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हाईवे किनारे खेत में चल रही थी ‘एमडी ड्रग बनाने की लैब’! MP में करोड़ों का सिंडिकेट बेनकाब

MD drug manufacturing lab: मंदसौर में 8 किलो एमडी ड्रग्स की बरामदगी के बाद जांच की कड़ियां महू के थवलाय गांव तक पहुंचीं, जहां खेत किनारे किराए के मकान में अस्थायी केमिकल लैब पकड़ी गई।

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महू

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Akash Dewani

Feb 14, 2026

MD drug manufacturing lab was operating near agra-mumbai highway syndicate busted in mhow mp news

MD drug manufacturing lab was operating near agra-mumbai highway (फोटो- Patrika.com)

MP News: मंदसौर में शुक्रवार रात 8 किलो एमडी ड्रग्स की बड़ी पकड़ के बाद जिस नेटवर्क की आहट मिली थी, उसकी कडिय़ां शनिवार सुबह इंदौर जिले के महू के बडगोंदा थाना क्षेत्र के थवलाय गांव तक जा पहुंचीं। आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे से सटे खेत किनारे बने एक किराए के मकान पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीएन) की टीम ने दबिश दी। अंदर से भारी मात्रा में केमिकल, ड्रग निर्माण में उपयोगी दो मशीनें और संदिग्ध सामग्री बरामद की गई। प्रारंभिक जांच में संकेत हैं कि यहां सिंथेटिक ड्रग ‘एमडी’ (मेफेड्रोन) तैयार कर बड़े शहरों तक सप्लाई की जा रही थी।

20 अधिकारियों ने चारों ओर से घेरा

शनिवार सुबह करीब 10 बजे 5-6 वाहनों से पहुंचे लगभग 20 अधिकारियों ने मकान को चारों तरफ से घेर लिया। सूत्रों के अनुसार टीम अपने साथ मंदसौर में पकड़े गए युवकों को भी लाई थी। उनकी निशानदेही पर मकान का ताला खुलवाया गया और तलाशी शुरू हुई। अंदर का दृश्य किसी आवासीय घर जैसा नहीं, बल्कि अस्थायी केमिकल लैब जैसा नजर आया। बड़ी मात्रा में रसायन और दो मशीनें देखकर अधिकारी भी चौंक गए। आशंका है कि एमडी ड्रग्स का निर्माण कर उसे पैकिंग के बाद हाईवे के जरिए आगे भेजा जाता था।

लोकेशन का ‘चयन’ और तेज सप्लाई की रणनीति

मकान गांव में जाने वाली सडक़ के आखिरी छोर पर खेत किनारे स्थित है। कुछ ही मीटर की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि तैयार माल की तेज ढुलाई और सामान्य गतिविधि का आभास देने के लिए यह स्थान रणनीतिक रूप से चुना गया। हाईवे कनेक्टिविटी के कारण प्रदेश के अन्य शहरों के साथ-साथ बाहरी राज्यों तक सप्लाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

किराया ऑनलाइन, कोई लिखित अनुबंध नहीं

सूत्रों के मुताबिक आरोपित ने खुद को औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में कार्यरत बताते हुए मकान किराए पर लिया था। लिखित किराया अनुबंध नहीं किया गया, लेकिन हर माह नेट बैंकिंग के माध्यम से भुगतान किया जाता रहा। मकान मालिक द्वारा डिजिटल ट्रांजेक्शन के प्रमाण जांच टीम को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। इससे किराएदारी की पुष्टि तो हुई, लेकिन औपचारिक दस्तावेजों के अभाव ने जांच को और गंभीर बना दिया है।

मंदसौर में हुई गिरफ्तारी से खुली परत

शुक्रवार रात मंदसौर में 8 किलो एमडी ड्रग्स के साथ पकड़े गए दो युवकों की गिरफ्तारी इस पूरी कार्रवाई का आधार बनी। नारकोटिक्स अधिकारियों के अनुसार, जब्त ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत डेढ़ से दो करोड़ रुपए आंकी गई है। प्राथमिक जांच में मंदसौर में पकड़ा गया माल इसी नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है।

अधिकारी मौन, नेटवर्क की तलाश तेज

देर शाम तक सीबीएन के अधिकारियों ने अधिकृत बयान देने से परहेज किया। हालांकि सूत्रों का कहना है कि जब्त केमिकल और मशीनों की फोरेंसिक जांच के बाद नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई जाएगी। मंदसौर से महू तक फैले इस ‘एमडी सिंडिकेट’ ने एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक स्थानीय कड़ी है या प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग्स का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जिसकी परतें अभी खुलनी बाकी हैं। (MP News)