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भाजपा के खिलाफ शिंदे सेना और NCP की मोर्चाबंदी, क्या सतारा में नहीं खिलेगा कमल?

भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सतारा की सत्ता से दूर रखने के लिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नया मोर्चा बनाने की तैयारी में है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Feb 11, 2026

Devendra Fadnavis and Eknath Shinde

देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे (Photo: IANS)

महाराष्ट्र में जिला परिषद चुनाव के नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच, सतारा जिला परिषद के नतीजों के बाद एक नया और चौंकाने वाला समीकरण उभरता दिख रहा है। जिले में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद भाजपा (BJP) को सत्ता से दूर रखने के लिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना और एनसीपी अजित पवार गुट (NCP) ने हाथ मिलाने की तैयारी शुरू कर दी है। सतारा के एक निजी होटल में दोनों दलों की गुप्त बैठक के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या 'महायुति' के साथी ही भाजपा का खेल बिगाड़ने वाले हैं।

सत्ता के लिए घेराबंदी शुरू

जानकारी के मुताबिक, सतारा के होटल फर्न में मंगलवार को दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं की एक अहम बैठक हुई, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और हवा दे दी है। इस बैठक में शिवसेना के मंत्री शंभुराज देसाई, अजित गुट के मंत्री मकरंद पाटिल, सांसद नितिन पाटिल, संजीव राजे नाइक निंबालकर, पूर्व विधायक दीपक चव्हाण मौजूद रहे। बैठक को जिला परिषद में सत्ता स्थापना की दिशा में एक शुरुआती लेकिन अहम कदम माना जा रहा है।

भाजपा की जरुरत क्यों नहीं?

सतारा जिला परिषद की कुल सीटों के समीकरण को देखें तो बहुमत का आंकड़ा 33 है। हालिया नतीजों में भाजपा 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, लेकिन वह बहुमत के जादुई आंकड़े से 6 कदम दूर है। वहीं, एनसीपी (20 सीटें) और शिंदे की शिवसेना (15 सीटें) यदि एक साथ आते हैं, तो उनके पास कुल 35 सीटें हो जाती हैं, जो बहुमत के लिए पर्याप्त हैं। यही वजह है कि दोनों दलों ने भाजपा को दरकिनार कर अपनी मोर्चाबंदी शुरू कर दी है।

बैठक के बाद एनसीपी नेता मकरंद पाटील ने साफ कहा कि यह मुलाकात जिला परिषद में सत्ता गठन को लेकर प्राथमिक चर्चा के लिए थी। शिवसेना मंत्री शंभुराज देसाई ने भी इस बात की पुष्टि की।

दरअसल, सतारा जिला परिषद में भाजपा ने 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया है। इसके बाद एनसीपी को 20 सीटें और उपमुख्यमंत्री शिंदे की शिवसेना को 15 सीटें मिली हैं। जिला परिषद में बहुमत के लिए 33 सीटों की जरूरत है। ऐसे में यदि एनसीपी और शिवसेना साथ आते हैं, तो वे आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर सकते हैं। इसके अलावा कांग्रेस को एक और अन्य को दो सीटों पर जीत मिली है, जबकि शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट का खाता तक नहीं खुल सका है। यही वजह है कि भाजपा को सत्ता से बाहर रखने की रणनीति पर गंभीरता से मंथन शुरू हो गया है।

फिलहाल, सतारा में सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी, यह पूरी तरह इन बैठकों और आगे होने वाले फैसलों पर निर्भर करता है। लेकिन इतना तय है कि भाजपा के लिए राह आसान नहीं रहने वाली।