
फडणवीस ने उद्धव और राज ठाकरे पर किया कटाक्ष (Photo: IANS)
BMC Election 2026: मुंबई महानगरपालिका चुनाव के मतदान के दौरान आज मुंबई की सड़कों पर सियासी तनाव देखने को मिल रहा है। फर्जी वोटिंग को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के गठबंधन ने 'भगवा गार्ड' नाम से अपने कार्यकर्ताओं को मतदान केंद्रों के बाहर तैनात किया है। कई जगहों पर ठाकरे भाइयों के 'भगवा गार्ड' और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि पुलिस ने उन्हें मतदान केंद्र से 100 मीटर दूर कर दिया। इस पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, अब ठाकरे भाइयों में वह क्षमता नहीं रही। वो क्या दहशत फैलाएंगे? लेकिन अगर कोई भी डर और अराजकता फैलाने की कोशिश करेगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोई कानून हाथ में लेने की कोशिश करेगा, तो पुलिस उसे उसी भाषा में जवाब देगी।
मुंबई के कई मतदान केंद्रों के बाहर शिवसेना (UBT) और मनसे (MNS) के कार्यकर्ता तैनात किए गए हैं, जिन्हें 'भगवा गार्ड' नाम दिया गया है। राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर कोई भी फर्जी वोटर या दूसरी बार मतदान करने आता है तो उसे वहीं पकड़कर पीटो। ठाकरे भाइयों का आरोप है कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली करने की कोशिश की जा रही है, जिसे रोकने के लिए उन्होंने खुद मोर्चा संभाला है।
ठाकरे भाइयों के इस कदम पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे मतदाताओं के बीच दहशत फैलाने की कोशिश करार दिया। नागपुर में मतदान के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "राज और उद्धव ठाकरे ने जो 'भगवा गार्ड' बनाया है, वह बहुत सिलेक्टिव है। यह मालवणी जैसे इलाकों में क्यों नहीं जाता? मुंबई में कोई दहशत पैदा नहीं कर सकता, ठाकरे भाई भी नहीं कर सकते, क्योंकि अब उनकी उतनी क्षमता ही नहीं बची है। अब उनमें वह ताकत नहीं रही है। अगर किसी ने भी कानून हाथ में लेने या दहशत फैलाने की कोशिश की, तो पुलिस उन्हें वहीं ठोकेगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।“
फडणवीस ने आगे कहा कि फर्जी वोटरों को पकड़ने का काम चुनाव आयोग और मतदान केंद्रों पर बैठे राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंट्स का है। उन्होंने सवाल उठाया, "मतदान केंद्र पर मौजूद आपका एजेंट अगर किसी मतदाता पर संदेह जताता है, तो उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया है। मेरी पार्टी भी ऐसे मामलों में नियमों के तहत आपत्ति दर्ज कराएगी, लेकिन मारपीट या धमकी देना लोकतंत्र के खिलाफ है। अगर आपको फर्जी वोटर के बारे में पता है तो आपका एजेंट आपत्ति क्यों नहीं लेता? कानून की प्रक्रिया का पालन करने के बजाय मारपीट की धमकी देना केवल मतदान प्रतिशत कम करने की एक साजिश है।"
उधर, राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद है और किसी भी निजी संस्था या गार्ड को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही फर्जी वोट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
15 Jan 2026 05:22 pm
Published on:
15 Jan 2026 05:07 pm
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