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व्यापारियों व उद्योग कारोबारियों में उठी आवाज: उद्योग विभाग हो अपग्रेड, हाईटेक बनाने के लिए हो समुचित फंड

बजट में व्यापारियों को मिले राहत, तभी कारोबार पकड़ेगा बूम, जीएसटी का सरलीकरण, स्वरोजगार को मिले बढ़ावा, स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन के साथ हो एयर स्ट्रिप

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 14, 2026

Central Government Budget

Central Government Budget

कटनी. फरवरी माह में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आम बजट को लेकर कटनी के व्यापारियों, कारोबारियों, व्यापारिक संगठनों और औद्योगिक इकाइयों के संचालकों में खासा उत्साह और उम्मीदें हैं। व्यापारियों का मानना है कि यदि इस बजट में व्यावहारिक और जमीनी स्तर पर लागू होने वाले प्रावधान किए गए, तो इससे न सिर्फ कारोबार को मजबूती मिलेगी बल्कि आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। शहर के व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में जीएसटी स्लैब अभी भी जटिल और अव्यवहारिक है, जिससे छोटे और मध्यम कारोबारियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जीएसटी को सरल और एकरूप किए जाने की आवश्यकता है, ताकि कर अनुपालन आसान हो और व्यापारियों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। इसके साथ ही योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर तक पहुंचे, यह भी बजट से बड़ी अपेक्षा है।
व्यापारियों ने यह भी मांग रखी कि औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने और संचालित करने में आने वाली प्रक्रियात्मक जटिलताओं को सरल किया जाए। स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाओं, स्टार्टअप्स और स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज लाया जाए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा और जिले की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जिले में बड़े माइनिंग सेक्टर की मौजूदगी को देखते हुए व्यापारियों ने केंद्र सरकार से एयर स्ट्रिप की सुविधा शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग भी की। उनका कहना है कि इससे उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक गतिविधियों को सीधा लाभ मिलेगा और जिले का औद्योगिक विकास तेज होगा। यह सभी विचार और सुझाव पत्रिका द्वारा मंगलवार को आयोजित टॉक शो के दौरान सामने आए, जिसमें शहर के प्रमुख कारोबारियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने खुलकर अपनी बात रखी। हर वर्ग को राहत देने वाला बजट जरूरी है। टैक्स का बोझ संतुलित होना चाहिए। व्यापार, उद्योग और आम जनता सभी को फायदा मिले। विकास के साथ सामाजिक संतुलन जरूरी है। सरकार से यही अपेक्षा है।

व्यापारियों ने रखी यह बात

वर्तमान में सरकार से सिर्फ लॉलीपॉप मिल रहा है। व्यापारियों व व्यापार के हित में कोई ठोस काम नहीं हो रहे। जीएसटी में दो साल तक बिल नहीं मिलते और जीएसटी लग रहा है। न भरने पर पेनाल्टी अभी भी गब्बर सिंह टैक्स लग रहा है। जनता और राजा के बीच में व्यापारी सेतु का काम करता है। सरकार चलाने में व्यापारियों की भूमिका है। इनके बारे में सोचना होगा। टैक्सपेयर को कोई सुविधा नहीं है।

अजय सरावगी, कारोबारी।

समस्याए हैं अपार

2014 में  जबसे केंद्र में मोदी सरकार है, प्रदेश पिछड़ा है। कटनी जिला ज्यादा पिछड़ा है। शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार का हाल बेहाल है। युवाओं के हाथ को काम मिले, देश की दिशा व दशा सुधारने वाला बजट होना चाहिए। बजट से सबसे बड़ी उम्मीद जीएसटी के सरलीकरण की है। छोटे व्यापारियों के लिए टैक्स सिस्टम आसान होना चाहिए। अनावश्यक नियमों से कारोबार प्रभावित होता है।

रमेश सोनी, कांग्रेस नेता व कारोबारी।

उद्योगों को बढ़ाना होगा

सरकार को जमीनी हकीकत को समझना चाहिए। स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत है। बजट में स्वरोजगार योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहन मिलना चाहिए। सस्ती वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

नितिन चौदहा, कारोबारी।

सिंगल विंडो सिस्टम

औद्योगिक इकाइयों के लिए नियमों का सरलीकरण जरूरी है। अनुमतियों में देरी से निवेशक हतोत्साहित होते हैं। बजट में सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत किया जाए। स्थानीय निवेश को प्राथमिकता मिले। यह क्षेत्रीय विकास में सहायक होगा।

रजनीश तिवारी, कारोबारी।

बढ़ रही है लागत

व्यापारियों को राहत देने वाला बजट आना चाहिए। महंगाई के दौर में लागत लगातार बढ़ रही है। टैक्स में छूट से कारोबार को संबल मिलेगा। सरकार को हर वर्ग का ध्यान रखना चाहिए। संतुलित बजट ही अर्थव्यवस्था को गति देगा। माइनिंग सेक्टर के लिए आधारभूत सुविधाएं जरूरी हैं। एयर स्ट्रिप की सुविधा से बड़ा बदलाव आएगा।

किशोर वाधवानी, कारोबारी।

होंगे ठोस प्रावधान

हमेशा की तरह बजट में देशवासियों के लिए खास प्रावधान होंगे। किसान, महिला, नौकरीपेशा, कर्मचारी सभी के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार पर फोकस रहेगा। बजट में इस प्रकार के ठोस प्रावधान से देश तेजी से आगे बढ़ेगा।

दीपक तिवारी, कारोबारी।

जीएसटी में हो संशोधन

स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना समय की मांग है। बजट में लोकल टू वोकल को मजबूती मिले। छोटे कारीगरों और व्यापारियों को सहायता दी जाए। मार्केटिंग और ब्रांडिंग में मदद मिले। युवाओं के हाथ को काम मिले। जीएसटी की दरों में संशोधन आवश्य है।

लकी भसीन, कारोबारी।

बढ़े पारदॢशता

योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर होना चाहिए। अक्सर लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचता। बजट में निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए। पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है। तभी योजनाएं सफल होंगी।

जयदीप पांडेय, शहरवासी।

सस्ती हो ब्याज दर

एमएसएमई सेक्टर को विशेष पैकेज मिले। छोटे उद्योगों से ही रोजगार का सृजन होता है। सस्ती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाए। तकनीकी उन्नयन के लिए सहायता जरूरी है। बजट में यह प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रभात तिवारी, कारोबारी।

नीतियां हों व्यवहारिक

व्यापारिक संगठनों की समस्याएं गंभीर हैं। जीएसटी में सरलीकरण जरूरी है। सरकार को संवाद बढ़ाना चाहिए। बजट से पहले सुझावों को शामिल किया जाए। नीतियां व्यावहारिक हों। तभी कारोबारी विश्वास बढ़ेगा।

सिराजुद्दीन नाजु, कारोबारी।

आगामी बजट में यह हों प्रावधान

सुधीर कुमार मिश्रा प्रदेश उपाध्यक्ष मप्र लघु उद्योग संघ का मानना है कि देश के समस्त उद्योग विभाग अपग्रेड हो, एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं मिलें। पुराने औद्योगिक हाई टेक बनाने समुचित फंड हो, सभी जिलों में  टेस्टिंग लैबोरेट्री एवं आर एंड डी सेंटर बनें। एमएसएमई उद्योग को इनकम टैक्स की जो रेट है काम कर वह 10 से 15 प्रतिशत तक होनी चाहिए। उद्योगों में सोलर के इंस्टॉलेशन पर 50त्न की सब्सिडी दी जाना चाहिए। बैंकों द्वारा जो गारंटी में प्रॉपर्टी मॉर्टगेज लि जाती है उस पर स्टांप ड्यूटी पूर्ण तरह से छूट होना चाहिए। बैंकों द्वारा एमएसएमई उद्योग को लोन पर 5 से 7 प्रतिशत तक का ही ब्याज लिया जाना चाहिए। वर्तमान में जो जीएसटी के रेट 18 परसेंट रखे हैं उसे घटा करके 12 प्रतिशत किया जाना चाहिए। बिजली में यूनिट चार्ज कम हों, छोटे-छोटे औद्योगिक क्षेत्र बनाने प्रावधान हों, उद्योगों के मालिकों के लिए केंद्र शासन द्वारा 10 लाख रुपए तक का बीमा किया जाना चाहिए।