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मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक बनी, परंतु नहीं मिल रहा लोगोंं का उपचार

6.50 करोड़ में बननी थीं जिले में 26 संजीवनी क्लीनिक, 11 बनी परंतु उनमें नहीं पर्याप्त स्टाफ, मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजना पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार कर रहे अनदेखी

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मुरैना. मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजना संजीवनी क्लिनिक पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते उनका संचालन प्रोपर नहीं हो पा रहा है। इसी के चलते कुछ क्लिनिक बंद तो कुछ में स्टाफ गायब रहता है। इसके चलते लोगों को प्रोपर इलाज नहीं मिल पा रहा है।


शासन ने एक क्लिनिक निर्माण के लिए 25 लाख रुपए की राशि जारी की थी इस लिहाज से जिले के लिए 26 क्लिनिक के लिए 6.50 करोड़ की राशि आई थी। इनका निर्माण निकायों से करवाया गया। शहर में नगर निगम और विकासखंड स्तर पर नगर पालिकाओं ने निर्माण करवाया जा रहा है। इनमें से 11 का निर्माण होकर शुरू हो चुकी हैं लेकिन उनमें पर्याप्त स्टाफ न होने पर लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। कलेक्टर की सख्ती के चलते अधिकांश विभाग के अधिकारी व कर्मचारी पूरे समय कार्यालय में बैठ रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य महकमे पर कोई असर नहीं हो रहा। क्लिनिकों को समय समय पर विभाग के जिम्मेदार मॉनीटरिंग करते तो संचालन ठीक से हो सकता था। पत्रिका प्रतिनिधि ने बुधवार को क्लिनिकों को देखा तो स्थिति ठीक नहीं मिली।

दोपहर 01:30 बजे, वार्ड 13 की क्लिनिक

संजीवनी क्लिनिक वार्ड क्रमांक 13 केशव कॉलोनी में दोपहर 1:30 बजे यहां पदस्थ चार के स्टाफ में से डॉ. अनुष्का डंडोतिया व सपोर्टिंग महिला कर्मचारी मौजूद थी। जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर व एक अन्य स्टाफ नहीं था। यहां रोजाना करीब 4 से 5 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

दोपहर 1:45 बजे, वार्ड 12 की क्लिनिक

संजीवनी क्लिनिक वार्ड क्रमां 12 कमिश्नर कॉलोनी में दोपहर 3:45 बजे यहां पदस्थ चार के स्टाफ में से सिर्फ एक सपोर्टिंग कर्मचारी मौजूद था। डॉ. शुभम भदौरिया, ऑपरेटर सहित तीन कर्मचारी नदारद थे। यहां रोजाना करीब 35 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

दोपहर 2:40 बजे, वार्ड 10 की क्लिनिक

संजीवनी क्लिनिक वार्ड क्रमांक 10 जौरी में दोपहर 2:40 बजे ताला पड़ा था। यहां एक भी स्टाफ नहीं था। यहां की संजीवनी क्लिनिक पास में ही निर्मित आरोग्य धाम में संचालित की जाती है लेकिन यहां पूरा स्टाफ गायब मिला।

दोपहर 3:00 बजे, वार्ड 41 की क्लिनिक

संजीवनी क्लिनिक वार्ड क्रमांक 41 आमपुरा में दोपहर 3 बजे डॉ. आकांक्षा राठौर, ऑपरेटर नदारद मिले। यहां पदस्थ पांच के स्टाफ में से सपोर्टिंग कर्मचारी सहित तीन मौजूद मिले। यहां रोजाना 35 से 40 मरीज पहुंच रहे हैं।

यहां शुरू हो चुकी हैं क्लिनिक, स्टाफ की कमी

अभी तक शहर में बड़ोखर, तुस्सीपुरा, अतरसुमा, आमपुरा, छौंदा, गड़ौरापुरा, सिग्नल बस्ती, केशव कॉलोनी, कमिश्नर कॉलोनी, महामाया, मुरैना गांव, जौरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में बानमोर, जौरा, अंबाह में क्लिनिक शुरू हो चुके है। लेकिन इनमें नर्सिंग स्टाफ व फार्मासिस्ट अभी तक तैनात नहीं हो सके हैं इसलिए लोगों को प्रोपर इलाज नहीं मिल पा रहा है।

यहां निर्माणधीन हैं क्लिनिक

शहर के लालौर, शिकारपुर, संजय कॉलोनी एवं ग्रामीण क्षेत्र में अंबाह वार्ड 17, जौरा पगारा रोड, कैलारस वार्ड 7, अटेर रोड पोरसा, पोरसा वार्ड 2, नीलम कॉलोनी सबलगढ़ का निर्माण कार्य अधर में हैं। कहीं पर बिल्डिंग का निर्माण हो चुका लेकिन स्वास्थ्य विभाग के हैंडओवर नहीं हो सकी हैं। कहीं पर निर्माण के बाद तकनीकी खामियां निकाल दी हैं, इसके चलते हैंडओवर नहीं हो पा रही हैं।

पोरसा में बीएमओ ने दिया ठेकेदार को नोटिस

पोरसा कस्बे में वार्ड 5 एवं नौ में क्लिनिक की बिल्डिंग बनकर तैयार हो चुकी हैं लेकिन तकनीकी खांमिया पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने हैंडओवर नहीं किया है और बीएमओ डॉ शैलेन्द्र सिंह तोमर ने ठेकेदार को नोटिस जारी करके जो कमियां हैं, उनको पूरा करने के लिए लिखा है। बताया गया है कि भवन में लगाई गई टाईल्स पूर्ण रूप से बैठ गयी है उसे निकलवाकर दोबारा से दुरस्त किए जाने एवं पैथोलोजी लैब में प्लेटफोर्म बनाए जाने सहित 15 विंदुओं पर काम की आवश्यकता बताई गई।

संजीवनी क्लिनिकों के ऑपरेटर व अन्य स्टाफ को आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए फील्ड में तैनात किया है, इसलिए अस्पताल में नहीं मिले होंगे। नर्सिंग स्टाफ व फार्मासिस्ट की मांग को लेकर शासन को पत्र लिखा जा चुका है।

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डॉ. पदमेश उपाध्याय, सीएमएचओ, मुरैना

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