में संत शिरोमणि भक्त फूलां बाई की 350वीं पुण्यतिथि पर धर्मसम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें नशा मुक्ति, पर्यावरण, शिक्षा, संस्कार, संस्कृति एवं योग आदि पर चर्चा की गई। सम्मेलन से पूर्व सुबह फूलां बाई समाधि स्थल पर बने मंदिर पर धर्म ध्वजा फहराई गई।

मेड़ता के सुखदास महाराज, साध्वी विनोद बाईसा और संत लक्ष्मीनारायण, संत कन्हैयालाल, योगी स्वरूपनाथ, अखिल भारतीय संत शिरोमणि भक्त फूलां बाई स्मृति संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हिम्मतारामभांभू और फूलां बाई मंदिर विकास समिति के कैलाश गोदारा की मौजूदगी में सम्मेलन का उद्घाटन किया गया। सम्मेलन में 25 प्रतिभाओं को कर्णधार सम्मान से सम्मानित किया।

इस मौके पर साध्वी विनोद बाईसा ने कहा कि भक्त फूलां बाई ने भगवान राम की भक्ति कर अपने जीवन को सफल बनाया व सिद्धि प्राप्त की। फूलां बाई की बनाई हुई गोबर की थेपड़ियां(ओपलों) में राम-राम की ध्वनि निकलती थी व जीवन भर गायों की सेवा करती रही। साध्वी ने कहा कि मनुष्य जीवन बड़ी मुश्किल से मिला है, इसका सदुपयोग करें। महन्त लक्ष्मीनारायण ने कहा कि सभी को भगवान के भजन कर अच्छे कार्यों में और मानव सेवा व गाय की सेवा करनी चाहिए । डाॅ. घनश्याम नाथ कच्छावा ने कहा कि 5 तत्वों से बना शरीर नाशवान है, हम सभी को प्रेम भाव और भाईचारा से जीवन जीना चाहिए ।

बीमारियों से बचना है तो खान-पान सुधारें

कवि धन्नाराम प्रजापत ने भक्त फूलां बाई की जीवणी पर प्रकाश डाला । कवि सत्यपाल सांदू ने वीर रस और मरूधर की माटी की कविता प्रस्तुत की। जादूगर चतुरसिंह राजपुरोहित ने अपनी जादूई कला का प्रदर्शन किया। वैद्य रावतराम दागड़ी ने कहा मधुमेह व तरह-तरह की बीमारियां से बचाव के लिए खान पान सुधारने पर जोर दिया।

मनुष्य कर्मों से बनता है महान

पद्मश्री हिम्मतारामभांभू ने कहा कि आदमी जन्म से नहीं, कर्म से महान बनता है। संत सुखदेव ने फूलां बाई की वाणियों का गायन किया। सालवा के दूदाराम गहलोत की ओर से महाप्रसादी रखी गई। ब्यावर से साध्वी गंगा बाई, गंगानगर से संत हीरादास, महन्त रामनाथ जाखड़, महन्त श्यामनाथ कूकणा, संत धर्माराम गोदारा, महंत मुरलीराम आदि उपस्थित रहे।

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