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Pankaj Chaudhary Vs Mayawati: मायावती के ब्राह्मण बयान पर पंकज चौधरी का जवाब, कहा- भाजपा को प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं

बसपा प्रमुख मायावती के ब्राह्मण समाज से जुड़े बयान पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा को बसपा से किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है और 2027 में जनता मायावती को जवाब देगी। साथ ही SIR पर भी भरोसा दिलाया।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 15, 2026

मायावती के ब्राह्मण बयान पर पंकज चौधरी का पलटवार: ‘हमें बसपा के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं, 2027 में जनता देगी जवाब (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

मायावती के ब्राह्मण बयान पर पंकज चौधरी का पलटवार: ‘हमें बसपा के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं, 2027 में जनता देगी जवाब (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Pankaj Chaudhary Vs Mayawati Political Debate: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज को लेकर बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ब्राह्मणों की उपेक्षा का आरोप लगाया था, भाजपा के नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा को किसी भी दल, खासकर बसपा से प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं है। जनता सब देख रही है और 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका जवाब मायावती को मिल जाएगा।

‘बसपा के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं’

लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए पंकज चौधरी ने कहा कि भाजपा ने हमेशा हर वर्ग को साथ लेकर चलने का काम किया है। हमें यह साबित करने के लिए बसपा या किसी और पार्टी के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है कि हम ब्राह्मण समाज का सम्मान करते हैं।”

उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकारों में ब्राह्मण समाज को न केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला है, बल्कि प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। पंकज चौधरी ने मायावती के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि ऐसे बयान केवल चुनावी माहौल बनाने के लिए दिए जा रहे हैं।

2027 में जनता देगी जवाब

प्रदेश अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश की जनता 2027 के विधानसभा चुनाव में ऐसे बयानों का उचित जवाब देगी। उन्होंने कहा कि जनता जानती है कि किसने विकास किया और किसने सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की। मायावती जी को 2027 में जनता का जवाब मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का आधार केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समावेशी पार्टी है, जो समाज के हर तबके को साथ लेकर चलती है।

मायावती का बयान

गौरतलब है कि हाल ही में अपने जन्मदिन के अवसर पर मायावती ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि भाजपा सरकार में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने दावा किया था कि बसपा की सरकारों में ब्राह्मणों को सम्मान और प्रतिनिधित्व दिया गया और वर्तमान सरकार में उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। मायावती के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है, क्योंकि ब्राह्मण समाज उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाता रहा है।

SIR को लेकर भी बोले पंकज चौधरी

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवालों पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि SIR के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे। उन्होंने कहा कि SIR की प्रक्रिया में किसी भी वोटर का नाम छूटने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए पार्टी के नेता और कार्यकर्ता पूरी सक्रियता के साथ लगे हुए हैं।  पंकज चौधरी ने बताया कि संगठन स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि बूथ स्तर तक हर मतदाता का सत्यापन हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन दोनों मिलकर इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा कर रहे हैं।

कार्यकर्ताओं को दिया भरोसा

प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भाजपा का संगठन पूरी मजबूती के साथ काम कर रहा है और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उनका कहना था कि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव होती है और भाजपा इस नींव को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता के बीच जाकर भ्रम फैलाने वाली बातों का जवाब तथ्यों के साथ दें।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती और पंकज चौधरी के बयानों के बीच यह टकराव आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की आहट है। ब्राह्मण समाज को लेकर बयानबाजी इस बात का संकेत है कि सभी दल अपने-अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने में जुट गए हैं। भाजपा जहां विकास और संगठन की मजबूती को अपना हथियार बना रही है, वहीं बसपा सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को फिर से उभारने की कोशिश कर रही है।