
2027 से पहले सपा-भाजपा की बड़ी परीक्षा Source- Official Pages
UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के बीच एक बार फिर बड़ी सियासी टक्कर होने जा रही है। मऊ की घोसी, सोनभद्र की दुद्धी और बरेली की फरीदपुर विधानसभा सीटें विधायकों के निधन के कारण खाली हुई हैं। इन तीनों सीटों पर अप्रैल-मई के बीच उपचुनाव कराए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि ये उपचुनाव पश्चिम बंगाल चुनाव के आसपास हो सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये उपचुनाव सिर्फ स्थानीय नहीं हैं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव का संकेत भी देंगे। खास बात यह है कि घोसी और दुद्धी सीट पर एक ही कार्यकाल में दूसरी बार उपचुनाव होने जा रहा है, जो अपने आप में दुर्लभ है। पिछली बार घोसी और दुद्धी सीट सपा के पास थीं, जबकि फरीदपुर सीट भाजपा ने जीती थी।
इन तीनों सीटों पर जातीय समीकरण बहुत अहम माने जा रहे हैं।
घोसी में सपा को सहानुभूति के साथ मुस्लिम-यादव वोट का सहारा है, जबकि भाजपा राजभर और चौहान वोटरों को साधने की कोशिश करेगी।
दुद्धी में सपा को सहानुभूति का लाभ मिल सकता है, लेकिन भाजपा नए चेहरे के जरिए मुकाबला कड़ा कर सकती है। यहां दलित और आदिवासी वोट निर्णायक भूमिका में रहेंगे।
फरीदपुर में सहानुभूति के साथ मुस्लिम और सवर्ण वोट अहम होंगे, जबकि भाजपा का पारंपरिक आधार यहां मजबूत माना जाता है।
मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट पर एक ही कार्यकाल में दूसरी बार उपचुनाव हो रहा है। साल 2023 में सपा विधायक दारा सिंह चौहान के इस्तीफे के बाद यहां उपचुनाव हुआ था। दारा सिंह चौहान सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे, लेकिन उपचुनाव में सपा के सुधाकर सिंह ने करीब 42 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। अब 20 नवंबर 2025 को सुधाकर सिंह के निधन के बाद सीट फिर खाली हो गई है।
सोनभद्र की दुद्धी (आरक्षित) सीट पर भी दूसरी बार उपचुनाव होगा। 8 जनवरी 2026 को सपा विधायक और वरिष्ठ आदिवासी नेता विजय सिंह गोंड का निधन हो गया। वे आठ बार विधायक रह चुके थे और आदिवासी समाज में उनकी गहरी पकड़ थी। इससे पहले 2022 में यह सीट भाजपा के पास थी, लेकिन विधायक को सजा होने के बाद सीट खाली हुई थी। 2024 के उपचुनाव में विजय सिंह गोंड ने भाजपा को हराकर सीट सपा की झोली में डाली थी।
बरेली की फरीदपुर (सुरक्षित) सीट से भाजपा विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का 2 जनवरी 2026 को निधन हो गया। फरीदपुर को लंबे समय से ‘चेंज की सीट’ माना जाता रहा है, क्योंकि यहां कोई भी विधायक लगातार दो बार नहीं जीत पाया था। लेकिन डॉ. श्याम बिहारी लाल ने 2017 और 2022 में जीत दर्ज कर यह परंपरा तोड़ दी थी। वे एक शिक्षाविद भी थे और कई शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े रहे। अब उनके निधन के बाद यहां भी उपचुनाव तय है।
कुल मिलाकर, घोसी, दुद्धी और फरीदपुर के ये उपचुनाव 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा और भाजपा के लिए सेमीफाइनल की तरह होंगे। इनका असर न सिर्फ इन इलाकों में, बल्कि पूरे प्रदेश की सियासत पर देखने को मिल सकता है।
Published on:
13 Jan 2026 09:27 am
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