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बेलगाम बिजली चोरी: आठ माह में 2142 लाख यूनिट लाइन लॉस, गांवों में 45 फीसदी हो रही बिजली चोरी

24 घंटे बिजली आपूर्ति के बावजूद जिले में बिजली चोरी रोकना बना गंभीर चुनौती, शहर में 24 प्रतिशत तो ग्रामीण इलाकों में 40 से 45 प्रतिशत तक बिजली चोरी, विभागीय कार्रवाई बेअसर, समय पर नहीं लग पा रहे स्मार्टमीटर, निजी कंपनिया की लेटलतीफी

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कटनी

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Balmeek Pandey

Feb 08, 2026

There is a huge power theft in Katni district

There is a huge power theft in Katni district

बालमीक पांडेय @ कटनी. जिले में बिजली आपूर्ति का दायरा बढ़ा है, घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, वहीं कृषि कार्य के लिए किसानों को प्रतिदिन 10 घंटे निर्बाध बिजली दी जा रही है। इसके बावजूद बिजली चोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा, जिससे बिजली विभाग के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रेल नवंबर माह तक 7710 लाख यूनिट बिजली ली गई। 5565 लाख बिजली बेची गई, 2145 लाख यूनिट बिजली चोरी हो गई है। 67 प्रतिशत बिजली खपत की बिलिंग हो रही है। याने कि 100 यूनिट में 33 यूनिट की बिलिंग हो पा रही है।
प्रदेश स्तर पर जहां औसतन 29 प्रतिशत से अधिक बिजली चोरी दर्ज की जा रही है, वहीं कटनी जिले के शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा करीब 24 प्रतिशत है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब ग्रामीण इलाकों की बात की जाए, जहां 40 से 45 प्रतिशत तक बिजली चोरी हो रही है। बिजली चोरी रोकने के लिए विभाग द्वारा लगातार छापेमारी और जांच अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। बीते एक वर्ष में बिजली कंपनी ने 3794 उपभोक्ताओं के यहां बिजली चोरी, मीटर बायपास और एक स्थान से दूसरे स्थान पर अवैध बिजली उपयोग के मामले पकड़े हैं। बिजली चोरी पर रोक लगाने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, लेकिन उनकी प्रगति बेहद धीमी है।

यह है बिजली चोरी की स्थिति

एक अप्रेल से 6 फरवरी तक जिलेभर में 3794 उपभोक्ताओं के यहां बिजली कंपनी व बिजलेंस टीम ने छापेमारी की है। कार्रवाई के बाद 11 करोड़ 26 लाख रुपए की बिलिंग हुई है। इस कार्रवाई के विरुद्ध 1022 लोगों ने एक करोड़ 17 लाख रुपए की राशि जमा की है। वहीं शहरी क्षेत्र की बात की जा तो 1150 लोगों के यहां बिजली चोरी पकड़ी गई है। 4 करोड़ 80 हजार रुपए बिलिंग हुई है इसमें से 265 लोगों ने 39 लाख रुपए का बिल व जुर्माने की राशि जमा की है।

स्मार्ट मीटर के यह हैं फायदे

- स्मार्ट मीटर लगाए जाने से उपभोक्ता व विभाग को बड़े फायदे हैं। रियल टाइम रीडिंग की ऑनलाइन सुविधा, पॉवर फेक्टर इन्सेटिव रिवेट, टाइम ऑफ रिवेट की सुविधा दी जा रही है। सुबह 9 से शाम 5 बजे तक जो बिजली जलाई जा रही है उस खपत में 20 प्रतिशत ऊर्जा प्रभारी की छूट दी जा रही है। कोई व्यक्ति सोलर सिस्टम लगाता है तो यही मीटर काम करेगा, जिससे 8 से 10 हजार की बचत होती है, 30 दिन की बिलिंग सुविधा है, ज्यादा बिल नहीं आता, मैनुअल त्रुटि की पूरी संभावनाएं खत्म हैं, जितनी खपत उतनी ही बिलिंग, एवरेज बिल नहीं आता, गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार के लिए विशेष फायदेमंद है।

फैक्ट फाइल

- 03 लाख हैं जिले में घरेलू व व्यवसायिक कनेक्शन
- 40 लाख रुपए टीओडी की उपभोक्ताओं को मिल रही छूट।
- 3 करोड़ रुपए कम हो गया है बिजली कंपनी का राजस्व।
- 0 प्रतिशत करना है एवरेज कॉस्ट ऑफ सप्लाई।
- 100 में से 30 प्रतिशत हो रही है हर माह बिजली चोरी।
- 50 प्रतिशत है ग्रामीण इलाके में बिजली चोरी का आंकडा।
- 29.52 प्रतिशत पूरे प्रदेश में हो रही है बिजली चोरी।

स्मार्ट मीटर की यह है हकीकत

जिले में पहले व दूसरे फेज में एक लाख एक हजार 7 स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। वास्तविकता यह है कि मोंटी कारलो कंपनी को 39 हजार 192 स्मार्ट मीटर में से 36 हजार 700 मीटर लगाए हैं। वहीं दूसरी ओर अल्फानार कंपनी की प्रगति सबसे धीमी है। कंपनी को 61 हजार 815 स्मार्ट मीटर शहर में लगाने हैं, लेकिन अबतक 12 हजार 800 मीटर लगाए हैं।

यह लग रहा उपभोक्ताओं को रेट

बिजली कंपनी द्वारा घरेलू कनेक्शन पर औसतन 50 यूनिट तक की खपत पर 4.40 रुपए पर यूनिट, 51 से 150 यूनिट तक 5.45 रुपए, 150 से 300 तक 6.79 रुपए व 300 के ऊपर 6.98 रुपए बिल लिया जा रहा है। इसी प्रकार व्यवसायिक में 10 किलोवाट तक 6.70 रुपए, ऊपर पर 6.90 रुपए, उद्योग में 6.76 रुपए प्रति यूनिट चार्ज लिया जा रहा है।

वर्जन

बिजली चोरी रोकने लगातार जांच-कार्रवाई जारी है। लाइनलॉस कम करने के लिए भी पहल चल रही है। आरडीएसएसएस योजना के तहत स्मार्टमीटर भी तेजी से लग रहे हैं। उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के फायदे भी बताए जा रहे हैं। एवरेज कॉस्ट ऑफ सप्लाई व एवरेज रेवेन्यू रिकवरी में 0 प्रतिशत गैप करने के लक्ष्य पर काम चल रहा है।

मुकेश मोहबे, डीई।