
Office Politics Trend|फोटो सोर्स – Patrika.com
Quiet Firing: ऑफिस में कभी-कभी खामोशी सबसे बड़ा मैसेज बन जाती है। जब ईमेल्स का जवाब मिलना बंद हो जाए, मीटिंग्स बिना बताए आगे बढ़ने लगें और आपकी जिम्मेदारियां धीरे-धीरे कम होने लगें, तो यह महज इत्तेफाक नहीं होता। आज के वर्कप्लेस में इसे एक नए और गंभीर ट्रेंड के रूप में पहचाना जा रहा है, जिसे क्वायट फायरिंग कहा जाता है। बिना किसी नोटिस या साफ बातचीत के, कर्मचारी को खुद ही नौकरी छोड़ने की स्थिति में ला देना यही इस साइलेंट गेम की असली पहचान है।
क्वायट फायरिंग एक मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी है, जिसमें कर्मचारी से जिम्मेदारियां छीनी जाने लगती हैं। अहम मीटिंग्स से बाहर रखा जाता है, नए प्रोजेक्ट नहीं दिए जाते, फीडबैक मिलना बंद हो जाता है और करियर ग्रोथ पर बातचीत गायब हो जाती है। कर्मचारी कंपनी में तो रहता है, लेकिन उसका रोल लगभग खत्म कर दिया जाता है। संदेश साफ होता है, लेकिन कहा नहीं जाता “आप यहां जरूरी नहीं हैं।”
रिमोट वर्क, हाइब्रिड मॉडल और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता ने क्वायट फायरिंग को आसान बना दिया है। आमने-सामने बातचीत कम होने से मैनेजर्स के लिए टकराव से बचना सरल हो गया है। सीधे निकालने में जहां कानूनी झंझट, डॉक्यूमेंटेशन और मुआवजे का सवाल होता है, वहीं क्वायट फायरिंग में ये सब नहीं करना पड़ता।
अगर आपको अचानक काम कम मिलने लगे, आपके आइडिया अनसुने किए जाएं, प्रमोशन या अप्रेजल पर चुप्पी हो, या मैनेजर आपसे संवाद ही न करे तो ये क्वायट फायरिंग के संकेत हो सकते हैं। ये एक घटना नहीं, बल्कि समय के साथ बनने वाला पैटर्न होता है।
इसका सबसे गहरा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। बिना किसी साफ वजह के खुद को बेकार समझने लगना, आत्मविश्वास कम होना और हर समय उलझन में रहना ये सब क्वायट फायरिंग के आम संकेत हैं। कई बार लोग इसे अपनी नाकामी मान लेते हैं, जबकि असल परेशानी व्यक्ति में नहीं, बल्कि सिस्टम में होती है।
शॉर्टकट समझा जाने वाला यह तरीका, आगे चलकर कंपनी के वर्क कल्चर पर बुरा असर डालता है। टीम में डर और अविश्वास बढ़ता है, और लीडरशिप की साख कमजोर होती है। एक स्वस्थ संगठन वही होता है, जो मुश्किल बातचीत से भागे नहीं, बल्कि ईमानदारी से उसे संभाले।
Published on:
10 Jan 2026 02:50 pm
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