
Naina Raisinghani Nano Banana Google AI (Image: X)
Naina Raisinghani Nano Banana Google AI: दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक Google को आमतौर पर डेटा, रिसर्च और लंबी मीटिंग्स के लिए जाना जाता है। लेकिन कभी-कभी यहां फैसले इंसानी रचनात्मकता और हल्के-फुल्के पलों से भी जन्म ले लेते हैं। ऐसा ही एक मामला गूगल के चर्चित AI इमेज मॉडल ‘Nano Banana’ से जुड़ा है। एक ऐसा नाम जो जितना अनोखा है, उतनी ही दिलचस्प इसकी कहानी भी है।
यह कहानी जुड़ी है गूगल में सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर नैना रायसिंघानी से, जिनका जन्म पाकिस्तान के कराची में हुआ था और जिनके एक हल्के-फुल्के सुझाव ने इंटरनेट पर चर्चा का नया नाम दे दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वाकया जुलाई 2024 का है। गूगल को अपने एक AI इमेज मॉडल को पब्लिक प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करना था। इस मॉडल का तकनीकी नाम Gemini 2.5 Flash Image था, लेकिन टीम चाहती थी कि इसके लिए एक ऐसा कोडनेम हो जो थोड़ा यूनिक हो और लोगों की जुबान पर रट जाए।
इसी दौरान नैना रायसिंघानी को देर रात एक मैसेज मिला, जिसमें उनसे जल्दी से कोई कैची नाम सुझाने को कहा गया। उपलब्ध मीडिया जानकारी के मुताबिक, किसी लंबी बैठक के बिना, नैना रायसिंघानी ने उसी पल एक सहज विचार के रूप में ‘Nano Banana’ नाम सुझाया।
यह नाम शुरुआत में एक इंटरनल/अनौपचारिक कोडनेम के तौर पर इस्तेमाल हुआ, लेकिन इसकी अलग पहचान और लोगों को पसंद आने वाले अंदाज़ ने इसे जल्दी ही चर्चा में ला दिया।
इस नाम के पीछे कोई भारी-भरकम टेक्निकल लॉजिक नहीं, बल्कि एक निजी और मजेदार जुड़ाव है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नैना के दोस्त उन्हें मजाक में ‘Naina Banana’ कहकर बुलाते थे। वहीं, कुछ करीबी लोग उन्हें ‘Nano’ कहते थे।
इन्हीं दो नामों के मेल से बना ‘Nano Banana’। यही वजह है कि यह नाम गंभीर टेक प्रोडक्ट होने के बावजूद लोगों को इंसानी और यादगार लगता है।
नैना रायसिंघानी का जन्म पाकिस्तान के कराची में हुआ था। आगे चलकर उन्होंने University of Pennsylvania से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल की। अपनी तकनीकी समझ और प्रोडक्ट-सोच के दम पर उन्होंने गूगल जैसी कंपनी में सीनियर भूमिका निभाई।
आज नैना का नाम उन प्रोफेशनल्स में गिना जाता है, जो टेक्नोलॉजी और यूजर-फ्रेंडली सोच के बीच संतुलन बनाते हैं।
शुरुआत में ‘Nano Banana’ सिर्फ एक इंटरनल नाम था। लेकिन जब यह मॉडल यूजर्स के बीच लोकप्रिय हुआ और सोशल मीडिया पर इसके नाम की चर्चा बढ़ी, तो गूगल ने भी इसे अनौपचारिक पहचान के तौर पर अपनाए रखा।
बाद में जब इसी मॉडल का ज्यादा एडवांस वर्जन पेश किया गया, तो उसे ‘Nano Banana Pro’ कहा गया, जो इस बात का संकेत था कि यह नाम अब सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि एक पहचान बन चुका है।
‘Nano Banana’ की कहानी यह दिखाती है कि टेक्नोलॉजी की दुनिया सिर्फ कोड और एल्गोरिद्म तक सीमित नहीं है। कभी-कभी एक सरल, मानवीय और अनौपचारिक विचार भी लोगों से गहरा जुड़ाव बना सकता है।
Published on:
17 Jan 2026 01:43 pm
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