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राजस्थान: शिक्षा विभाग की बड़ी चूक, मौत के 2 माह बाद कर दिया व्याख्याता का तबादला; नाम देख रो पड़े परिजन

राजस्थान शिक्षा विभाग की बड़ी चूक सामने आई है। एक व्याख्याता की मृत्यु के करीब दो महीने बाद शिक्षा विभाग ने उसका तबादला आदेश जारी कर दिया।

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पटवारियों के तबादले (photo source- Patrika)

पटवारियों के तबादले (photo source- Patrika)

Karauli News: राजस्थान में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से गत दिवस बड़ी संख्या किए स्कूल व्याख्याताओं के तबादलों में 2 माह पहले मृत एक व्याख्याता का भी स्थानांतरण कर दिया गया।

मृतक व्याख्याता का करौली जिले के हिण्डौन से धौलपुर जिले में तबादला किया गया है। शिक्षा विभाग की सूची में व्याख्याता रहे संतराज माली का नाम देखकर एक बार फिर परिजनों की आंखें नम हो गई।

तबादला सूची में त्रुटि चर्चा का विषय

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से 9 जनवरी को इतिहास विषय के व्याख्याताओं की 'जंबो' तबादला सूची जारी की थी। संस्थान प्रधानों ने अपने विद्यालयों में तबादला हो जाने व आने वालों की जानकारी के लिए सूची खंगाली तो दो माह पहले मृत हुए व्याख्याता संतराज माली का नाम देखकर चकित रह गए।

सूची में संतराज माली का हिण्डौन पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से धौलपुर जिले के गांव सिलावत के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में तबादला किया है। तबादला सूची में त्रुटि को लेकर शिक्षकों में दिनभर चर्चा रही। गौरतलब है कि व्याख्याता संतराज माली का नवम्बर माह में निधन हो गया था।

बीच सत्र में फिर हुए शिक्षा विभाग के बड़े तबादले

हाल ही में अदालत ने शिक्षा विभाग में बीच सत्र में किए गए स्थानांतरणों पर तल्ख टिप्पणी की थी। लेकिन सरकार ने इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया और शुक्रवार को व्याख्याताओं की तबादला सूची जारी कर दी। गुरुवार रात उप प्राचार्य और उप जिला शिक्षा अधिकारियों (शारीरिक शिक्षा) के स्थानांतरण किए गए थे।

नया शिक्षा सत्र करीब, फिर भी स्थानांतरण की रफ्तार नहीं रुकी

अप्रेल से नया शिक्षा सत्र शुरू होने को है और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की वार्षिक परीक्षाएं फरवरी से शुरू होने वाली हैं। ऐसे में पाठ्यक्रम पूरा किए बिना स्कूलों में लगातार स्थानांतरण प्रक्रिया जारी है, जिससे शिक्षकों और छात्रों के लिए परेशानी बढ़ सकती है। परीक्षाएं शुरू होने में भी सिर्फ एक माह का समय बचा है।

कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया में भी बदलाव

यहां गौर करने वाली बात है कि उप प्राचार्य और उप जिला शिक्षा अधिकारियों ने शाला दर्पण के माध्यम से कार्य ग्रहण और कार्य मुक्त कर लिया है। यह प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक तेजी से सम्पन्न हो रही है, जिससे विभाग में और भी बदलाव देखे जा रहे हैं।