
UP Politics: सपा में अंदरूनी गुटबाजी | Image - X/@DrSTHasanMP
UP Politics News Hindi: यूपी के मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के मौजूदा सांसद और पूर्व सांसद के बीच चल रही तीखी बयानबाजी अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गई है। लगातार सामने आ रहे सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप और मीडिया में दिए जा रहे बयानों ने सपा की अंदरूनी गुटबाजी को उजागर कर दिया। इसी विवाद को गंभीरता से लेते हुए पार्टी ने संगठनात्मक अनुशासन को मजबूत करने के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है।
सपा की ओर से जारी गाइडलाइन में साफ किया गया है कि कोई भी नेता या कार्यकर्ता मीडिया अथवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पार्टी के किसी अन्य नेता के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप या अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करेगा। ऐसा करना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आएगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने हाल ही में एक निजी कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें मौजूदा सांसद रुचिवीरा को आमंत्रित नहीं किया गया। हैरानी की बात यह रही कि उसी कार्यक्रम में भाजपा के तीन बड़े स्थानीय नेता मौजूद रहे। इसके बाद सपा सांसद ने मीडिया से बातचीत में पूर्व सांसद पर टिप्पणी करते हुए गंभीर आरोप लगाए, जिससे मामला और तूल पकड़ गया।
सपा सांसद के बयान के बाद पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने भी मीडिया में जवाबी टिप्पणी की। इसके साथ ही एक भाजपा विधायक ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिससे यह मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा और सपा के भीतर चल रही गुटबाजी की चर्चा और तेज हो गई।
यह पहला मौका नहीं है जब सपा के अंदर मतभेद खुलकर सामने आए हों। इससे पहले पिछले महीने महानगर कार्यालय में एसआईआर को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में बैनर पर मौजूदा सांसद की फोटो नहीं लगाई गई थी। इसे लेकर सांसद समर्थकों ने नाराजगी जताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया था, जिसे संगठनात्मक एकजुटता के लिए बड़ा झटका माना गया।
जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव ने गाइडलाइन जारी करते हुए इसे सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बताया। हालांकि पार्टी के अंदर इसे सांसद और पूर्व सांसद के बीच खुले टकराव से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि नेतृत्व अब किसी भी स्तर पर सार्वजनिक विवाद को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि सपा के किसी भी होर्डिंग, फ्लैक्सी, बैनर, पोस्टर, स्टीकर या अन्य प्रचार सामग्री में पार्टी का प्रचार किया जाता है तो उसमें संबंधित सांसद और विधायकों की फोटो अनिवार्य रूप से लगाई जाएगी। इसका उद्देश्य संगठन में समानता और सम्मान की भावना बनाए रखना बताया गया है।
पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी नेता या कार्यकर्ता को कोई आपत्ति या शिकायत है तो वह सोशल मीडिया या मीडिया के बजाय जिलाध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष या राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलकर अपनी बात रख सकता है। नेतृत्व का मानना है कि इससे संगठन के भीतर संवाद मजबूत होगा और सार्वजनिक विवादों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
Updated on:
12 Jan 2026 06:28 pm
Published on:
12 Jan 2026 06:27 pm
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