
ओला-उबर सहित सभी एप आधारित टैक्सियों पर सख्त नियम लागू होंगे, ड्राइवरों का पुलिस सत्यापन और किराया नियंत्रण भी शामिल (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP to Enforce New Cab Policy: उत्तर प्रदेश में मोबाइल एप आधारित कैब सेवाओं को पहली बार स्पष्ट और व्यापक नियामक ढांचे में लाने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ओला, उबर समेत सभी एप आधारित टैक्सी एग्रीगेटरों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए नई नीति लागू करने जा रही है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, किराया व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और ड्राइवरों व कंपनियों की जवाबदेही तय करना है।
परिवहन विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे इस नीति मसौदे में पैनिक बटन, जीपीएस ट्रैकिंग, ड्राइवरों का पुलिस सत्यापन, वाहन फिटनेस, बीमा और किराया नियंत्रण जैसे कई अहम प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। अब तक स्पष्ट नीति के अभाव में इस क्षेत्र में कई अनियमितताएं सामने आती रही हैं, जिन्हें दूर करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रस्तावित नीति के तहत राज्य में संचालित सभी एप आधारित कैब कंपनियों को अनिवार्य रूप से परिवहन विभाग में पंजीकरण कराना होगा। बिना पंजीकरण कोई भी एग्रीगेटर सेवा संचालित नहीं कर सकेगा। इस कदम से सरकार को इन कंपनियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने में आसानी होगी और सेवा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही कराधान और नियम अनुपालन की प्रक्रिया भी व्यवस्थित होगी।
यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक कैब में पैनिक बटन और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य किया जाएगा। यह सिस्टम 24×7 कंट्रोल रूम से जुड़ा रहेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।यदि किसी यात्री को खतरे का आभास होता है, तो पैनिक बटन दबाते ही अलर्ट संबंधित नियंत्रण कक्ष और आवश्यकतानुसार पुलिस तक पहुंचेगा। जीपीएस ट्रैकिंग से वाहन की वास्तविक समय स्थिति की निगरानी संभव होगी।
नीति के तहत कैब ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाएगा। इसके अलावा उन्हें निर्धारित प्रशिक्षण से गुजरना होगा, जिसमें यात्री व्यवहार, महिला सुरक्षा, आपातकालीन स्थिति में प्रतिक्रिया और यातायात नियमों की जानकारी शामिल होगी। सरकार का मानना है कि प्रशिक्षित और सत्यापित ड्राइवर यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करेंगे।
नई नीति में महिला यात्रियों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। रात के समय यात्रा, एकल महिला यात्रियों की सुरक्षा और आपात सहायता प्रणाली को मजबूत करने पर फोकस रहेगा। ड्राइवरों के आचरण से संबंधित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई का प्रावधान भी किया जाएगा। गंभीर मामलों में ड्राइवर का लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकेगा।
ऐप आधारित कैब सेवाओं में पीक आवर के दौरान अत्यधिक किराया वसूली की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। इसे रोकने के लिए सरकार न्यूनतम और अधिकतम किराया सीमा तय करने पर विचार कर रही है। इससे यात्रियों को मनमाने किराए से राहत मिलेगी और किराया निर्धारण अधिक पारदर्शी होगा।
नीति के तहत सभी कैब वाहनों की फिटनेस, बीमा और परमिट दस्तावेजों को अद्यतन रखना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वाहन को सेवा से हटाया जा सकता है। इससे सड़क सुरक्षा और यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
यात्रियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया जाएगा। शिकायत दर्ज होने के बाद तय समय सीमा में कार्रवाई करना कंपनियों के लिए अनिवार्य होगा। बार-बार शिकायत मिलने पर एग्रीगेटर या ड्राइवर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का कहना है कि इस नीति से ड्राइवरों को भी फायदा होगा। स्पष्ट नियमों के तहत काम करने से उन्हें मनमाने दंड या शोषण से राहत मिलेगी। साथ ही सेवा शर्तों, भुगतान व्यवस्था और सुरक्षा मानकों में पारदर्शिता आएगी।
परिवहन विभाग के अनुसार अभी तक स्पष्ट नीति के अभाव में कई तरह की अनियमितताएं देखी गई हैं,जैसे किराया विवाद, सुरक्षा मानकों की कमी और जवाबदेही का अभाव। नई नीति इन समस्याओं को दूर करने में सहायक होगी। नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है और कैब एग्रीगेटरों, ड्राइवर संगठनों तथा अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। लागू होने के बाद यह नीति पूरे राज्य में प्रभावी होगी।
Published on:
08 Feb 2026 02:51 pm
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