
हैण्डटूल्स उद्योग नागौर
नागौर. नागौर का पारंपरिक हैण्डटूल्स उद्योग आज भी सरकारी घोषणाओं के अमल का इंतजार कर रहा है। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष जिले के सबसे पुराने और पहचान बने हैण्डटूल्स उद्योग को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘लोकल फॉर वोकल’ पहल के तहत चयनित करते हुए नागौर में एक्सपोर्ट हब बनाने की घोषणा की थी, लेकिन बजट घोषणाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। इसी तरह औद्योगिक विकास और खनन क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को पैड सैम्पलिंग की सुविधा देने के लिए प्रयोगशाला (लैब) स्थापित करने की घोषणा भी अब तक अधूरी पड़ी है।
नागौर का हैण्डटूल्स उद्योग केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि यहां की पहचान और आजीविका का बड़ा आधार है। लोहारपुरा व बासनी रीको क्षेत्र में केंद्रित यह उद्योग 100 साल से पुराना है। एक सदी से अधिक पुराने इस उद्योग ने नागौर को ‘औजार नगरी’ के रूप में पहचान दिलाई। वर्तमान में इस उद्योग का सालाना टर्नओवर लगभग 50 करोड़ रुपए है और करीब 12 हजार श्रमिक व कारीगर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हुए हैं।
उद्यमियों और उद्योग संगठनों का मानना है कि यदि हैण्डटूल्स एक्सपोर्ट हब और खनन लैब जैसी घोषणाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, तो नागौर का औद्योगिक विकास नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। बजट घोषणाओं से आगे बढकऱ अब जरूरत है कि सरकार धरातल पर काम शुरू करे, ताकि ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना सच में साकार हो सके।
फैक्ट फाइल
हैण्डटूल्स उद्योग का सालाना टर्नओवर : लगभग 50 करोड़ रुपए
जिला मुख्यालय पर कुल इकाइयां : लगभग 60
हैण्डटूल्स उद्योग में कार्यरत श्रमिक व कारीगर : लगभग 12 हजार
नागौर में बनते हैं ये हैण्डटूल्स
नागौर शहर के लोहारपुरा और रीको क्षेत्र में संचालित इकाइयों में आज भी पारंपरिक तकनीक और आधुनिक मशीनों का समन्वय देखने को मिलता है। यहां प्लायर (सरौता), टोंग्स (संडासी), कटर, नोज प्लायर, बालपेन, फ्रास पेन, स्ट्रेट पेन, हैमर, कतिया, पिन्सर कटर, कुल्हाड़ी, ब्लैक स्मिथ टूल्स, मैसन और स्टोन कटिंग टूल्स जैसे अनेक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। स्थानीय इकाइयों में प्रतिमाह करीब 500 टन औजारों का उत्पादन हो रहा है।
प्रतिस्पर्धा के युग में टिकना मुश्किल
नागौर के हैण्डटूल्स की मांग केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। यहां के उत्पाद भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अरब देशों, मध्य पूर्व और यूरोप तक निर्यात किए जाते हैं। हैण्डटूल्स उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि यदि एक्सपोर्ट हब की घोषणा को धरातल पर उतारा जाए, तो निर्यात को नई गति मिल सकती है और छोटे कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे जोडऩे का रास्ता खुलेगा। उद्यमियों का कहना है कि एक्सपोर्ट हब बनने से गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी।
खनिजों में समृद्ध नागौर, सरकारी उदासीनता भारी
नागौर जिला, राजस्थान के प्रमुख खनिज उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, जो विशेष रूप से टंगस्टन, लिथियम, जिप्सम, लिग्नाइट और चूना पत्थर (लाइमस्टोन) के भंडारों के लिए प्रसिद्ध है। डेगाना की रेवंत पहाड़ी में टंगस्टन के साथ ही हाल ही में लिथियम के विशाल भंडार मिले हैं।
नागौर में प्रमुख खनिज और उत्पादन क्षेत्र:
टंगस्टन : डेगाना की रेवंत पहाड़ी भारत में टंगस्टन का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है।
लिथियम : हाल ही में डेगाना (रेवंत पहाड़ी) में लिथियम के बड़े भंडार मिले हैं।
जिप्सम : नागौर (भदवासी, ढाकोरिया, खेराट) भारत में जिप्सम उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
चूना पत्थर : खींवसर और गोटन क्षेत्र केमिकल ग्रेड का बेहतरीन चूना पत्थर प्रदान करते हैं।
अन्य खनिज: यहां लिग्नाइट (मातासुख-कासनाऊ) और सिलिका सैंड का भी उत्पादन होता है।
उम्मीद हो रही धूमिल
नागौर जिले का खनन क्षेत्र भी राज्य सरकार की घोषणाओं की राह देख रहा है। लाइम स्टोन, जिप्सम, लिथियम, बलुआ पत्थर और अन्य खनिजों के लिए प्रसिद्ध नागौर में पैड सैम्पलिंग लैब की घोषणा से खनन उद्यमियों को गुणवत्ता परीक्षण में सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी। लैब स्थापित नहीं होने से उद्यमियों को नमूनों की जांच के लिए अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं।
पान मैथी का चयन कर लिया
बजट घोषणा के कुछ समय बाद सरकार ने हैण्डटूल्स के स्थान पर नागौरी पान मैथी का चयन एक जिला - एक उत्पाद योजना में कर लिया।
- बजरंग सांगवा, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, नागौर
नहीं खुल पाई लैब
उद्यमियों को पैड सैम्पलिंग की सुविधा प्रदान करने के लिए जिले में अब तक लैब स्थापित नहीं हो पाई है।
- जयप्रकाश गोदारा, खनि अभियंता, खनिज विभाग, नागौर
Updated on:
10 Feb 2026 11:15 am
Published on:
10 Feb 2026 11:14 am
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