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MP में बन रही देश की सबसे लंबी पानी की टनल, 4 जिलों की बुझाएगी प्यास

MP News: मध्यप्रदेश में जमीन से 30 मीटर नीचे बन रही 12 किमी लंबी जल सुरंग अप्रैल 2026 तक पूरी होगी। नर्मदा का पानी बिना पंपिंग सीधे रीवा पहुंचेगा, जिससे 4 जिलों के 2.45 लाख हेक्टेयर खेतों को स्थायी सिंचाई मिलेगी।

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कटनी

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Akash Dewani

Feb 13, 2026

india biggest Underground Water Tunnel to Carry Narmada to Rewa Rewa katni MP News

india biggest Underground Water Tunnel (Patrika.com)

MP News: जमीन से करीब 30 मीटर नीचे बन रही देश की सबसे लंबी पानी की टनल मध्यप्रदेश के जल इतिहास में मील का पत्थर बनने जा रही है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) द्वारा कटनी जिले के स्लीमनाबाद में निर्मित 12 किलोमीटर लंबी यह सुरंग बरगी (जबलपुर) से नर्मदा जल को सीधे रीवा तक पहुंचाएगी। परियोजना में अब महज 400 मीटर खुदाई शेष है और लक्ष्य अप्रैल 2026 तक कार्य पूरा करने का रखा गया है। टनल पूर्ण होते ही जबलपुर, कटनी, सतना और रीवा चार जिलों की करीब 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।

यह परियोजना बरगी व्यपवर्तन योजना का अहम हिस्सा है। दायीं तट मुख्य नहर से नर्मदा का पानी प्राकृतिक ढाल यानी ग्रेविटी सिस्टम से आगे बढ़ेगा। खास बात यह है कि इसके लिए अतिरिक्त पंपिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी। सतना और रीवा में बाणसागर परियोजना होने के बावजूद कम जलस्तर के कारण खेतों तक पानी पहुंचाने में परेशानी बनी रहती है। नर्मदा का ऊंचा जलस्तर इस समस्या का स्थायी समाधान बनेगा। फिलहाल जबलपुर जिले के सिहोरा सहित अन्य क्षेत्रों में इसी योजना से 60 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो रही है। 30 मीटर नीचे बन रही यह जल सुरंग केवल एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए नई उम्मीद और समृद्धि की राह है।

पहाड़ चीरकर बन रही है सुरंग

स्लीमनाबाद के सलैया फाटक और खिरहनी क्षेत्र में कठोर पहाड़ों को काटकर यह टनल बनाई जा रही है। अमेरिका और जर्मनी से आई दो अत्याधुनिक टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) से खुदाई की जा रही है। डाउन स्ट्रीम में 5500 मीटर और अप स्ट्रीम में 5100 मीटर खुदाई पूरी हो चुकी है। अब केवल 400 मीटर का काम शेष रह गया है।

2011 का लक्ष्य, 2026 में अंतिम चरण

परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी और इसे 2011 तक पूरा किया जाना था, लेकिन स्लीमनाबाद क्षेत्र की जटिल भूगर्भीय संरचना सबसे बड़ी चुनौती बनी। यहां 8 से 10 मीटर खुदाई पर ही पानी निकलने लगता है, जबकि टनल की गहराई 30 मीटर है। इसके साथ ही सिंकहोल यानी अचानक जमीन धंसने की समस्या और कोविड काल के कारण काम प्रभावित हुआ।

एनवीडीए के अनुसार 2021 के बाद निर्माण में तेजी आई। सुरक्षा के लिए टनल के ऊपर 20 मीटर चौड़ी जमीन पट्टी को अस्थायी रूप से अधिग्रहित किया गया है। किसानों को तीन फसलों का मुआवजा देकर कार्य कराया जा रहा है और जहां भी जमीन धंसने का खतरा होता है, तुरंत भराव कर स्थिति नियंत्रित की जाती है।

हर मीटर खुदाई भारी

टनल निर्माण में लगी टीबीएम मशीनों के कटर हेड में 56 कटर होते हैं। कठोर चट्टानों के कारण एक से डेढ़ मीटर खुदाई में ही 5-6 कटर टूट जाते हैं, जिससे करीब 10 लाख रुपए तक का खर्च बढ़ जाता है। इसके बावजूद काम लगातार आगे बढ़ रहा है।

किसे कितना लाभ

कुल लक्ष्य: 2.45 लाख हेक्टेयर
जबलपुर: 60,000 हेक्टेयर
कटनी: 21,823 हेक्टेयर
सतना: 1,59,655 हेक्टेयर
रीवा: 3,532 हेक्टेयर

स्लीमनाबाद में टनल निर्माण अंतिम चरण में है। करीब 400 मीटर कार्य शेष है, जिसे अप्रैल 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद चार जिलों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का सीधा लाभ मिलेगा।- सहज श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (MP News)